मानसून में गर्मी से राहत मिलती है, लेकिन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है खासकर बच्चों के लिए क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम, बड़ों के मुकाबले कमजोर होता है। मानसून में बैक्टीरिया, फंगस और वायरस का प्रकोप बढ़ जाता है और वे इस सीजन में तेजी से मल्टीप्लाई होते हैं। यही कारण है कि मानसून में सेहत के प्रति बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। जो बच्चे स्कूल जाते हैं उन्हें मानसून में घर के बाहर जाना होता है ऐसे में स्कूली बच्चों को मानसून में बीमार होने का खतरा ज्यादा होता है। मानसून में बच्चे अक्सर वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, सर्दी-जुकाम और फ्लू की चपेट में आ जाते हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिए डॉक्टर से जानते हैं जरूरी सावधानियां ताकि सेहत को बेहतर रखा जा सके। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Shilpa Aroskar, Paediatrician, Navi Mumbai, Kokilaben Hospital से बात की।
मानसून में बच्चों को मच्छर जनित रोगों से कैसे बचाएं?

- डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, जापानी इंसेफेलाइटिस वगैरह मच्छर से होने वाले रोग हैं। इससे बचाव के लिए संभव हो, तो बच्चे को स्कूल भेजते समय फुल स्लीव वाली यूनिफॉर्म पहनाएं। ताकि हाथ ढके रहें और लंबे मोजों का इस्तेमाल करें ताकि पैरों को ढका जा सके।
- स्कूल से लौटने के बाद अगर बच्चे के कपड़े गीले हैं, तो उसे तुरंत बदलें।
- घर में बच्चे हैं, तो उन्हें बाहरी वातावरण से सुरक्षित रखें। घर के खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छर जाली लगवाएं।
- स्कूल प्रशासन के साथ मिलकर स्कूल परिसर में जमा पानी की नियमित जांच और सफाई करवाएं।
साल 2020 में PLOS ONE में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, मानसून के दौरान अधिक बारिश के दिनों में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया होने का खतरा बढ़ सकता है। बार-बार होने वाला डायरिया बच्चों के पोषण और विकास को प्रभावित कर सकता है और आगे चलकर ग्रोथ संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
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मानसून में बच्चों को लंच बॉक्स में क्या दें?
मानसून में बच्चों को बीमारियों और संक्रमण से बचाने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार और लंच बॉक्स देना चाहिए। स्कूल जाने वाले बच्चों की ग्रोथ और इम्यूनिटी के लिए उनके टिफिन में प्रोटीन रिच फूड्स जैसे पनीर, चना, राजमा, मूंग दाल चीला वगैरह को शामिल कर सकते हैं।
Paediatrician Dr. Shilpa Aroskar ने बताया कि- स्कूल जाने वाले बच्चों को दिनभर एनर्जी की जरूरत होती है और इसके लिए मल्टीग्रेन रोटी, ओट्स, पोहा, दलिया दे सकते हैं। इनमें कॉम्प्लेक्स कार्ब्स की भरपूर मात्रा होती है जिससे शरीर को एनर्जी मिलती है।
- फाइबर के लिए बच्चे के लंच बॉक्स में हरी सब्जियां जैसे लौकी, तोरई को शामिल करें, खीरा और साबुत अनाज भी दे सकते हैं। इससे पाचन ठीक रहेगा और डायरिया से बचने में मदद मिलेगी।
- इसके अलावा, स्कूली बच्चों के दिमागी विकास के लिए मूंगफली, बादाम, अखरोट वगैरह को भी डाइट में शामिल करें।
बच्चों को स्कूल टिफिन में ताजा खाना ही दें
- मानसून में बच्चों के टिफिन को तैयार करते समय यह ध्यान रखें कि भोजन फ्रेश हो।
- टिफिन को अच्छी तरह से वॉश करके दें।
- बहुत पुराना दूध, दही, क्रीम टिफिन में न दें।
- बच्चों का पानी भी साफ बोतल में होना चाहिए।
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स्कूल में दूसरों के संपर्क से फैल सकता है संक्रमण
- अगर आपका बच्चा स्कूल जाता है, तो मानसून में उसे संक्रमण का खतरा हो सकता है। दूसरों के खांसने या छींकने से बच्चे अक्सर बीमार हो जाते हैं। संक्रमित हाथों से दरवाजे, खिलौने, डेस्क छूने से उन पर मौजूद कीटाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखें-
- बच्चों को हैंड हाइजीन सिखाएं और समय-समय पर हाथों को साबुन और पानी से सफाई की आदत डालें। इससे फंगल इंफेक्शन से बचाव होगा।
- खांसते या छींकते समय बच्चे को मुंह-नाक ढकने के लिए कहें।
- बच्चे को अपनी पानी की बोतल, टिफिन, रुमाल किसी के साथ शेयर न करने दें।
- स्कूल से लौटने के बाद बच्चे को हाथ-पैर धोने और साफ कपड़े बदलने की आदत डालें।
- स्कूल में खिड़कियां खुली रखने और पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
- बच्चे को समय पर टीका लगवाएं और जरूरत होने पर डॉक्टर की सलाह से फ्लू शॉट लगवाएं।
बच्चों में सेहत के प्रति जागरूकता की कमी
साल 2026 में International Journal Of Nursing Education And Research में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया कि केरल के कोट्टायम जिले के एक स्कूल में जब बच्चों में सेहत की जागरूकता को परखा, तो पता चला कि 82.85% सेहत के लिए कम जागरूक थे। वहीं 17.14% बच्चों में सेहत के प्रति जागरूकता न के बराबर मिली। ऐसे में माता-पिता और टीचर का अहम किरदार होता है बच्चों को बीमारी और इंफेक्शन के प्रति सचेत करना और हाइजीन की जानकारी देना ताकि वे खुद को बीमार होने से बचा सकें।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- बच्चे को तेज बुखार हो।
- बच्चा गअर सिरदर्द या शरीर में दर्द की शिकायत करे।
- उल्टी या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
- बच्चे को बुखार, तेज खांसी, उल्टी-दस्त या आंखों में संक्रमण जैसे लक्षण हों, तो उसे स्कूल न भेजें।
निष्कर्ष:
मानसून स्कूल जाने वाले बच्चे बीमारी और इंफेक्शन की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। बच्चों को मानसून के दौरान स्वस्थ रखने के लिए टिफिन में मल्टीग्रेन रोटी, ओट्स, पोहा, दलिया, फाइबर रिच फूड्स जैसे खीरा, साबुत अनाज, तोरई, लौकी दे सकते हैं। दिमागी विकास के लिए मूंगफली, अखरोट, बादाम वगैरह को शामिल करें। बच्चों को मानसून के दौरान ताजा खाना ही दें और हैंड हाइजीन सिखाएं। मानूसन में फुल स्लीव वाले कपड़े पहनाएं। मच्छर जनित रोगों से बचाने के लिए बच्चों को बाहरी वातावरण से दूर रखें। घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं ताकि मच्छर भीतर प्रवेश न करें।
FAQ
मानसून में बच्चों को दस्त क्यों हो जाते हैं?
मानसून में दूषित पानी पीना, हाथों की खराब सफाई, बैक्टीरियल इंफेक्शन, वायरल इंफेक्शन, बासी भोजन का सेवन करने से दस्त हो सकते हैं।क्या मानसून में बच्चों को सप्लीमेंट देना जरूरी है?
हर बच्चे को सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती। किसी पोषक तत्व की कमी होने पर डॉक्टर की सलाह से ही सप्लीमेंट देना चाहिए।
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Current Version
Aug 13, 2026 19:56 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Aug 13, 2026 19:56 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shilpa Aroskar