ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति का दिमाग अलग तरीके से विकसित होता है। कुछ ऑटिस्टिक लोगों में सीखने से जुड़ी समस्या हो सकती है, जबकि कुछ की बुद्धि सामान्य या सामान्य से ज्यादा हो सकती है। कुछ साल पहले एक्टर शाहरुख खान की फिल्म आई थी ‘माई नेम इज खान’ जिसमें शाहरुख ने रिजवान खान का किरदार निभाया था। फिल्म में रिजवान एस्पर्जर सिंड्रोम से पीड़ित दिखाया गया है, जिसे आज ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के व्यापक दायरे में समझा जाता है। आइए जानते हैं ऑटिज्म के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
National Health Service, UK के मुताबिक, ऑटिस्टिक लोगों में कुछ दूसरी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है, जैसे मिर्गी, एंग्जाइटी, ईटिंग डिसऑर्डर और डिप्रेशन। ADHD यानी ध्यान से जुड़ी समस्या भी ऑटिस्टिक लोगों में ज्यादा देखने को मिल सकती है।
क्या है ऑटिज्म?

ऑटिज्म (Autism Spectrum Disorder) एक न्यूरो-विकास संबंधित कंडीशन है। इसमें व्यक्ति के लिए दूसरों से बातचीत करना, सामाजिक संकेतों को समझना और आस-पास की चीजों को महसूस करना थोड़ा अलग हो सकता है। ऑटिज्म की शुरुआत बचपन में ही हो जाती है।
ऑटिज्म के लक्षण
- बोलने में देरी होना।
- दूसरों के हाव-भाव या भावनाओं को समझने में दिक्कत होना।
- एक ही काम या व्यवहार को बार-बार दोहराना। या एक ही हरकत बार-बार करना, जैसे आगे-पीछे हिलना, घूमना या लगातार हाथ हिलाना।
- रोज एक जैसी दिनचर्या पसंद करना।
- तेज आवाज, रोशनी या कुछ चीजों के छूने से ज्यादा परेशानी होना।
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ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्ति के व्यवहार को कैसे समझें?
- ऑटिज्म को मेडिकल टर्म के तौर पर समझना अलग बात है। इस कंडीशन से पीड़ित व्यक्ति की मनोदशा को समझकर ही बीमारी का असल मतलब समझ आता है। ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्ति के व्यवहार को इस तरह समझ सकते हैं-
- ऐसे लोग ज्यादा चुप रहने लगते हैं या खुद को दूसरों से अलग रखते हैं।
- कुछ बच्चों को पढ़ाई करने या नई चीजें सीखने में परेशानी में हो सकती है।
- वहीं कुछ बच्चों की बुद्धि ज्यादा तेज भी हो सकती है।
- दूसरों के साथ घुलने-मिलने और बातचीत करने में परेशानी हो सकती है।
- अपने नाम पर प्रतिक्रिया न देना या कभी-कभी ऐसा लगना कि वे सुन ही नहीं रहे हैं।
- अकेले खेलना पसंद करना, अपनी ही दुनिया में खोए रहना।
- कम आई कॉन्टैक्ट होना और चेहरे पर कोई भाव न होना।
- असामान्य लहजे या लय में बात करना और गाने जैसी आवाज या रोबोट जैसी आवाज का इस्तेमाल करना।
ऑटिज्म क्यों होता है?
इसकी एक तय वजह नहीं है। कुछ रिसर्च में यह बताया गया है कि इस कंडीशन में जेनेटिक और कुछ पर्यावरणीय कारणों की भूमिका हो सकती है। कुछ आनुवंशिक बदलाव माता-पिता से मिल सकते हैं, जबकि कुछ अपने आप भी हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान कुछ स्थितियां भी इसके खतरे को बढ़ावा दे सकती हैं। ध्यान रखें कि ऑटिज्म माता-पिता की परवरिश या वैक्सीन लगवाने की वजह से नहीं होता।
ऑटिज्म की जांच कैसे होती है?
ऑटिज्म की जांच किसी एक ब्लड टेस्ट या स्कैन से नहीं होती। जांच में डॉक्टर बच्चे के विकास, व्यवहार, बोलने के तरीके और सामाजिक व्यवहार को देखकर लक्षणों का आंकलन करते हैं। डॉक्टर प्रश्नावली और स्क्रीनिंग टूल का इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि ऑटिज्म के संकेतों का पता लगाया जा सके।
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ऑटिज्म का इलाज क्या है?
ऑटिज्म का अभी कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर सही मदद और थेरेपी से व्यक्ति के विकास और रोजमर्रा की जिंदगी में काफी सुधार हो सकता है। इसमें बिहेवियरल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और पढ़ाई से जुड़ी मदद शामिल हो सकती है। जरूरत पड़ने पर चिंता या ADHD जैसी दूसरी समस्याओं के लिए दवाएं भी दी जा सकती हैं। सही सहयोग मिलने पर ऑटिज्म से जूझ रहे लोग खुशहाल और आत्मनिर्भर जीवन जी सकते हैं।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में अक्सर 3 साल की उम्र से पहले विकास में देरी के कुछ संकेत दिखाई देने लगते हैं। ऑटिज्म के शुरुआती संकेतों में बोलने में देरी और सामाजिक मेल-जोल में परेशानी शामिल हो सकती है। अगर बच्चे के विकास को लेकर चिंता है या लगता है कि बच्चे में ऑटिज्म के लक्षण हो सकते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष:
ऑटिज्म एक न्यूरो-विकास संबंधित कंडीशन है। इससे जूझे रहे व्यक्ति के लिए दूसरों से बातचीत करना, सामाजिक संकेतों को समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ऐसे लोगों में बोलने में देरी होना, एक ही काम को दोहराना, भावनाओं को समझने में परेशानी होने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। ऑटिज्म के पीछे जेनेटिक कारण या प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ खास स्थिति के चलते बच्चे को यह कंडीशन हो सकती है। ऑटिज्म की जांच में बच्चे के विकास, व्यवहार, बोलने के तरीके और सामाजिक व्यवहार पर गौर किया जाता है। ऑटिज्म का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है। थेरेपी और काउंसलिंग की मदद से व्यक्ति की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में अक्सर 3 साल की उम्र से पहले विकास में देरी के संकेत दिखने लगते हैं जैसे बोलने में परेशानी या सामाजिक मेल-जोल में दिक्क्त, ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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FAQ
क्या ऑटिज्म केवल बच्चों को होता है?
नहीं, ऑटिज्म बचपन में शुरू होने वाली कंडीशन है और इसका असर व्यक्ति के बड़े होने के बाद भी बना रह सकता है।क्या ऑटिज्म समय के साथ ठीक हो जाता है?
नहीं, ऑटिज्म समय के साथ पूरी तरह ठीक नहीं होता। यह दिमाग के विकास से जुड़ी समस्या है जो जीवनभर बनी रह सकती है।
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Sep 10, 2026 19:07 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra