Fri Oct 23, 2026 | 03:37 AM IST

पार्किंसंस का खतरा दोगुना कर सकता है सब्जियों पर छिड़का जाने वाला कीटनाशक, खाने से पहले पढ़ लें ये स्टडी

Harmful Effects of Pesticides: आपकी डाइट कैसी, इसका आपकी सेहत पर गहरा असर देखने को मिल सकता है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि जिन कीटनाशक वाली सब्जियों को आप खा रहे हैं उससे पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है।
पार्किंसंस का खतरा दोगुना कर सकता है सब्जियों पर छिड़का जाने वाला कीटनाशक, खाने से पहले पढ़ लें ये स्टडीपार्किंसंस का खतरा दोगुना कर सकता है सब्जियों पर छिड़का जाने वाला कीटनाशक, खाने से पहले पढ़ लें ये स्टडी

Harmful Effects of Pesticides: हम जो खाते हैं उसका गहरा असर हमारी सेहत पर देखने को मिलता है। दरअसल, हाल ही में आई ये स्टडी आपको परेशान कर सकती है और सोचने पर मजबूर कर सकती है कि आप क्या खा रहे हैं? NPJ Perkinson Disease में प्रकाशित इस शोध की मानें तो कीटनाशकों के संपर्क में आने पर हमारे ब्रेन का मोटर नर्व कुछ अलग ही तरीके से काम करने लगता है। ये पार्किंसंस रोग के खतरे को बढ़ाता है जिससे दिक्कत और बढ़ने लगती है। रिसर्च में कुछ खास हर्बिसाइड्स यानी खरपतवार नाशक, इंसेक्टिसाइड्स यानी कीटनाशक और फंगीसाइड्स यानी फफूंद नाशक की पहचान की गई है जो दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं और इस बीमारी का कारण बन सकते हैं। कैसे, जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

पार्किंसंस का खतरा दोगुना कर सकता है कीटनाशक

NPJ Perkinson Disease नामक इस जर्नल में प्रकाशित शोध को समझें को सब्जियों में डाले जाने वाला कीटनाशक हमारे ब्रेन के लिए विनाशक हो सकता है। दरअलस, किटनाशक में मिलने वाला कैमिकल Paraquat (पैराक्वाट डाइक्लोराइड), एक बहुत जहरीला खरपतवार नाशक (weed killer), जो पार्किंसंस का खतरा 150% से 500% तक बढ़ा सकता है। इसे कई देशों जैसे चीन और यूके सहित में बैन कर दिया गया है, लेकिन अमेरिका में खेती के लिए इसका इस्तेमाल अभी भी कानूनी है।

इसके अलावा क्लोरपायरीफॉस (Chlorpyrifos) जो ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशक है, इसके संपर्क में लंबे समय तक रहने से पार्किंसंस बीमारी का खतरा लगभग तीन गुना हो सकता है।

घरों में इस्तेमाल होने वाला ये नेचुरल कीटनाशक भी है खतरनाक

इसके अलावा रोटेनोन (Rotenone) खेती और घरों में इस्तेमाल होने वाला एक प्राकृतिक कीटनाशक है जिसका सीधा संबंध पार्किंसंस बीमारी के दो से तीन गुना ज्यादा मामलों से है। American Parkinson Disease Association के अनुसार यह एक ऐसा कीटनाशक है जो माइटोकॉन्ड्रिया के काम करने के तरीके में बाधा डालता है। इतना ही नहीं ये दिमाग के उस अहम हिस्से सबस्टैंशिया नाइग्रा में जीन एक्सप्रेशन को हमेशा के लिए बदल देता है जो पार्किंसंस से प्रभावित होता है। इससे इम्यून सिस्टम में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है और सिनेप्स फेल हो जाते हैं।

PesticidesPesticides

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कीटनाशक मस्तिष्क को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?

कीटनाशक के ये कैमिकल्स शरीर में आकर ब्रेन के कामकाज और ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित कर सकते हैं। ये कई कोशिकीय क्रियाओं के माध्यम से मस्तिष्क को नष्ट करते हैं। जैसे कि

  • ये डोपामाइन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं को लक्षित करके मार देते हैं, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी न्यूरोट्रांसमीटर है।
  • ये कैमिकल्स कोशिकाओं के ऊर्जा-उत्पादक केंद्रों को तोड़ देते हैं, जिससे तेजी से कोशिकीय मृत्यु होती है।
  • ये ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को कम करते हैं और मस्तिष्क के टिशूज में गंभीर सूजन का कारण बनते हैं।

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पार्किंसंस के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

पार्किंसंस की बीमारी में मस्तिष्क में डोपामाइन (Dopamine) नामक न्यूरॉन्स नष्ट हो जाते हैं जिससे शरीर में कई प्रकार के लक्षण नजर आ सकते हैं जैसे

  • मांसपेशियों में अकड़न और शरीर में कंपन, जिससे शरीर को हिलने-डुलने में परेशानी होती है और यहां तक कि उठना-बैठना सब प्रभावित हो जाता है।
  • यह हाथ, उंगली, पैर या जबड़े में अजीब सी कंपन महसूस हो सकती है और लग सकता है कि ये आपके कंट्रोल में नहीं हैं।
  •  खड़े होने या चलने में संतुलन बिगड़ सकता है जिससे बार-बार गिरने का खतरा रहता है।
  • धीमे-धीमे महसूस हो सकता है कि शरीर आगे की तरफ झुकता जा रहा है।

निष्कर्ष:

ऐसी स्थिति में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप ज्यादा से ज्यादा सब्जियों को गर्म पानी से धोकर खाएं। इसके अलावा अगर आप अपने गार्डन में कुछ उगा सकते हैं तो सब्जियां उगाएं और इसे खाएं। इसके अलावा ऑर्गेनिक सब्जियों को ज्यादा खाने की कोशिश करें।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 31, 2026 16:38 IST

    Published By : Pallavi Kumari