Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

आपसे दूर होते ही रोने लगता है बच्‍चा? डॉक्‍टर से जानें बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी के कारण और न‍िपटने के उपाय

कई बच्‍चे पैरेंट्स से दूर होते ही या उनकी गोद से उतरते ही रोने लगते हैं। यह सेपरेशन एंग्‍जायटी हो सकती है जो क‍ि श‍िशुओं और बच्‍चों में अक्‍सर देखने को म‍िलती है। जानें यह बच्‍चों की सेहत को कैसे प्रभाव‍ित कर सकती है और इससे बचने के उपाय। 

कुछ श‍िशु या बच्‍चे अपने माता-प‍िता से दूर होकर रोने लगते हैं ज‍िसे हम एक सामान्‍य प्रत‍िक्र‍िया समझकर अक्‍सर नजरअंदाज कर देते हैं, लेक‍िन कुछ बच्‍चों में यह सेपरेशन एंग्‍जायटी हो सकती है जो क‍ि एक तरह की मेंटल हेल्‍थ कंडीशन है ज‍िसमें बच्‍चे अपने पैरेंट्स से दूर होने पर एंग्‍जायटी या डर महसूस करते हैं। वैसे तो यह समस्‍या वयस्‍कों में भी होती है जो अपने क‍िसी करीबी के दूर जाने से डर महसूस करते हैं, लेक‍िन बच्‍चे अपने इमोशन्‍स को खुलकर जाहि‍र नहीं कर सकते इसल‍िए उनमें यह समस्‍या होना च‍िंता की बात है। आइए जानते हैं क‍ि श‍िशुओं में होने वाली सेपरेशन एंग्‍जायटी क्‍या है, इसके लक्षण और न‍िपटने के उपाय। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।

क्‍या है श‍िशुओं में होने वाली सेपरेशन एंग्‍जायटी?

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सेपरेशन एंग्‍जायटी में श‍िशु मां, प‍ि‍ता, पैरेंट्स या क‍िसी अन्‍य ध्‍यान रखने वाले व्‍यक्‍त‍ि से दूर होने पर डर महसूस करता है। यह समस्‍या ज्‍यादातर बच्‍चों में 6 महीने से लेकर 3 साल तक की उम्र में नजर आती है। हालांक‍ि, यह 6 महीने से कम उम्र के श‍िशु या 3 साल की उम्र के बाद भी कुछ बच्‍चों में हो सकती है। यह एंग्‍जायटी बच्‍चों में इसल‍िए होती है क्‍योंक‍ि बच्‍चे माता-प‍िता या क‍िसी करीबी के आसपास सुरक्ष‍ित महसूस करते हैं।

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कैसे पता चलेगा श‍िशु को सेपरेशन एंग्‍जायटी है?

  • अगर श‍िशु आपसे अलग होते ही रोने लगे या च‍िड़च‍ि‍ड़ा हो जाए।
  • आपके साथ के बगैर सोए नहीं।
  • पैरेंट्स के दूर जाने का एहसास होने पर व्‍यवहार बदलना।
  • डेयकेयर जाने से कतराना या केयरटेकर के करीब न जाना।
  • क‍िसी अनजान व्‍यक्‍त‍ि को देखकर या अनजान जग‍ह पर जाने से रोना।
  • कुछ बच्‍चे माता-पि‍ता से दूर होने पर स‍िर दर्द या पेट दर्द की श‍िकायत भी कर सकते हैं।

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सेपरेशन एंग्‍जायटी की अध‍िक संभावना कब होती है?

  • ये लक्षण उस दौरान बच्‍चों में ज्‍यादा नजर आते हैं, जि‍नके माता-प‍िता अलग होने वाले होते हैं।
  • भाई या बहन के पैदा होने पर भी बच्‍चे में सेपरेशन एंग्‍जायटी के लक्षण द‍िख सकते हैं।
  • शहर बदलने पर या जगह बदलने पर भी बच्‍चे में इसके लक्षण नजर आ सकते हैं।
  • पहले डेकेयर या स्‍कूल जाने पर भी इसके लक्षण नजर आ सकते हैं।

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श‍िशुओं की सेहत को कैसे प्रभाव‍ित करती है सेपरेशन एंग्‍जायटी?

  • सेपरेशन एंग्‍जायटी केवल व्‍यवहार का ह‍िस्‍सा नहीं है, बल्‍क‍ि इससे मानस‍िक और शारीर‍िक सेहत भी प्रभाव‍ित हो सकती है। कुछ श‍िशुओं में ड‍िप्रेशन के लक्षण बन सकते हैं या क‍िसी तरह का फोब‍िया व‍िकसित हो सकता है।
  • ऐसे श‍िशुओं में भूख का पैटर्न ब‍िगड़ सकता है ज‍िससे शरीर में न्‍यूट्र‍िएंट्स की कमी और बीमार‍ियां जन्‍म ले सकती हैं। साथ ही आगे चलकर बच्‍चे ईट‍िंग ड‍िसऑर्डर का श‍िकार हो सकते हैं और मोटापा भी बढ़ सकता है।
  • अगर ये लक्षण 3 साल की उम्र के बाद भी बने रहते हैं, तो सेपरेशन एंग्‍जायटी, सेपरेशन एंग्‍जायटी ड‍िसऑर्डर का रूप ले लेती है।
  • Mayo Clinic के मुताब‍िक, सेपरेशन एंग्‍जायटी के साथ बच्‍चे को पैन‍िक अटैक भी आ सकते हैं। अचानक से अध‍िक डर के कारण अटैक आ सकता है।

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सेपरेशन एंग्‍जायटी से कैसे न‍िपटें?

  • सबसे पहले श‍िशु या बच्‍चे की द‍िनचर्या को फ‍िक्‍स करें। बच्‍चे के खाने का समय, सोने का समय वगैरह तय होना चाह‍िए ताक‍ि उसे च‍िड़च‍िड़ापन, भूख की समस्‍या वगैरह न हो।
  • श‍िशु के साथ समय ब‍िताना भी जरूरी है, बच्‍चे अकेला महसूस करते हैं और ये समस्‍या आगे चलकर गंभीर मानस‍िक समस्‍या में भी बदल सकती है।
  • अगर आप वर्कि‍ंग हैं, तो श‍िशु को अचानक पूरे द‍िन अकेले छोड़ने के बजाय पहले कुछ देर छोड़कर देखें। धीरे-धीरे समय बढ़ाएंगे, तो श‍िशु को आदत हो जाएगी।
  • बच्‍चों को बताकर ही बाहर जाएं, इससे उन्‍हें ट्रस्‍ट बनाने में मदद म‍िलेगी, उनसे झूठ बोलने या गलत समय बताने की गलती न करें, इससे बच्‍चा परेशान हाे सकता है।
  • श‍िशुओं के पास उनकी पसंदीदा चादर या ख‍िलौना रखें ताक‍ि उन्‍हें उसके आसपास सुरक्ष‍ित महसूस हो। आजकल कई ऐसे ख‍िलौने बाजार में मौजूद हैं, जो श‍िशु को थपकी देते हैं या आवाज न‍िकालते हैं।
  • साल 2023 में StatPearls नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, सेपरेशन एंग्जायटी के बढ़ने पर बच्‍चों और बड़ों के ल‍िए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी की मदद ली जाती है। इसे प्राथम‍िक उपचार की तरह इस्‍तेमाल क‍िया जाता है।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • पैन‍िक अटैक की स्‍थ‍िति‍ में।
  • अगर बच्‍चा खाना बंद कर दे या मात्रा कम कर दे।
  • अगर लक्षण कंट्रोल न हों और बच्‍चा हर समय गुस्‍से में रहे या च‍िड़च‍िड़ापन बढ़ जाए, तो डॉक्‍टर की सलाह लें।

न‍िष्‍कर्ष:

श‍िशुओं या बच्‍चों में सेपरेशन एंग्‍जायटी अक्‍सर 6 महीने से लेकर 3 साल की उम्र तक नजर आती है। एंग्‍जायटी के कारण बच्‍चे माता-प‍िता के दूर होने पर डर महसूस करते हैं। यह समस्‍या अगर बढ़ जाए, तो पैन‍िक अटैक, ड‍िप्रेशन, ईट‍िंग ड‍ि‍सऑर्डर का रूप भी ले सकती है। अगर श‍िशु आपसे दूर होते ही रोने लगे या उसके व्‍यवहार में बदलाव आए, तो डॉक्‍टर से सलाह लें और सही कदम उठाएं।

FAQ

  • सेपरेशन एंग्जायटी में क‍िस थेरेपी की मदद ली जाती है?

    सेपरेशन एंग्जायटी में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) की मदद से ली जाती है। बच्‍चों और वयस्‍कों के ल‍िए इसका इस्‍तेमाल क‍िया जाता है।
  • बच्‍चों में रात के समय सेपरेशन एंग्‍जायटी के लक्षण क्‍या हैं?

    रात को बच्‍चे को अकेले सोने में डर लगना, नींद न आना, घबराकर उठ जाना, रोने लगना बच्‍चों में सेपरेशन एंग्‍जायटी के लक्षण हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 10, 2026 12:45 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 10, 2026 12:45 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

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