बारिश का मौसम आते ही खानपान को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। उमस, नमी और तापमान में बदलाव के कारण बाहर का खाना जल्दी खराब हो सकता है और दूषित भोजन से पेट की समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। आयुर्वेद में बारिश के सीजन में पाचन शक्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए मानसून में डाइट सही होना बहुत जरूरी है। मानसून में डाइट जानने के लिए हमने Dr. Chetan Sharma, Sr. Ayurveda Consultant, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की।
Dr. Chetan Sharma कहते हैं कि आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से मानसून में वात दोष का असंतुलन हो सकता है। इसलिए ऋतु के अनुसार खानपान और दिनचर्या अपनाने की अवधारणा को आयुर्वेद में ऋतुचर्या कहा गया है। बारिश में कुछ चीजें खाना बेहतर होता है, तो कुछ चीजों से परहेज करना चाहिए।
मानसून में कैसा खाना बेहतर माना जाता है?
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “बारिश के मौसम में आयुर्वेदिक के अनुसार, ऐसा भोजन लेने की सलाह दी जाती है जो हल्का हो, आसानी से पच सके और ताजा बना हुआ हो। हालांकि हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, इसलिए किसी एक डाइट को सभी के लिए सही नहीं माना जा सकता।”
1. मूंग दाल की खिचड़ी
Dr. Chetan Sharma ने बताया कि मूंग दाल और चावल से बनी खिचड़ी हल्के भोजन के तौर पर ली जा सकती है। इसमें दाल से प्रोटीन और चावल से कार्बोहाइड्रेट मिलता है। अगर पाचन ठीक नहीं है या पेट भारी लग रहा है, तो मसालेदार और बहुत तैलीय खाने की जगह हल्की खिचड़ी एक आसान विकल्प हो सकती है।
2. गर्म दाल और सूप
मानसून में मूंग दाल, मसूर दाल या सब्जियों से बना गर्म सूप लिया जा सकता है। इससे मानसून के सीजन में न्यूट्रिशन मिल सकता है। कई लोगों को गर्म भोजन खाने से आराम मिलता है।
3. लौकी, तोरी और कद्दू जैसी सब्जियां
Dr. Chetan Sharma के अनुसार, बारिश में लौकी, तोरी और कद्दू जैसी सब्जियों को डाइट में शामिल किया जा सकता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इन्हें अच्छे तरीके से धोकर और पकाकर खाना चाहिए। खासतौर पर जब बाहर के तापमान और वातावरण में नमी हो।
4. अदरक, जीरा और अजवाइन जैसे मसाले
Dr. Chetan Sharma ने कहा, “आयुर्वेदिक खानपान में अदरक, जीरा, अजवाइन, हींग, हल्दी और धनिया जैसे मसालों का इस्तेमाल करना पाचन के लिए अच्छा माना जाता है। हालांकि, ज्यादा मसाले खाने से जरूरी नहीं है कि फायदा ही मिले, बल्कि जिन लोगों को एसिडिटी और गैस से जुड़ी समस्याएं होती है, उन्हें अपने शरीर के अनुसार मसालों की मात्रा तय करनी चाहिए।”
5. साफ और सुरक्षित पानी पिएं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, सिर्फ वही पानी पीना चाहिए, जो कीटाणुरहित हो। इसके लिए पानी को उबालकर पिएं और कोशिश करें कि पानी फिल्टर और डिसइंफेक्ट किया हो। Dr. Chetan Sharma ने बताया कि साफ पीने के साथ-साथ शौच के बाद हाथ धोने और खाना खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं।

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मानसून में किन चीजों से बचना चाहिए?
Dr. Chetan Sharma कहते हैं कि मानसून में बीमारी से बचाव के लिए खाने-पीने की कुछ चीजों से बचाव करना भी जरूरी है।
रोज तला-भुना खाना न खाएं
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “बारिश में पकौड़े, समोसे और फ्राइड चीजें खाने का बहुत मन करता है, लेकिन रोजाना फ्राइड फूड खाने से कैलोरी बढ़ सकते हैं और कुछ लोगों में पेट भारी होने या एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इसलिए रोजाना फ्राई खाना नहीं खाना चाहिए।”
बासी खाना खाने से परहेज करें
बारिश और नमी के दौरान खाने को सही तापमान पर रखना जरूरी होता है। बारिश के सीजन में बाहर रखे भोजन में नमी के कारण बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो शरीर में बीमारियां बढ़ा सकते हैं। इसलिए ताजा बना खाना ही खाएं।
कच्ची सब्जियों और सलाद को अच्छे से साफ करना
Dr. Chetan Sharma के मुताबिक, यह कहना सही नहीं होगा कि मानसून में हर तरह का कच्चा सलाद बंद कर देना चाहिए, बल्कि सब्जियों और फलों को अच्छे से धोना जरूरी है। अगर किसी फल या सब्जी में कीड़ा या खराब लगे, तो उसे फेंक दें। कीड़ा लगा फल या सब्जी से बीमारियां हो सकती है।
स्ट्रीट फूड खाने से परहेज
बारिश के मौसम में सड़क किनारे बिकने वाली चीजों को खाने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। अगर फूड खुले में रखा हुआ है, आसपास गंदगी है या बेचने वाले व्यक्ति ने साफ-सफाई से नहीं रखा, तो इसे खाने से बचना चाहिए। मानसून में बीमारियां बढ़ने का कारण स्ट्रीट फूड हो सकता है।
दही जैसी खट्टी चीजों से परहेज
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “आयुर्वेदिक ऋतुचर्या में बारिश के दौरान दही सीमित मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है। अगर दही खाने के बाद किसी को पेट फूलने, गैस या कोई अन्य परेशानी होती है, तो इसकी मात्रा कम करना या एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।
स्टडी क्या कहती है?
Journal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences के अनुसार, मानसून के सीजन में गाय का घी, मूंग दाल, अदरक, सेंधा नमक, पचाने वाले मसाले जैसे काली मिर्च, अदरक, हींग, लहसुन, जीरा धनिया और हल्दी जैसे मसालों का इस्तेमाल करना चाहिए।
इसके साथ ही पानी को उबालकर ठंडा करके पानी पीना चाहिए। दही की जगह छाछ का इस्तेमाल किया जा सकता है। मानसून में हरड़ और सेंधा नमक काफी फायदेमंद होता है।
इस जर्नल में बताया गया है कि मानसून में हरी पत्तेदार सब्जियां, दही, ठंडा पानी और बासी भोजन करने से बचना चाहिए।
मानसून डाइट प्लान
Dr. Chetan Sharma ने मानसून के सीजन में डाइट प्लान शेयर किया है। हालांकि, इसे व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और भोजन की जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है।
समय / आहार |
क्या खाएं / पिएं |
विशेष सुझाव |
सुबह |
गुनगुना पानी |
हर्बल चीजों या काढ़े का रोज खाली पेट जरूरी नहीं है। |
नाश्ता |
मूंग दाल चीला, दलिया या पोहा |
पौष्टिक विकल्पों का चयन करें। |
नाश्ते और लंच के बीच |
मौसमी फल (जैसे अमरूद या अनार) |
फलों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं। |
लंच |
दाल, चावल या रोटी + पकी हुई सब्जी और सलाद |
सब्जी और सलाद को अच्छे से धोकर और पकाकर लें। |
शाम |
हल्की चाय या सूप + भुना हुआ स्नैक्स |
स्नैक्स तभी लें अगर भूख लगी हो। |
डिनर |
हल्की दाल-सब्जी और रोटी या खिचड़ी |
बहुत भारी और तले हुए भोजन से बचें। |
सुबह
रोज गुनगुना पानी पीना चाहिए। किसी भी हर्बल चीज या काढ़े को रोज खाली पेट लेना जरूरी नहीं है।
नाश्ता
मूंग दाल चीला, दलिया या पोहा के साथ कोई पौष्टिक विकल्प लिए जा सकते हैं।
नाश्ते और लंच के बीच का समय
इस समय मौसमी फल, जैसे अमरूद या अनार, अच्छी तरह धोकर खाया जा सकता है।
दोपहर
दाल, चावल या रोटी के साथ अच्छी तरह पकी हुई सब्जी और सलाद लेना बेहतर रहता है। यह ध्यान रखें कि सब्जी और सलाद को अच्छे से धोकर पकाएं।
शाम
हल्की चाय या सूप लिया जा सकता है। अगर भूख लगी है, तो भुना हुआ स्नैक्स ले सकते हैं।
रात
हल्की दाल-सब्जी और रोटी या खिचड़ी। रात में बहुत भारी और तला हुआ भोजन लेने से बचें।
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आयुर्वेदाचार्य की सलाह
Dr. Chetan Sharma के अनुसार, मानसून में भोजन का सबसे आसान नियम है कि ताजा, साफ और आसानी से पचने वाला खाना खाएं। बहुत ज्यादा तला-भुना और लंबे समय से रखा हुआ भोजन कम करें और पीने के पानी की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें।
निष्कर्ष
मानसून के मौसम में खान-पान में साफ-सफाई और अच्छे से पकाना बहुत जरूरी है। साथ ही लोगों को अपने शरीर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त प्रोटीन, साबुत अनाज, फल, सब्जियां और दूसरे जरूरी पोषक तत्व लेते रहना महत्वपूर्ण है। अगर मानसून में बार-बार दस्त, उल्टी, पेट दर्द, तेज बुखार, लगातार गैस या अपच की समस्या हो रही है, तो इसे सिर्फ मौसम का असर न मानें, बल्कि समय रहते डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं।
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FAQ
आयुर्वेद के अनुसार बारिश के मौसम में पाचन तंत्र पर क्या असर पड़ता है?
मानसून में शरीर की पाचन अग्नि स्वाभाविक रूप से बहुत कमजोर पड़ जाती है। साथ ही शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो जाता है, जिससे पेट फूलना, गैस और इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।मानसून में रात के खाने में क्या खाएं और किस समय तक खा लेना चाहिए?
रात का भोजन सूरज ढलने के तुरंत बाद या रात 8 बजे से पहले कर लेना चाहिए। डिनर में सिर्फ वेजिटेबल सूप, मूंग दाल की खिचड़ी या पतली लापसी लें, ताकि कमजोर जठराग्नि पर बोझ न पड़े।
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Aug 17, 2026 18:43 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetan Sharma