कुछ शिशु या बच्चे अपने माता-पिता से दूर होकर रोने लगते हैं जिसे हम एक सामान्य प्रतिक्रिया समझकर अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ बच्चों में यह सेपरेशन एंग्जायटी हो सकती है जो कि एक तरह की मेंटल हेल्थ कंडीशन है जिसमें बच्चे अपने पैरेंट्स से दूर होने पर एंग्जायटी या डर महसूस करते हैं। वैसे तो यह समस्या वयस्कों में भी होती है जो अपने किसी करीबी के दूर जाने से डर महसूस करते हैं, लेकिन बच्चे अपने इमोशन्स को खुलकर जाहिर नहीं कर सकते इसलिए उनमें यह समस्या होना चिंता की बात है। आइए जानते हैं कि शिशुओं में होने वाली सेपरेशन एंग्जायटी क्या है, इसके लक्षण और निपटने के उपाय। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।
क्या है शिशुओं में होने वाली सेपरेशन एंग्जायटी?

सेपरेशन एंग्जायटी में शिशु मां, पिता, पैरेंट्स या किसी अन्य ध्यान रखने वाले व्यक्ति से दूर होने पर डर महसूस करता है। यह समस्या ज्यादातर बच्चों में 6 महीने से लेकर 3 साल तक की उम्र में नजर आती है। हालांकि, यह 6 महीने से कम उम्र के शिशु या 3 साल की उम्र के बाद भी कुछ बच्चों में हो सकती है। यह एंग्जायटी बच्चों में इसलिए होती है क्योंकि बच्चे माता-पिता या किसी करीबी के आसपास सुरक्षित महसूस करते हैं।
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कैसे पता चलेगा शिशु को सेपरेशन एंग्जायटी है?
- अगर शिशु आपसे अलग होते ही रोने लगे या चिड़चिड़ा हो जाए।
- आपके साथ के बगैर सोए नहीं।
- पैरेंट्स के दूर जाने का एहसास होने पर व्यवहार बदलना।
- डेयकेयर जाने से कतराना या केयरटेकर के करीब न जाना।
- किसी अनजान व्यक्ति को देखकर या अनजान जगह पर जाने से रोना।
- कुछ बच्चे माता-पिता से दूर होने पर सिर दर्द या पेट दर्द की शिकायत भी कर सकते हैं।
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सेपरेशन एंग्जायटी की अधिक संभावना कब होती है?
- ये लक्षण उस दौरान बच्चों में ज्यादा नजर आते हैं, जिनके माता-पिता अलग होने वाले होते हैं।
- भाई या बहन के पैदा होने पर भी बच्चे में सेपरेशन एंग्जायटी के लक्षण दिख सकते हैं।
- शहर बदलने पर या जगह बदलने पर भी बच्चे में इसके लक्षण नजर आ सकते हैं।
- पहले डेकेयर या स्कूल जाने पर भी इसके लक्षण नजर आ सकते हैं।
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शिशुओं की सेहत को कैसे प्रभावित करती है सेपरेशन एंग्जायटी?
- सेपरेशन एंग्जायटी केवल व्यवहार का हिस्सा नहीं है, बल्कि इससे मानसिक और शारीरिक सेहत भी प्रभावित हो सकती है। कुछ शिशुओं में डिप्रेशन के लक्षण बन सकते हैं या किसी तरह का फोबिया विकसित हो सकता है।
- ऐसे शिशुओं में भूख का पैटर्न बिगड़ सकता है जिससे शरीर में न्यूट्रिएंट्स की कमी और बीमारियां जन्म ले सकती हैं। साथ ही आगे चलकर बच्चे ईटिंग डिसऑर्डर का शिकार हो सकते हैं और मोटापा भी बढ़ सकता है।
- अगर ये लक्षण 3 साल की उम्र के बाद भी बने रहते हैं, तो सेपरेशन एंग्जायटी, सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर का रूप ले लेती है।
- Mayo Clinic के मुताबिक, सेपरेशन एंग्जायटी के साथ बच्चे को पैनिक अटैक भी आ सकते हैं। अचानक से अधिक डर के कारण अटैक आ सकता है।
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सेपरेशन एंग्जायटी से कैसे निपटें?
- सबसे पहले शिशु या बच्चे की दिनचर्या को फिक्स करें। बच्चे के खाने का समय, सोने का समय वगैरह तय होना चाहिए ताकि उसे चिड़चिड़ापन, भूख की समस्या वगैरह न हो।
- शिशु के साथ समय बिताना भी जरूरी है, बच्चे अकेला महसूस करते हैं और ये समस्या आगे चलकर गंभीर मानसिक समस्या में भी बदल सकती है।
- अगर आप वर्किंग हैं, तो शिशु को अचानक पूरे दिन अकेले छोड़ने के बजाय पहले कुछ देर छोड़कर देखें। धीरे-धीरे समय बढ़ाएंगे, तो शिशु को आदत हो जाएगी।
- बच्चों को बताकर ही बाहर जाएं, इससे उन्हें ट्रस्ट बनाने में मदद मिलेगी, उनसे झूठ बोलने या गलत समय बताने की गलती न करें, इससे बच्चा परेशान हाे सकता है।
- शिशुओं के पास उनकी पसंदीदा चादर या खिलौना रखें ताकि उन्हें उसके आसपास सुरक्षित महसूस हो। आजकल कई ऐसे खिलौने बाजार में मौजूद हैं, जो शिशु को थपकी देते हैं या आवाज निकालते हैं।
- साल 2023 में StatPearls नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, सेपरेशन एंग्जायटी के बढ़ने पर बच्चों और बड़ों के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी की मदद ली जाती है। इसे प्राथमिक उपचार की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
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डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- पैनिक अटैक की स्थिति में।
- अगर बच्चा खाना बंद कर दे या मात्रा कम कर दे।
- अगर लक्षण कंट्रोल न हों और बच्चा हर समय गुस्से में रहे या चिड़चिड़ापन बढ़ जाए, तो डॉक्टर की सलाह लें।
निष्कर्ष:
शिशुओं या बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी अक्सर 6 महीने से लेकर 3 साल की उम्र तक नजर आती है। एंग्जायटी के कारण बच्चे माता-पिता के दूर होने पर डर महसूस करते हैं। यह समस्या अगर बढ़ जाए, तो पैनिक अटैक, डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर का रूप भी ले सकती है। अगर शिशु आपसे दूर होते ही रोने लगे या उसके व्यवहार में बदलाव आए, तो डॉक्टर से सलाह लें और सही कदम उठाएं।
FAQ
सेपरेशन एंग्जायटी में किस थेरेपी की मदद ली जाती है?
सेपरेशन एंग्जायटी में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) की मदद से ली जाती है। बच्चों और वयस्कों के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।बच्चों में रात के समय सेपरेशन एंग्जायटी के लक्षण क्या हैं?
रात को बच्चे को अकेले सोने में डर लगना, नींद न आना, घबराकर उठ जाना, रोने लगना बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी के लक्षण हैं।
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Current Version
Jul 10, 2026 12:45 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jul 10, 2026 12:45 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Tanima Singhal