Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Payal Asthana , Fitness Expert

क्‍या स्‍ट्रेच‍िंग मसल र‍िकवरी में मदद करता है? एक्‍सपर्ट से जानें

क्‍या आप भी मसल र‍िकवरी के ल‍िए स्‍ट्रेच‍िंग को असरदार मानते हैं? एक्‍सरसाइज से पहले और एक्‍सरसाइज के बाद स्‍ट्रेच‍िंग करना फायदेमंद होता है। इससे जोड़ों का दर्द दूर होता है, मांसपेश‍ियों को आराम म‍िलता है, लेक‍िन क्‍या इससे मसल र‍िकवरी में मदद म‍िलती है? एक्‍सपर्ट और र‍िसर्च से समझते हैं। 

जैसे ही एक्‍सरसाइज करते हैं मांसपेश‍ियों में दर्द और जोड़ों में सूजन या तकलीफ होना आम बात है। इसे दूर करने के ल‍िए एक्‍सपर्ट्स एक्‍सरसाइज से पहले और बाद में स्‍ट्रेच‍िंग करने की सलाह देते हैं। स्‍ट्रेच‍िंग की मदद से मांसपेश‍ियां लचीली होती हैं और एक्‍सरसाइज के बाद दर्द दूर करने में मदद म‍िलती है, लेक‍िन कुछ लोगों को लगता है क‍ि एक्‍सरसाइज के बाद मसल र‍िकवरी के ल‍िए भी स्‍ट्रेच‍िंग असरदार होती है। मसल र‍िकवरी एक प्रक्र‍िया है ज‍िसमें एक्‍सरसाइज के बाद मांसपेश‍ियां खुद को ठीक करती हैं। एक्‍सरसाइज के दौरान मांसपेश‍ियों में माइक्रो ट‍ियर्स यानी बहुत कम मात्रा में डैमेज होता है ज‍िसे मसल र‍िकवरी के दौरान ठीक क‍िया जाता है। ऐसे में लोगों को लगता है क‍ि केवल स्‍ट्रेच‍िंग करके वे मसल र‍िकवरी कर पाएंगे, लेक‍िन क्‍या यह वाकई असरदार है?

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मसल र‍िकवरी के ल‍िए केवल स्‍ट्रेच‍िंग काफी नहीं है

Director Ozefit Fitness Club, Australia & Certified Fitness Coach Payal Asthana ने बताया क‍ि एक्‍सरसाइज के बाद स्‍ट्रेच‍िंग करने से पूरी तरह से मसल रि‍कवरी में मदद नहीं म‍िलती है। स्‍ट्रेच‍िंग करने से मांसपेश‍ियों को आराम म‍िलता है। स्‍ट्रेच‍िंग करने से जोड़ों की मूवमेंट बेहतर होती है। मांसपेश‍ियों की र‍िकवरी के ल‍िए पर्याप्‍त प्रोटीन, संतुल‍ित आहार, पर्याप्‍त पानी का सेवन, सात से आठ घंटे की नींद, हल्‍की एक्‍ट‍िव‍िटी जैसे वॉक‍िंग जरूरी है। केवल स्‍ट्रेच‍िंग करने से मसल र‍िकवरी संभव नहीं है। अगर स्ट्रेचिंग को इन उपायों के साथ जोड़ा जाए, तो रिकवरी बेहतर हो सकती है।

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मसल र‍िकवरी के ल‍िए आराम जरूरी है

फ‍िटनेस कोच पायल अस्‍थाना ने यह भी बताया क‍ि एक्‍सरसाइज के बाद आराम करना भी जरूरी है। आराम की कमी से थकान, शरीर में दर्द और चोट का खतरा बढ़ जाता है, इसल‍िए शरीर के ल‍िए जैसे वर्कआउट जरूरी है वैसे ही मसल र‍िकवरी भी जरूरी है।

स्‍ट्रेच‍िंग करने से मांसपेश‍ियों का दर्द दूर होता है

  • Frontiers की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, एक्‍सरसाइज के बाद केवल स्‍ट्रेच‍िंग करने से मसल र‍िकवरी में मदद नहीं मि‍लती है। इससे मांसपेश‍ियों का दर्द, ताकत में कोई सुधार नहीं देखा गया है।
  • Harvard Health की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, अगर हफ्ते में केवल दो से तीन बार स्‍ट्रेच‍िंग करेंगे, तो शरीर का लचीलापन बढ़ेगा, मांसपेश‍ियों का दर्द दूर होगा और जोड़ों की जकड़न को दूर करने में मदद म‍िलती है।
  • National Library Of Medicine की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, एक्‍सरसाइज के बाद की जाने वाले स्‍ट्रेच‍िंग से मांसपेश‍ियों का दर्द दूर होता है। जोड़ों का दर्द दूर करने में भी मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

Fitness Coach Payal Asthana से बातचीत के आधार पर हमें पता चला क‍ि स्‍ट्रेच‍िंग करने से मसल र‍िकवरी नहीं होती। मसल र‍िकवरी के ल‍िए स्‍ट्रेच‍िंग के साथ-साथ हेल्‍दी डाइट, आराम, प्रोटीन, हल्‍की एक्‍ट‍िव‍िटी की भी जरूरत होती है। Frontiers, Harvard Health और National Library Of Medicine की स्‍टडीज से पता चलता है क‍ि एक्‍सरसाइज के बाद स्‍ट्रेच‍िंग करने से केवल मांसपेश‍ियों के दर्द से राहत म‍िलती है, लेक‍िन इससे मसल र‍िकवरी नहीं होती।

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FAQ

  • मसल र‍िकवरी क्‍या होती है?

    मसल र‍िकवरी एक प्रक्र‍िया है ज‍िसमें वर्कआउट के बाद मांसपेश‍ियों में हुए नुकसान को ठीक क‍िया जाता है। इस दौरान शरीर मांसपेश‍ियो को र‍िपेयर करके मजबूत बनाता है।
  • मसल र‍िकवरी कैसे करें?

    मसल र‍िकवरी के ल‍िए सात से आठ घंटे आराम करें, भरपूर पानी प‍िएं, हल्‍की स्‍ट्रेच‍िंग करे और वॉक जैसे एक्‍ट‍ि‍व‍िटी अपनाएं।
  • मसल र‍िकवरी के दौरान क्‍या न करें?

    मसल र‍िकवरी के दौरान लगातार भारी वर्कआउट करने से बचें, नींद की कमी से बचें, जंक फूड या कम प्रोटीन वाला आहार ज्‍यादा न लें और दर्द को नजरअंदाज न करें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 05, 2026 20:41 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Mar 05, 2026 20:41 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Payal Asthana

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