Tue Sep 22, 2026 | 06:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

Wilson Disease: युवाओं में हाथ कांपना और लिवर की बीमारी का क्या है संबंध? जानें डॉक्टर से

अगर किसी व्यक्ति में बिना किसी स्पष्ट कारण के लिवर की समस्या के साथ हाथों का कांपना, शरीर में अकड़न या बोलने में कठिनाई जैसी शिकायतें दिखाई दें, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Wilson Disease: युवाओं में हाथ कांपना और लिवर की बीमारी का क्या है संबंध? जानें डॉक्टर सेWilson Disease: युवाओं में हाथ कांपना और लिवर की बीमारी का क्या है संबंध? जानें डॉक्टर से

आज के समय में युवाओं में लिवर और न्यूरोलॉजिकल से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। अक्सर हाथों का कांपना, शरीर में अकड़न, बैलेंस बिगड़ना या बिना किसी स्पष्ट कारण के लिवर की बीमारी को अलग-अलग समस्याएं मान लिया जाता है लेकिन कई बार ये दोनों लक्षण एक ही दुर्लभ बीमारी यानी रेयर डिजीज विल्सन डिजीज (Wilson's Disease) की ओर इशारा करते हैं। यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर एक्स्ट्रा कॉपर यानी तांबा को बाहर नहीं निकाल पाता।

जिसके बाद कॉपर धीरे-धीरे लिवर, मस्तिष्क, आंखों और अन्य अंगों में जमा होने लगता है, जिससे गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी से जानिए, हाथ कांपना और लिवर की बीमारी का क्या कनेक्शन है और विल्सन डिजीज क्या होती है?

विल्सन डिजीज का हाथ कांपना और लिवर की बीमारी से कनेक्शन

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि विल्सन डिजीज एक दुर्लभ आनुवंशिक (Inherited) विकार है, जिसमें शरीर अतिरिक्त कॉपर को सामान्य तरीके से बाहर नहीं निकाल पाता। यही कॉपर धीरे-धीरे लिवर, मस्तिष्क और शरीर के अन्य जरूरी अंगों में जमा होने लगता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर अंगों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। शुरुआत में बीमारी के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई बार मरीज इसका इलाज समय पर शुरू नहीं करवा पाते हैं। हालांकि यदि समय रहते बीमारी का पता चल जाए, तो दवाओं और उचित देखभाल से इसके नुकसानों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

  • डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि विल्सन डिजीज का असर सबसे पहले लिवर पर दिखाई दे सकता है। युवा मरीजों में हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, लिवर एंजाइम का बढ़ना या बिना स्पष्ट कारण के लिवर फेल होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
  • जैसे-जैसे शरीर में कॉपर की मात्रा बढ़ती है, उसका असर मस्तिष्क यानी दिमाग पर भी पड़ने लगता है। इसके कारण हाथों में कंपन (Hand Tremors), मांसपेशियों में जकड़न, बैलेंस बिगड़ना, चलने-फिरने में कठिनाई, बोलने में परेशानी, असामान्य फिजिकल एक्टिविटीज और मूड में बदलाव जैसे न्यूरोलॉजिकल लक्षण विकसित हो सकते हैं।
  • यही कारण है कि कई बार इसे दूसरी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के रूप में समझ लिया जाता है और सही इलाज में देरी हो जाती है।

साल 2025 में NIH की Bookshelf में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विल्सन डिजीज (Wilson disease) एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर के मुख्य अंगों, खासकर लिवर और दिमाग में तांबा (copper) खतरनाक लेवल तक जमा होने लगता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकती है और लिवर फेलियर का कारण बन सकती है। इस बीमारी को कंट्रोल रखने के लिए समय पर पहचान और जीवनभर का सही मैनेजमेंट बेहद जरूरी है। इसके लक्षणों में पीलिया, कंपन (tremors) और मानसिक बदलाव शामिल हैं।

Wilson DiseaseWilson Disease

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विल्सन डिजीज की पहचान कैसे की जाती है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि इस बीमारी का सही इलाज कई तरह की जांचों के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों को देखने के बाद ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और लिवर फंक्शन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

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इसके अलावा आंखों की खास जांच के जरिए Kayser-Fleischer Rings की पहचान की जाती है, जो इस बीमारी का अहम संकेत मानी जाती है। जरूरत पड़ने पर ब्रेन इमेजिंग और जेनेटिक टेस्ट भी किए जाते हैं। डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी का कहना है कि जितनी जल्दी बीमारी का पता चलेगा, उतनी ही जल्दी इलाज शुरू कर लिवर और दिमाग को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।

विल्सन डिजीज का इलाज

विल्सन डिजीज का इलाज मुख्य रूप से ऐसी दवाओं से किया जाता है जो शरीर में जमा अतिरिक्त कॉपर को बाहर निकालने या उसके अवशोषण को कम करने में मदद करती हैं। इसके साथ मरीज को जीवनभर नियमित फॉलो-अप, डॉक्टर की निगरानी और खानपान में जरूरी बदलाव अपनाने होते हैं।

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, 40 वर्ष से कम उम्र के ऐसे लोगों को विशेष रूप से जांच करानी चाहिए जिन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के लिवर की बीमारी हो और उसके साथ हाथों में कंपन, संतुलन की समस्या या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिखाई दें। समय पर जांच से बीमारी को कंट्रोल करना संभव है।

निष्कर्ष

विल्सन डिजीज भले ही एक दुर्लभ बीमारी हो, लेकिन इसकी समय पर पहचान मरीज की जिंदगी बदल सकती है। कम उम्र में लिवर संबंधी समस्याओं के साथ हाथों का कांपना, बोलने में कठिनाई या व्यवहार में बदलाव जैसे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर जांच, उचित दवाएं, नियमित फॉलो-अप और डॉक्टर की सलाह का पालन करके लिवर और दिमाग को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत एक्सपर्ट डॉक्टर से सलाह लेना सबसे जरूरी है।

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FAQ

  • क्या विल्सन डिजीज का इलाज संभव है?

    समय पर पहचान होने पर दवाओं, नियमित फॉलो-अप और खानपान में बदलाव की मदद से बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है।
  • क्या विल्सन डिजीज आनुवंशिक बीमारी है?

    विल्सन डिजीज माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से होने वाली एक आनुवंशिक बीमारी है।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 29, 2026 23:22 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti

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