Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

रात में नींद में हाथ-पैर चलाना भविष्य में Parkinson's का शुरुआती संकेत हो सकता है? डॉक्टर से जानें

नींद में हाथ-पैर चलाना या सपनों के दौरान जोर-जोर से हरकत करना फ्यूचर में पार्किंसन डिजीज का शुरुआती संकेत हो सकता है। यहां जानें, ऐसा क्यों होता है और किन लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल, तनाव और अनियमित डेली रूटीन का असर सबसे पहले हमारी नींद पर पड़ता है। कई लोगों में सोते समय हाथ या पैर हिलने, झटके लगने या करवट बदलने जैसी नॉर्मल एक्टिविटी होती हैं, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यदि कोई व्यक्ति नींद में बार-बार हाथ-पैर जोर-जोर से चलाता है, सपने के अनुसार लात मारता है, चिल्लाता है या बिस्तर से गिर जाता है, तो यह केवल सामान्य नींद का हिस्सा नहीं भी हो सकता। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी का मानना है कि कुछ मामलों में ऐसी असामान्य हरकतें तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकती हैं।

नींद में हाथ-पैर चलाने और पार्किंसंस के बीच क्या संबंध है?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि कुछ लोगों में REM Sleep Behavior Disorder नाम की स्थिति विकसित हो जाती है। सामान्य रूप से REM नींद के दौरान शरीर की मांसपेशियां लगभग इनएक्टिव रहती हैं, जिससे व्यक्ति सपनों के अनुसार हरकत नहीं करता लेकिन RBD में यह ठीक से काम नहीं करती और व्यक्ति सपनों के दौरान हाथ-पैर चलाने, लात मारने, मुक्का चलाने या बिस्तर से गिरने जैसी हरकतें कर सकता है।

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी का कहना है कि RBD से पीड़ित कुछ लोगों में सालों बाद पार्किंसंस डिजीज या अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियां विकसित हो सकती हैं। हालांकि इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि नींद में हाथ-पैर हिलाने वाले हर व्यक्ति को भविष्य में पार्किंसंस जरूर होगा। सही कारण जानने के लिए एक्सपर्ट से हेल्थ चेकअप जरूरी होता है।

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पार्किंसंस रोग का क्या असर होता है?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, पार्किंसंस रोग एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की डोपामिन बनाने वाली सेल्स धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। डोपामाइन शरीर की एक्टिविटीज को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर शरीर की स्पीड, बैलेंस और मांसपेशियों का कंट्रोल प्रभावित होने लगता है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में हाथों का कांपना, धीमी चाल, शरीर में अकड़न, बैलेंस बिगड़ना और चेहरे के भाव कम होना शामिल हो सकते हैं। हालांकि कई लोगों में इन लक्षणों से पहले नींद से जुड़ी कुछ असामान्य समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं।

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  • यदि नींद में बार-बार असामान्य हरकतें हो रही हैं और इसके साथ दिन के समय हाथ कांपना, शरीर में अकड़न, चलने में समस्या, आवाज धीमी होना, सूंघने की क्षमता कम होना या बार-बार गिरने जैसी समस्याएं भी महसूस हो रही हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, शुरुआती स्टेज में पहचान होने से बीमारी का बेहतर मैनेजमेंट संभव हो सकता है। इसके लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, न्यूरोलॉजिकल जांच और जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी जैसी जांच की जा सकती है।

साल 2020 में Cambridge University Press में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, पार्किंसंस बीमारी (PD) के जिन मरीजों में आरबीडी (RBD) के लक्षण होते हैं, उनकी मानसिक और व्यावहारिक स्थिति ज्यादा खराब होती है। बिना आरबीडी वाले मरीजों की तुलना में, इन मरीजों की सोचने-समझने, फैसले लेने, नई चीजें सीखने और रोजमर्रा की दवाइयां संभालने की क्षमता काफी कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, इनमें उदासी, घबराहट जैसी भावनात्मक समस्याएं भी ज्यादा देखी गईं। इसलिए, पार्किंसंस के मरीजों में समय रहते आरबीडी की पहचान करना बहुत जरूरी है, ताकि उनके मानसिक और दिमागी इलाज के लिए सही कदम उठाए जा सकें।

early sign of parkinsons disease

डॉक्टर की सलाह

नींद से जुड़ी किसी भी असामान्य समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए। नियमित नींद लेना, तनाव कम करना, बैलेंस डाइट का सेवन, रोजाना एक्सरसाइज करना और किसी भी न्यूरोलॉजिकल लक्षण के दिखने पर एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहद जरूरी है। यदि परिवार के सदस्य बताते हैं कि आप सोते समय बार-बार हाथ-पैर चलाते हैं या सपनों के अनुसार हरकत करते हैं, तो इसे सामान्य मानकर टालने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष

नींद में हाथ-पैर हिलाना हमेशा पार्किंसंस रोग का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में यह REM Sleep Behavior Disorder (RBD) जैसी स्थिति का हिस्सा हो सकता है, जिसका संबंध फ्यूचर में पार्किंसंस डिजीज से देखा गया है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, यदि ऐसी हरकतें बार-बार हों या इनके साथ हाथ कांपना, शरीर में अकड़न और चलने में बदलाव जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो जल्द से जल्द न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।

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FAQ

  • पार्किंसंस रोग के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

    हाथ कांपना, शरीर में अकड़न, बैलेंस बिगड़ना, आवाज धीमी होना और सूंघने की क्षमता कम होना इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
  • पार्किंसंस रोग का पूरी तरह इलाज संभव है?

    फिलहाल इसका स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं, एक्सरसाइज और समय पर इलाज से लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
  • पार्किंसन रोग में क्या नहीं खाना चाहिए?

    पार्किंसन डिजीज के मरीजों को प्रोसेस्ड फूड, बहुत ज्यादा चीनी और मांस के ज्यादा सेवन से बचना चाहिए।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 09, 2026 15:30 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Jul 09, 2026 15:30 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti

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