Fri Sep 11, 2026 | 07:36 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhishek Chopra , Pediatrician and Neonatologist

बच्चों में लो ब्लड प्रेशर: कारण, लक्षण, खतरे के संकेत और पेरेंट्स के लिए जरूरी टिप्स

छोटे बच्चों को भी लो बीपी होने पर धुंधला दिखाई देने, थकान, सुस्ती और हाथ-पैर ठंडे पड़ जाने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इस लेख में जानें कि क्या यह समस्या जानलेवा हो सकती है और डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए।

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लो ब्लड प्रेशर, जिसे हाइपोटेंशन भी कहा जाता है। बच्चों में भी यह समस्या देखी जाती है। हालांकि, वयस्कों की तुलना में बच्चों को यह समस्या कम होती है। इसके बावजूद, पेरेंट्स को लो ब्लड प्रेशर की समस्या को भी गंभीरता से लेना चाहिए। इस लेख में दिए गए सभी तथ्यों की पुष्टि नई दिल्ली के पंजाबी बाग स्थित Cloudnine Hospital में Pediatrician & Neonatologist डॉ. अभिषेक चोपड़ा ने की है।

बच्चों में लो ब्लड प्रेशर होने का क्या मतलब है?

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डॉ. अभिषेक चोपड़ा बताते हैं, ब्लड प्रेशर, ब्लड का वह दबाव है, जिससे रक्त धमनियों की दीवारों से टकराता है। बच्चों में सामान्य ब्लड प्रेशर कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे उनकी उम्र, लिंग और लंबाई आदि।

  • नवजात शिशुः 60/40 mmHg
  • 1-5 सालः 80/50 से 95/60 mmHg
  • किशोरावस्थाः 110/70 से 120/80 mmHg

जब बच्चे का बीपी स्तर उसकी उम्र, हाइट और लिंग के मानक स्तर से नीचे चला जाता है, तो वह हाइपोटेंशन की स्थिति मानी जाती है।

छोटे बच्चों में लो ब्लड प्रेशर के मुख्य कारण

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बच्चों में अचानक बीपी कम होने के पीछे कई तरह के कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे-

डिहाइड्रेशन

डॉ. अभिषेक चोपड़ा के अनुसार, "डिहाइड्रेशन बच्चों में लो ब्लड प्रेशर का सबसे प्रमुख और सामान्य कारणों में से एक है। जब किसी बच्चे के शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है, तो इसका असर ब्लड वॉल्यूम पर भी पड़ता है। ब्लड वॉल्यूम कम होने से धमनियों की दीवारों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर गिर जाता है। बच्चों में यह स्थिति आमतौर पर दस्त, बार-बार उल्टी होना, तेज बुखार या बहुत ज्यादा पसीना आने से होता है।"

इलेक्ट्रोलाइट्स इंबैलेंस

डॉ. अभिषेक चोपड़ा आगे बताते हैं, "जब भी बच्चों के शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है, तो न सिर्फ बॉडी डिहाइड्रेट होती है, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस भी होने लगता है। ऐसे में हृदय को अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। नतीजतन, बच्चे का बीपी लो हो जाता है। इस स्थिति में बच्चे को चक्कर आ सकते हैं, वह सुस्त पड़ सकता है या बेहोश हो सकता है।"

संक्रमण

डॉ. अभिषेक चोपड़ा के अनुसार, “संक्रमण बच्चों में लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) का कारण बन सकता है, जिससे बच्चों में सेप्टिक शॉक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। जब किसी संक्रमण के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अत्यधिक सक्रिय हो जाती है, तो इसकी वजह से शरीर में सूजन पैदा हो सकती है, जिससे टिश्यूज को नुकसान पहुंचता है और ब्लड प्रेशर का स्तर खतरनाक रूप में कम हो जाता है।”

पोषक तत्वों की कमी

डॉ. अभिषेक चोपड़ा कहते हैं, "अक्सर बच्चे सही डाइट फॉलो नहीं करते हैं, जिसकी वजह से उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। अगर बच्चे में विटामिन बी12 और फोलेट की कमी हो जाती है, तो ऐसे में शरीर में पर्याप्त मात्रा में रेड ब्लड सेल्स नहीं बन पाती हैं, जिससे बच्चे को एनीमिया हो सकता है और ब्लड प्रेशर कम रह सकता है।"

हृदय संबंधी समस्याएं

यदि बच्चे के दिल में जन्म से ही छेद है या हृदय की मांसपेशियां कमजोर हैं, तो वह शरीर के अंगों तक पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता, जिससे बीपी लो हो जाता है।

हार्मोनल समस्याएं

Mayo Clinic के अनुसार जब थायराइड एड्रिनल ग्लैंड से जुड़ी समस्या बच्चों में होती है, तब भी उन्हें लो बीपी की समस्या हो सकती है। यही नहीं, अगर बच्चे का ब्लड शुगर का स्तर गिर जाता है, तो इसकी वजह से भी ब्लड प्रेशर के स्तर में गिरावट देखने को मिल सकती है।

बच्चों में लो ब्लड प्रेशर के लक्षण

Childhood Migraines 01 (14)

लो ब्लड प्रेशर होने पर बच्चों के शरीर में कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे-

  • चक्कर आना या बेहोशी
  • धुंधला दिखाई देना
  • थकान और सुस्ती
  • हाथ-पैर ठंडे पड़ जाना
  • चेहरे का रंग सफेद नजर आना
  • सांस लेने में तकलीफ आना
  • एकाग्रता में कमी
  • बार-बार प्यास लगना

लो ब्लड प्रेशर कब खतरनाक हो सकता है?

हाई ब्लड प्रेशर की ही तरह लो ब्लड प्रेशर भी खतरनाक होता है। इसलिए, बहुत जरूरी है कि पेरेंट्स को यह जानकारी हो कि लो ब्लड प्रेशर बच्चों के लिए कब खतरनाक हो सकता है। कुछ स्थितियों में यह जानलेवा हो सकता है, जैसे-

  • शॉकः बच्चों में शॉक एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर के अंगों और टिश्यूज तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड फ्लो नहीं होता है, जिस वजह से ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने लगती है। शॉक के शुरुआती चरणों में, बच्चे का शरीर हृदय गति बढ़ाकर ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने की कोशिश करता है। लेकिन जैसे-जैसे शॉक बढ़ता है, हृदय की मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं और ब्लड फ्लो पर असर दिखने लगता है। यह एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है।
  • लगातार बेहोशीः अगर बच्चा बार-बार बेहोश हो रहा है, तो पेरेंट्स को इस ओर पूरा ध्यान देना चाहिए। यह सामान्य स्थिति नहीं है। डॉ. अभिषेक चोपड़ा बताते हैं कि जब ब्लड प्रेशर का स्तर काफी कम हो जाता है, तो मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त ब्लड नहीं मिल पाता। ऐसे में बच्चा बार-बार बेहोश होने लगता है। यह स्थिति संकेत देती है कि शरीर का सर्कुलेटरी सिस्टम गंभीर दबाव में है और अंगों को नुकसान हो सकता है।
  • नीला पड़नाः ब्लड प्रेशर का स्तर कम होने की वजह से शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन सप्लाई सही तरह से नहीं होती है। ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण बच्चे के होंठ, नाखून और त्वचा का रंग नीला पड़ने लगता है। यह एक गंभीर संकेत है कि हृदय और फेफड़े शरीर की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

बच्चे में लो ब्लड प्रेशर की जांच

डॉ. अभिषेक चोपड़ा बताते हैं, बच्चे की कंडीशन को समझने के लिए यहां बताए गए कुछ कदम उठा सकते हैं, जैसे-

  • मेडिकल हिस्ट्रीः बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और जो दवाएं वह ले रहा है, इनकी जानकारी के बाद ही बच्चे का ब्लड प्रेशर का ट्रीटमेंट शुरू हो सकता है।
  • ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंगः बच्चों में लो ब्लड प्रेशर के ट्रीटमेंट से पहले अलग-अलग स्थितियों जैसे बैठकर, लेटकर और खड़े होकर)  बीपी चेक किया जाता है।
  • ब्लड टेस्टः कुछ मामलों में ब्लड टेस्ट करने की जरूरत पड़ सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चे का बीपी लो क्यों है? इन टेस्ट के जरिए एनीमिया, शुगर लेवल और संक्रमण का पता लगाया जाता है।
  • ईसीजी और इकोकार्डियोग्रामः हृदय की धड़कन और संरचना की जांच के लिए इस तरह की जांच की जाती है।

पेरेंट्स क्या करें?

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अगर बच्चे का बीपी अक्सर कम रहता है, तो पेरेंट्स यहां बताए गए सुझाव की मदद ले सकते हैं-

  • आहार में बदलावः डॉक्टर की सलाह पर बच्चे की डाइट में नमक की मात्रा बढ़ाएं। डॉ. अभिषेक चोपड़ा के अनुसार सोडियम लो बीपी को सामान्य रखने में मदद करता है।
  • हाइड्रेट रखेंः बच्चे को हाइड्रेटेड रहने की सलाह दें। इससे शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा संतुलित रहती है। इलेक्ट्रोलाइट को बैलेंस करने के लिए बच्चे को नारियल पानी पिला सकते हैं। इससे बच्चा स्वस्थ रहता है। स्वस्थ बच्चों में बीपी का स्तर भी संतुलित बना रहता है।
  • दिन भर में कई मील देंः डॉ. अभिषेक चोपड़ा बताते हैं कि हैवी मील लेने के बाद बीपी का स्तर गिर सकता है, इसलिए बच्चे को दिन में तीन हैवी मील के बजाय 5-6 बार छोटे-छोटे मील खाने के लिए दें।

कब जाएं डॉक्टर के पास

अगर बच्चे में यहां बताए गए कोई भी संकेत दिखें, तो समझें वह खतरे का संकेत है और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं-

  • बच्चा पूरी तरह से बेहोश हो गया हो।
  • सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो रही हो।
  • बच्चे को खून की उल्टी या काला मल आ रहा हो
  • तेज बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते और लो बीपी।

निष्कर्ष

छोटे बच्चों में लो ब्लड प्रेशर को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। यह एक गंभीर कंडीशन है, जिसकी वजह से कुछ गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि पेरेंट्स अपने बच्चे की जीवनशैली, डाइट का पूरा ध्यान रखें। दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के लिए दें और पोषण की कमी को पूरा करने पर जोर दें। सही खान-पान से बीपी को संतुलित रखा जा सकता है।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • बच्चों के लिए सामान्य ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए?

    बच्चों का सामान्य बीपी उनकी उम्र, लिंग और ऊंचाई पर निर्भर करता है, जो आमतौर पर 90/60 से 110/70 mmHg के बीच होता है।
  • क्या नमक कम खाने से बच्चों में लो बीपी हो सकता है?

    हां, नमक कम खाने से शरीर में सोडियम की कमी हो सकती है। ऐसे में ब्लड प्रेशर का स्तर गिर सकता है। 
  • अचानक बीपी गिरने पर बच्चे को क्या खिलाना चाहिए?

    अचानक बीपी का स्तर कम होने पर बच्चे को नमक-चीनी का घोल या नमकीन छाछ देना फायदेमंद होता है। लेकिन यह अस्थायी उपाय है। इसके बाद डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
  • क्या तनाव के कारण बच्चों का बीपी कम हो सकता है?

    डॉ. अभिषेक चोपड़ा की मानें, तो अधिक मात्रा में तनाव या डर कभी-कभी ‘वेसोवेगल सिंकोप’ का कारण बनता है। इसका मतलब है कि चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ होना। इससे बीपी अचानक गिर सकता है। 
  • क्या लो बीपी का इलाज दवाओं से संभव है?

    लो ब्लड प्रेशर का इलाज आमतौर पर इसके कारण को जानने से शुरू होता है। अगर इसके कारण का इलाज कर दिया जाए, तो हाइपोटेंशन आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है।

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Disclaimer

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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