Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्या एक्सरसाइज के बाद तरबूज खाने से होती है मसल रिकवरी? एक्‍सपर्ट से जानें

जब हम एक्‍सरसाइज करते हैं तो मसल्‍स में माइक्रो ट‍ियर्स हो जाते हैं। र‍िकवरी के दौरान शरीर इन्‍हें ठीक करता है। इससे मांसपेश‍ियां ज्‍यादा मजबूत होती हैं और शरीर की जकड़न भी कम होती है। जानें एक्‍सरसाइज के बाद तरबूज खाकर मसल र‍िकवरी होती है या नहीं?

एक्‍सरसाइज के बाद शरीर को पोषक तत्‍वों की जरूरत होती है ताक‍ि शरीर और मसल्‍स की र‍िकवरी हो सके। एक्‍सरसाइज के बाद मसल्‍स में दर्द, जकड़न, थकान, ड‍िहाइड्रेशन, लो एनर्जी लेवल जैसी समस्‍याएं होना बहुत कॉमन हैं। इन समस्‍याओं से बचने के ल‍िए लोग अलग-अलग चीजों का सेवन करते हैं। कुछ लोग तरबूज को पोस्‍ट वर्कआउट र‍िकवरी व‍िकल्‍प के तौर पर देखते हैं क्‍योंक‍ि तरबूज में 90 प्रत‍िशत पानी होता है और यह शरीर को हाइड्रेट भी रखता है, लेक‍िन क्‍या सच में तरबूज खाने से मसल रिकवरी होती है? इस सवाल का जवाब जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

एक्‍सरसाइज के बाद मसल र‍िकवरी में मदद करता है तरबूज

तरबूज में व‍िटाम‍िन सी, पोटैश‍ियम, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं। ये न्‍यूट्र‍िएंट्स शरीर को एक्‍सरसाइज के बाद र‍िकवरी में मदद करते हैं। तरबूज से पोस्‍ट एक्‍सरसाइज मसल पेन की समस्‍या को दूर करने में भी मदद म‍िलती है। एक्‍सरसाइज के बाद शरीर को हाइड्रेशन की जरूरत होती है जो तरबूज से पूरी की जा सकती है। अगर शरीर एक्‍सरसाइज के बाद ड‍िहाइड्रेशन का श‍िकार रहेगा, तो मसल्‍स क्रैम्‍प्‍स, कमजोरी और धीमी र‍िकवरी होगी।
2013 में Journal Of Agricultural And Food Chemistry नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, तरबूज का रस पोस्‍ट वर्कआउट र‍िकवरी में मदद करता है। तरबूज का रस पीने वाले लोगों में मांसपेश‍ियों में जकड़न, मसल्‍स में दर्द जैसी समस्‍याएंं दूर होती नजर आईं।

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तरबूज खाकर इलेक्‍ट्रोलाइट्स की कमी दूर होती है

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र‍िकवरी और मसल्‍स क्रैम्‍प्‍स से बचने के ल‍िए एक्‍सरसाइज के बाद इलेक्‍ट्रोलाइट्स का सेवन जरूरी है। एक्‍सरसाइज के बाद ज्‍यादा पसीना आने से इलेक्‍ट्रोलाइट्स जैसे पोटैश‍ियम और मैग्नीशियम की कमी हो जाती है। तरबूज में ये दोनों ही न्‍यूट्र‍िएंट्स पाए जाते हैं ज‍िससे मसल्‍स और नर्व फंक्‍शन को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है।

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एंंटीऑक्‍सीडेंट्स का नेचुरल स्रोत है तरबूज

एक्‍सरसाइज करने से शरीर पर ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस बढ़ता है। तरबूत में व‍िटाम‍िन सी और लाइकोपीन जैसे एंंटीऑक्‍सीडेंट्स पाए जाते हैं। इससे सेल्‍स को डैमेज से बचने में मदद म‍िलती है। एंंटी-ऑक्‍सीडेंट्स से इम्‍यून हेल्‍थ और रिकवरी में मदद म‍िलती है। लाइकोपीन तरबूज के लाल रंग के ल‍िए भी ज‍िम्‍मेदार माना जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं ज‍िससे एक्‍सरसाइज के बाद होने वाले मसल्‍स पेन से भी राहत म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

एक्‍सरसाइज के बाद मसल्‍स की र‍िकवरी के ल‍िए तरबूज का सेवन कर सकते हैं। हालांक‍ि तरबूज शरीर में इलेक्‍ट्राेलाइट और हाइड्रेशन लेवल बैलेंस करने में ज्‍यादा मदद करता है इसल‍िए तरबूज के साथ-साथ अन्‍य न्‍यूट्र‍िएंट्स र‍िच फूड्स को भी डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएंं।

FAQ

  • तरबूज खाने के फायदे क्‍या हैं?

    शरीर को हाइड्रेट रखता है, शरीर को ठंडक पहुंंचाता है, मसल र‍िकवरी में मदद करता है, पाचन को बेहतर बनाता है और वेट लॉस में भी मदद करता है।
  • क‍िसे नहींं खाना चाह‍िए तरबूज?

    ज‍िन लोगों को क‍िडनी की समस्‍या है उन्‍हें तरबूज का ज्‍यादा सेवन नहीं करना चाह‍िए क्‍योंक‍ि इसमें पोटैश‍ियम की मात्रा ज्‍यादा होती है। छोटे बच्‍चों को भी ज्‍यादा तरबूज खाने से दस्‍त या उल्‍टी की समस्‍या हो सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 08, 2026 13:47 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 08, 2026 13:47 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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