Sun Oct 18, 2026 | 03:21 AM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

मानसून में कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस का खतरा क्‍यों बढ़ जाता है? डॉक्‍टर से जानें जरूरी सावधान‍ियां

मानसून में आंखों में जलन, खुजली, रेडनेस के पीछे कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस हो सकता है। बार‍िश के पानी, नमी, फफूंद के कारण यह तेजी से फैलता है और एक से दूसरे व्‍यक्‍त‍ि को संक्रमि‍त कर सकता है। डॉक्‍टर से जानें इससे कैसे बचें?
मानसून में कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस का खतरा क्‍यों बढ़ जाता है? डॉक्‍टर से जानें जरूरी सावधान‍ियांमानसून में कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस का खतरा क्‍यों बढ़ जाता है? डॉक्‍टर से जानें जरूरी सावधान‍ियां

मानसून में कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस (Conjunctivitis) या प‍िंक आई का खतरा दोगुना हो जाता है। दरअसल मानसून, बैक्‍टीर‍िया और फंगस का पसंदीदा समय होता है क्‍योंक‍ि इस दौरान उन्‍हें ग्रो करने का सही माहौल म‍िलता है। इसका भुगतान हमारे शरीर को बीमारी और इंफेक्‍शन के जर‍िए चुकाना पड़ता है। ऐसा नहीं है क‍ि बैक्‍टीर‍िया और फंगस केवल त्‍वचा को प्रभाव‍ित करते हैं, बल्‍क‍ि ये आंखों को भी संक्रम‍ित कर सकते हैं। हम सभी जानते हैं क‍ि हमारी आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं। जरा सी भी गंदगी या धूल लग जाए, तो आंख में जलन होने लगती है। ऐसे में मानसून सीजन में कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस का प्रकोप आंखों को बीमार बना सकता है और आपकी द‍िनचर्या को प्रभाव‍ित कर सकता है। डॉक्‍टर से जानें मानसून में कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस का खतरा क्‍यों बढ़ जाता है और इससे बचने के ल‍िए क‍िन सावधान‍ियों का ख्‍याल रखें। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

मानसून में कंजंक्टिवाइटिस क्यों फैलता है?

Dr. Rajeev Chowdry ने बताया क‍ि मानसून के द‍िनों में वातावरण में नमी के कारण वायरस और बैक्‍टीर‍िया को ग्रो करने का माहौल म‍िल जाता है ज‍िसके कारण आंखों में इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ जाता है। कई बार हम ध्‍यान नहीं देते और संक्रमि‍त व्‍यक्‍त‍ि की चीजों को छू लेते हैं या उसके नजदीक रहते हैं। संक्रम‍ित व्‍यक्‍त‍ि के संपर्क में आने से, हाथ म‍िलाने या उसकी चीजों को इस्‍तेमाल करने से संक्रमण फैल सकता है।

  • मानसून में बार‍िश के पानी या गंदे पानी के संपर्क में आने से भी कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस का खतरा बढ़ सकता है। आंखों को गंदे हाथों से मलने के कारण यह समस्‍या बढ़ सकती है।
  • मानसून में हाइजीन का ख्‍याल न रखने से कई तरह के इंफेक्‍शन का खतरा होता है ज‍िनमें से एक कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस भी है। हाथों को साफ क‍िए बगैर आंखों को छूने से वायरस और बैक्‍टीर‍िया आंखों तक पहुंच जाते हैं और कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस हो सकता है।

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कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस से आंखों में सूजन हो सकती है

Mayo Clinic के मुताब‍िक, बच्‍चों और बड़ों दोनों में कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस आंखों के कॉर्न‍िया में सूजन पैदा कर सकती है। इससे देखने की क्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है। अगर आंखों में तेज दर्द हो, ऐसा लगे क‍ि आंख में कुछ फंस गया है, धुंधला द‍िखाई दे, लाइट सेंसिटिविटी हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें।

कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस होने पर ये लक्षण नजर आते हैं

कंजक्‍ट‍िवाइट‍िस होने पर कौन से लक्षण नजर आएंगे, ये प्रकार पर न‍िर्भर करता है।
अगर वायरल कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस है, तो सर्दी-जुकाम और इंफेक्‍शन के कारण-

  • आंखों में रेडनेस।
  • आंखों में पानी।
  • आंखों में जलन या खुजली।
  • आंखों में किरकिरापन महसूस हो सकता है।

अगर बैक्‍टीर‍ियल कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस है, तो-

  • आंखों से च‍िपच‍िपा ड‍िस्‍चार्ज न‍िकल सकता है।
  • सुबह उठने पर पलकें हल्‍की गीली होने के कारण च‍िपक सकती हैं।
  • आंखों में सूजन या रेडनेस हो सकती है।
  • आंखों में जलन महसूस हो सकती है।

कई बार आंख में धूल, पराग कण या पालतू जानवर के संपर्क में आने से भी एलर्जी हो जाती है। हालांक‍ि, मानसून में वायरल और बैक्‍टीर‍ियल कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस का खतरा ज्‍यादा होता है।

इंफेक्‍शन ठीक होने में एक से दो हफ्ते लग सकते हैं

American Academy Of Opthalmology के मुताब‍िक, कंजंक्टिवाइटिस को ठीक होने में एक से दो हफ्ते का समय लग सकता है। अगर लंबे समय तक लक्षण बने रहें, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। अगर वायरल कंजंक्टिवाइटिस है, तो आर्टिफिशियल टियर आई ड्रॉप्स की मदद से इलाज क‍िया जाता है। अगर बैक्‍टीर‍ियल कंजंक्टिवाइटिस है, तो एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स दी जा सकती हैं।

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मानसून में कंजंक्टिवाइटिस के प्रकाेप से बचाएंगी ये सावधान‍ियां

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1. मानसून में आंखों की हाइजीन से समझौता न करें

मानसून में नमी और इंफेक्‍शन फैलाने वाले बैक्टीरिया और वायरस के कारण आंखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इसल‍िए आंखों को छूने से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करें।

2. बारिश के गंदे पानी के संपर्क से आंखों को बचाएं

बारिश के पानी में धूल, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्व हो सकते हैं, जो आंखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। अगर आंख में बार‍िश का पानी चला जाए, तो उसे रगड़ने से बचें।

साल 2025 में Clinical Infection In Practice में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, बार‍िश का पानी अगर ठहरा हुआ है, तो उसमें सीवेज, मिट्टी, कचरा म‍िलने से फंगस और बैक्‍टीर‍िया ग्रो करने लगते हैं ज‍िससे आंखों में इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ सकता है।

3. बारिश में भीगने के बाद चेहरा जरूर साफ करें

Dr. Rajeev Chowdry ने बताया क‍ि बार‍िश में भीगने के बाद आंखों और चेहरा साफ करना चाह‍िए क्‍योंक‍ि बार‍िश का पानी उतना साफ नहीं होता ज‍ितना हम उसे समझते हैं। कई स्‍टडीज में बताया गया है क‍ि बार‍िश के पानी में कई तरह के हान‍िकारक तत्‍व पाए गए हैं जो आंखों के संपर्क में आते ही जलन, रेडनेस, आंखों में सूजन का कारण बन सकते हैं इसल‍िए आंखों और चेहरे की सफाई जरूरी है।

4. सीलन और फफूंद वाले वातावरण से आंखों को दूर रखें

अगर आपके घर में सीलन है, तो फफूंद की संभावना हो सकती है। ऐसी जगहों से दूर रहें क्‍योंक‍ि फफूंद के करीब रहने से कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस का खतरा बढ़ सकता है। आंख में खुजली, पानी या जलन हो, तो डॉक्‍टर से सलाह लें।

5. मानसून में एलर्जी बढ़ाने वाले कारकों से दूर रहें

मानसून में नमी के कारण घर, सतह और दीवारों पर मौजूद फफूंद, पराग कण और प्रदूषण जैसे कारक आंख में एलर्जी का कारण बन सकते हैं। जब भी बाहर जाएं, आंखें और चेहरे को कवर करें ताक‍ि एलर्जी वाले कण सीधे आंख में न आएं। साथ ही पब्‍ल‍िक प्‍लेस पर हाथों के हाइजीन का ख्‍याल रखें। हर थोड़ी देर में चेहरे और आंखों को साफ पानी से धोएं। साथ ही, गंदे हाथों से चेहरे को छूने से बचें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • जब आंखों में तेज दर्द हो।
  • देखने में धुंधलापन महसूस हो।
  • तेज रोशनी से परेशानी हो या सूजन नजर आए।
  • आंखों से पस न‍िकल रहा हो।

न‍िष्‍कर्ष:

मानसून में नमी के कारण वायरस और बैक्‍टीर‍िया को अनुकूल माहौल म‍िलता है और आंखों में इंफेक्‍शन जैसे कंजंक्टिवाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। हाइजीन का ख्‍याल न रखने या संक्रम‍ित चीजों को छू लेने के कारण भी इंफेक्‍शन का खतरा हो सकता है। कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस होने पर आंखों में रेडनेस, पानी आना, जलन, खुजली, आंखों में क‍िरक‍िरापन महसूस हो सकता है। बैक्‍टीर‍ियल कंजंक्‍ट‍िवाइट‍िस होने पर आंखों से च‍िपच‍िपा ड‍िस्‍चार्ज न‍िकल सकता है। मानसून में आंखों को फफूंद, पराग कण और प्रदूषण से दूर रखें, संक्रम‍ित व्‍यक्‍त‍ि के पास न जाएं, बार‍िश के पानी के संपर्क में आने के बाद चेहरे, आंखों और हाथों को अच्‍छी तरह से साफ कर लें।

FAQ

  • क्या कंजंक्टिवाइटिस होने पर कॉन्टैक्ट लेंस पहनना सही है?

    कंजंक्टिवाइटिस होने पर कॉन्टैक्ट लेंस नहीं पहनना चाह‍िए। इससे आंखों में जलन और इंफेक्‍शन बढ़ सकता है। 
  • क्या कंजंक्टिवाइटिस बार-बार हो सकता है?

    हां, एलर्जी, आंखों की हाइजीन का ख्‍याल न रखना, गंदे हाथों से आंखों को छूने के कारण कंजंक्टिवाइटिस दोबारा हो सकता है।

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  • Current Version

    Aug 07, 2026 17:35 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry