Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

8 राज्यों में एक साथ मिले डेंगू के चारों स्ट्रेन, ICMR की स्टडी ने बढ़ाई चिंता

मानसून के मौसम में मच्छरों से जुड़ी बीमारियां जैसे डेंगू का फैलना काफी ज्यादा बढ़ जाता है और ऐसे में ICMR स्टडी के खुलासे ने चिंता बढ़ा दी है। स्टडी के अनुसार, डेंगू के चार स्ट्रेन आठ राज्यों में मिले हैं। ये डेंगू के लक्षणों को गंभीर बना सकता है।

मानसून के मौसम में डेंगू का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस स्थिति में ICMR ने एक नई स्टडी जारी की है। इसमें बताया है कि देश में बड़े स्तर पर डेंगू वायरस के चारों सेरोटाइप (Serotypes) मिले हैं। ये स्ट्रेन DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 है, जो देश के कई हिस्सों में एक साथ मौजूद हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह स्टडी तब आई है, जब हाल ही में भारत सरकार ने डेंगू का वैक्सीन बनाने की मंजूरी दी है। ऐसे में डेंगू वायरस के अलग-अलग सेरोटाइप्स से लोग कैसे बचाव कर पाएंगे। यह समझना काफी महत्वपूर्ण होगा।

ICMR की स्टडी क्या कहती है?

यह अध्ययन ICMR-National Institute of Virology (NIV), Pune और Virus Research and Diagnostic Laboratories (VRDL) नेटवर्क के रिसर्चर्स ने किया है। इस रिसर्च को International Journal of Infectious Diseases में प्रकाशित किया गया है।

रिसर्चर्स ने साल 2023 से 2025 के बीच देश के 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मौजूद 45 Virus Research and Diagnostic Laboratories से मिले डेंगू पॉजिटिव सैंपल का मॉलीक्यूलर एनालसिस किया है।

इस स्टडी में 6,889 डेंगू पॉजिटिव सैंपल को तकनीकों के जरिए समझा गया है कि मरीज में डेंगू वायरस का कौन-सा सेरोटाइप मौजूद था। स्टडी की सबसे अहम बात यह रही कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में कई सेरोटाइप्स एक साथ पाए गए थे। इनमें से आठ राज्यों में DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 यानी चारों serotypes एक साथ मिले।

क्या डेंगू वायरस के सेरोटाइप्स से महामारी फैलने का खतरा है?

स्टडी में बताया गया है कि इन चारों वायरस के होने वाली बीमारी को आम भाषा में डेंगू ही कहा जाता है, लेकिन शरीर की इम्यूनिटी इन सभी सेरोटाइप्स में एक जैसी नहीं होती है। इसका मतलब है कि अगर किसी को पहली बार डेंगू DENV-1 स्ट्रेन से हुआ है, तो उस व्यक्ति के शरीर में DENV-1 स्ट्रेन के खिलाफ लंबे समय तक इम्यूनिटी बन जाएगी, लेकिन उसे दूसरी बार DENV-2 स्ट्रेन से डेंगू हो सकता है। इसका अर्थ यह है कि एक बार डेंगू होने के बाद उस व्यक्ति को भविष्य में भी डेंगू का खतरा हो सकता है।

इसलिए इस स्टडी में एक साथ चारों स्ट्रेन मिलने पर चिंता जताई गई है। इससे डेंगू के बढ़ने की संभावना ज्यादा हो सकती है। भारत के कुछ हिस्सों में कई डेंगू सेरोटाइप्स एक साथ होने को को-सर्कुलेशन कहा जाता है।

दरअसल, अगर एक क्षेत्र में एक ही सेरोटाइप होता है, तो संक्रमण का पैटर्न भी एक जैसा हो सकता है, लेकिन जब DENV-1 से DENV-4 तक कई सेरोटाइप्स एक साथ मौजूद हों, तो लोगों में अलग-अलग सेरोटाइप्स से बीमारी बढ़ने की संभावना बनी रहती है।

dengue strains in states

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डेंगू का कौन-सा स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक है?

स्टडी में बताया गया है कि वायरस का सेरोटाइप बीमारी की गंभीरता तय नहीं करता। इसमें बताया है कि रिसर्च के दौरान DENV-2 ज्यादा प्रमुखता से दिखाई दिया, लेकिन रिसर्चर्स ने इसमें क्षेत्र के अनुसार वेरिएशन भी देखा है। इसका मतलब है कि दो क्षेत्रों या राज्यों का सेरोटाइप अलग-अलग हो सकता है। इसलिए देशभर में डेंगू के वायरस के स्ट्रेन की जानकारी जरूरी है। इस स्टडी में बताया गया है कि सिर्फ डेंगू मामलों की संख्या गिनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह जानना जरूरी है कि संक्रमित लोगों में कौन-सा सेरोटाइप पाया जा रहा है।

डेंगू वैक्सीन के लिए यह स्टडी कितनी महत्वपूर्ण है?

हाल ही में भारत सरकार ने डेंगू के वैक्सीन को मंजूरी दी है। अच्छी खबर यह है कि डेंगू की वैक्सीन क्यूडेंगा (Qdenga) से सेरोटाइप के चारों स्ट्रेन से सुरक्षा देगी और इस वैक्सीन को 60 साल की उम्र तक के लोग लगवा सकते हैं।

निष्कर्ष
हालांकि, वैक्सीन आने से डेंगू के मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन ICMR की स्टडी भी काफी चिंताजनक है, क्योंकि डेंगू के चारों स्ट्रेन का कई राज्यों में एक साथ मिलना बीमारी को बढ़ा सकता है। इसलिए बारिश के मौसम में मच्छरों से सावधानी बरतना जरूरी है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 31, 2026 20:27 IST

    Published By : Aneesh Rawat

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