हाथों का कांपना (Hand Tremor) एक ऐसी समस्या है, जिसे देखकर कई लोग सबसे पहले पार्किंसंस रोग (Parkinson's Disease) के बारे में सोचने लगते हैं। हालांकि, हर बार हाथ कांपने का मतलब पार्किंसंस होना नहीं होता। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, हाथों में कंपन का एक बहुत ही सामान्य कारण एसेंशियल ट्रेमर (Essential Tremor) भी है, जो एक अलग प्रकार का न्यूरोलॉजिकल मूवमेंट डिसऑर्डर है। चूंकि दोनों बीमारियों में हाथ कांपने का लक्षण दिखाई देता है, इसलिए कई बार लोग इनके बीच का अंतर समझ नहीं पाते और घबरा जाते हैं। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, एसेंशियल ट्रेमर और पार्किंसंस रोग में कंपन का पैटर्न, अन्य लक्षण और इलाज पूरी तरह अलग होते हैं। एसेंशियल ट्रेमर में हाथ आमतौर पर किसी काम के दौरान, जैसे लिखते समय, खाना खाते समय, कप पकड़ते समय या किसी सामान को उठाते समय कांपते हैं। वहीं, पार्किंसंस रोग में कंपन अक्सर तब ज्यादा दिखाई देता है, जब व्यक्ति आराम की स्थिति में होता है और हाथ किसी एक्टिविटी में शामिल नहीं होते।
एसेंशियल ट्रेमर और पार्किंसंस डिजीज के अंतर
डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, दोनों स्थितियों में हाथ कांपने की समस्या जरूर होती है, लेकिन इनके कारण, लक्षण और इलाज एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं। सही समय पर सही पहचान होने से मरीज को उचित इलाज मिल सकता है और दिक्कतों से भी बचा जा सकता है।
1. एसेंशियल ट्रेमर
डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि एसेंशियल ट्रेमर एक सामान्य मूवमेंट डिसऑर्डर है, जिसमें हाथ किसी काम को करते समय कांपते हैं। उदाहरण के लिए, लिखते समय, चाय या पानी का कप पकड़ते समय, खाना खाते समय या किसी वस्तु को उठाते समय हाथों में कंपन महसूस हो सकता है। यह समस्या अक्सर दोनों हाथों को प्रभावित करती है। कुछ मरीजों में सिर का कांपना या आवाज में कंपन भी देखा जा सकता है। कई लोगों में यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगती है। हालांकि, इस बीमारी में आमतौर पर मसल्स में जकड़न या चलने-फिरने में गंभीर बदलाव नहीं होते, जो इसे पार्किंसंस डिजीज से अलग बनाते हैं।
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साल 2014 में Tremor Journal में प्रकाशित स्टडी रिव्यू के अनुसार, एसेंशियल ट्रेमर (ET) एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है या नहीं, इसे लेकर वैज्ञानिकों में लंबे समय से बहस चल रही है। रिसर्च से पता चलता है कि बढ़ती उम्र के साथ यह बीमारी बढ़ती ह, और इसमें संतुलन बनाने वाली दिमागी कोशिकाओं का नुकसान देखा गया है। मॉडर्न न्यूरोइमेजिंग तकनीक जैसे MRI भी मरीजों के दिमाग में ऐसे बदलाव दिखाती हैं जो सेल्स के नष्ट होने का संकेत देते हैं। हालांकि, इसे पूरी तरह साबित करने के लिए और ज्यादा लंबे समय तक चलने वाले क्लीनिकल और इमेजिंग स्टडीज की जरुरत है।
2. पार्किंसंस डिजीज
पार्किंसंस डिजीज में होने वाला कंपन एसेंशियल ट्रेमर से अलग होता है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, पार्किंसंस में हाथों का कांपना आमतौर पर आराम की स्थिति (Resting Tremor) में ज्यादा दिखाई देता है, यानी जब व्यक्ति हाथों का उपयोग नहीं कर रहा होता। जैसे ही मरीज किसी काम के लिए हाथ का इस्तेमाल करता है, कंपन कुछ हद तक कम हो सकता है। इसके अलावा पार्किंसंस डिजीज में केवल ट्रेमर ही नहीं होता, बल्कि मरीज की एक्टिविटीज भी धीमी पड़ जाती हैं, मांसपेशियों यानी मसल्स में जकड़न महसूस होती है, चेहरे के भाव कम हो सकते हैं और चलने का तरीका भी बदल सकता है। बैलेंस बनाए रखने में कठिनाई और छोटे-छोटे कदमों से चलना भी इस बीमारी के संकेत माने जाते हैं।

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दोनों बीमारियों की पहचान कैसे की जाती है?
एसेंशियल ट्रेमर और पार्किंसंस डिजीज की पहचान के लिए कोई एक खास ब्लड टेस्ट उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि सही निदान के लिए सबसे पहले मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है और न्यूरोलॉजिकल जांच की जाती है। डॉक्टर यह देखते हैं कि कंपन किस स्थिति में हो रहा है, कितनी गंभीरता है और उसके साथ अन्य कौन-कौन से लक्षण मौजूद हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में मस्तिष्क की एमआरआई (MRI) या अन्य ब्रेन इमेजिंग जांच कराने की सलाह दी जा सकती है।
इलाज
डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, दोनों बीमारियों का इलाज अलग-अलग होता है। एसेंशियल ट्रेमर के कई मरीजों में दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव के जरिए कंपन को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। वहीं, पार्किंसंस डिजीज में ऐसी दवाओं का उपयोग किया जाता है जो मस्तिष्क में डोपामाइन (Dopamine) के काम को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। इसके साथ फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और नियमित एक्सरसाइज भी इलाज का हिस्सा हैं।
निष्कर्ष
हाथों का कांपना हमेशा पार्किंसंस डिजीज का संकेत नहीं होता। कई मामलों में इसका कारण एसेंशियल ट्रेमर जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति हो सकती है। दोनों बीमारियों के लक्षण, कंपन का प्रकार और इलाज अलग-अलग होते हैं। इसलिए स्वयं अनुमान लगाने या केवल इंटरनेट की जानकारी के आधार पर हल निकालने के बजाय एक्सपर्ट डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
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FAQ
एसेंशियल ट्रेमर के लक्षण क्या हैं?
लिखते समय, खाना खाते समय, कप पकड़ते समय या किसी वस्तु को उठाते समय हाथ कांपना एसेंशियल ट्रेमर के लक्षण हैं, इसके अलावा कुछ मरीजों में सिर या आवाज में भी कंपन हो सकता है।क्या एसेंशियल ट्रेमर का इलाज संभव है?
एसेंशियल ट्रेमर का इलाज संभव है, कई मरीजों में दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव से कंपन को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।हाथों का कांपना कैसे बंद करें?
यदि हाथों का कंपन लगातार बना रहे या उसके साथ शरीर में जकड़न और डेली एक्टिविटीज में समस्याएं हों, तो बिना देर किए न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना चाहिए।
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Jul 13, 2026 16:09 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti