Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

मानसून में डायरिया से बचना है, तो अपनाएं ये 5 फूड सेफ्टी टिप्स

मानसून में गलत खानपान का नतीजा दस्‍त के रूप में द‍िखाई देता है, हालांक‍ि इससे छुटकारा पाने के ल‍िए कुछ आसान फूड सेफ्टी ट‍िप्‍स काम आ सकते हैं। जानें ऐसे 5 ट‍िप्‍स के बारे में।

कई शहरों में मानसून दस्‍तक दे चुका है, तो द‍िल्‍ली समेत कई शहर ऐसे भी हैं जो अब भी मानसून के इंतजार में हैं। मानसून के ल‍िए भले ही आपको और इंतजार करना पड़ता है, लेक‍िन मानसून से पहले उस दौरान बरतने वाली सावधानी के बारे में जान लेना चाह‍िए ताक‍ि सेहत अच्‍छी बनी रहे। मानसून के दौरान लोग खानपान में लापरवाही करने लगते हैं ज‍िसका खाम‍ियाजा पेट और सेहत को भुगतना पड़ता है और अक्‍सर दस्‍त की समस्‍या देखने को म‍िलती है। मानसून में दस्‍त होना एक आम समस्‍या है। आख‍िर ऐसा क्‍या करें क‍ि मानसून में दस्‍त की समस्‍या से बचा जा सके? कुछ आसान ट‍िप्‍स जानने के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

इन फूड सेफ्टी ट‍िप्‍स को मानसून में करें फॉलो

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  1. जलजन‍ित बीमार‍ियों से बचने के ल‍िए केवल उबला हुआ, फ‍िल्‍टर क‍िया हुआ पैक्‍ड पानी ही प‍िएं।
  2. बाहर ब‍िकने वाले ऐसे फल या सब्‍जि‍यों का सेवन न करें जो काटकर बेचे जा रहे हों।
  3. मानसून में डायर‍िया से बचने के ल‍िए ज्‍यादा ऑयली, मसालेदार भोजन को करने से बचें।
  4. क‍िचन और पर्सनल हाइजीन का ख्‍याल रखें। खाना बनाने से पहले हाथों को अच्‍छी तरह से साफ करें। चाकू, चम्‍मच या अन्‍य बर्तन को गीला न छोड़ें, मानसून में क‍िचन को ड्राई और नमीयुक्‍त रखने का प्रयास करें।
  5. खाने को खुला न छोड़ें, इससे फंगस और बैक्‍टीर‍िया अटैक कर सकते हैं। खाने को ढककर रखें और बचा हुआ खाना अगले द‍िन या कुछ घंटे बाद खाने से बचें। हमेशा ताजा पका हुआ खाना ही खाएं।

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गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन से बचें

मानसून के दिनों में फल और सब्‍ज‍ियां जल्‍दी खराब हो जाते हैं और दूष‍ित चीजों का सेवन करने से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है। साल 2022 में Researchgate पर प्रकाश‍ित Food Safety Measures For Monsoon नामक जर्नल आर्टि‍कल के मुताब‍िक, मानसून में फल और सब्‍ज‍ियों पर फफूंंद जल्‍दी लग जाती है। ऐसी चीजों को खाने से डायर‍िया, फूड पॉइजन‍ि‍ंग, हैजा जैसी बीमार‍ियों का जोख‍िम बढ़ जाता है।

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फ्र‍िज में ज्‍यादा द‍िन खाना स्‍टोर न करें

मानसून के द‍िनों में फ्र‍िज में ज्‍यादा देर तक खाने को स्‍टोर नहीं करना चाह‍िए। खासकर पका हुआ खाना, मीट या कच्‍चा मीट। कच्‍चे और पके हुए खाने को साथ में रखने से क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा बढ़ जाता है। मानसून में हवा में नमी होती है ज‍िससे बैक्‍टीर‍िया और फंगस तेजी से पनपते हैं, हालांक‍ि फ्र‍िज का तापमान कम होता है, लेक‍िन बार-बार फ्र‍िज खोलने से तापमान को बरकरार रखना मुश्‍क‍िल हो सकता है इसल‍िए मानसून के द‍िनों में इस बात का खास ख्‍याल रखें क‍ि भोजन को लंबे समय तक स्‍टोर न करें।

न‍िष्‍कर्ष:

मानसून में डायर‍िया के साथ-साथ पेट के फ्लू, उल्‍टी, दस्‍त जैसी समस्‍याएं भी बढ़ सकती हैं। इनसे बचने के ल‍िए आसान फूड सेफ्टी ट‍िप्‍स को फॉलो करना न भूलें। मानसून में हेल्‍दी और ताजा खाना खाएं, बाहर खाने से बचें और अपने आसपास सफाई बनाए रखें।

FAQ

  • फूड पॉइजन‍िंग के लक्षण क्‍या हैं?

    फूड पॉइजन‍िंग होने पर मतली, उल्‍टी, दस्‍त, पेट दर्द, ऐंठन, बुखार जैसे लक्षण नजर आते हैं।
  • मानसून में कौन सी बीमार‍ियों का खतरा ज्‍यादा होता है?

    मानसून में हैजा, टाइफाइड, डायर‍िया और मच्‍छरों से होने वाले रोग जैसे डेंगू और मलेर‍िया का खतरा भी बढ़ जाता है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 19, 2026 11:52 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 19, 2026 11:52 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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