Wed Oct 7, 2026 | 12:40 PM IST

Medically Reviewed by Dr Karuna Malhotra , Cosmetologist, Skin specialist & Homoeopath Physician

बारिश के मौसम में दाद, खाज, खुजली क्यों करती है परेशान? डॉक्टर से जानें 5 कारण

बारिश के मौसम में कई लोगों को स्किन से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। मानसून में स्किन एलर्जी होने से खुजली और लाल चकत्ते बनने लगते हैं। इस लेख में डॉक्टर ने इसके कारणों को विस्तार से समझाया है और साथ ही मानसून में खुजली से बचाव के टिप्स भी दिए हैं।
बारिश के मौसम में दाद, खाज, खुजली क्यों करती है परेशान? डॉक्टर से जानें 5 कारणबारिश के मौसम में दाद, खाज, खुजली क्यों करती है परेशान? डॉक्टर से जानें 5 कारण

बारिश का मौसम शुरू होने पर कुछ लोगों को त्वचा से जुड़े रोग होने का रिस्क बढ़ जाता है। इस मौसम में नमी बढ़ने, पसीना जल्दी न सूखने और लगातार गीले कपड़े पहनने जैसे कारणों के चलते कई लोगों को त्वचा में खुजली, लाल चकत्ते, जलन या छोटे-छोटे दाने परेशान करने लगते हैं। यह समस्या आमतौर पर गर्दन, बगल, कमर, जांघों के बीच और पैरों की उंगलियों के बीच ज्यादा होती है। मानसून में खुजली होने के कारणों को जानने के लिए हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा (Cosmetologist and Skin Disease Specialist) से बात की।

मानसून में खुजली होने के 5 कारण

Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “मानसून में जब लोगों को खुजली होने लगती है, तो कई लोग इसे सामान्य एलर्जी समझकर कोई भी क्रीम लगा लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में खुजली के पीछे फंगल इंफेक्शन, हीट रैश या कीड़े के काटने जैसी अलग-अलग वजहें हो सकती हैं।”

1. ज्यादा नमी और पसीना आना 

Dr. Karuna Malhotra का कहना है, “मानसून में हवा में नमी काफी बढ़ जाती है। इसका असर यह होता है कि शरीर से निकलने वाला पसीना आसानी से सूख नहीं पाता। इस वजह से बगल, गर्दन, कमर, जांघों के बीच और घुटनों के पीछे जैसे हिस्सों में पसीना और नमी रह सकती है, जिसे आमतौर पर लोग साफ भी नहीं करते। इस वजह से स्किन में जलन, खुजली और छोटे लाल दाने हो सकते हैं।”

2. फंगल इंफेक्शन होना

Dr. Karuna Malhotra ने बताया कि बारिश के मौसम में फंगस को बढ़ने के लिए गर्म और नमी वाला वातावरण मिल जाता है। यही वजह है कि मानसून में रिंगवर्म, एथलीट्स फुट और यीस्ट इंफेक्शन जैसी समस्याओं की शिकायतें ज्यादा आती हैं। आमतौर पर देखा गया है कि पैरों की उंगलियों के बीच, जांघों के आसपास, कमर और त्वचा की सिलवटों में नमी ज्यादा देर तक रहने से फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो खुजली या पपड़ीदार चकत्ते शरीर के दूसरे भागों में फैल सकते हैं।

Dr. Karuna Malhotra ने कहा कि कुछ लोगों की मानसून में जुराबें या जूते गीले हो जाते हैं, लेकिन फिर भी वे लंबे समय तक उन्हें पहने रखते हैं। खासतौर पर स्कूल के बच्चे पूरा दिन स्कूल में गीले जूते और जुराबों में रहते हैं, इस वजह से भी फंगल इंफेक्शन होने का रिस्क बढ़ सकता है।”

3. गंदे बारिश के पानी में जाना

Dr. Karuna Malhotra के अनुसार, “बारिश का पानी सड़क पर गंदे नाले, धूल या सड़क की गंदगी के साथ इकट्ठा होता है। जो लोग उस गंदे पानी से निकलते हैं, उनमें से कुछ लोगों को स्किन में खुजली और जलन शुरू हो सकती है। अगर स्किन बहुत ज्यादा सेंसिटिव है या पहले से एक्जिमा जैसी समस्या है, तो ऐसे बारीश के गंदे पानी में जाने से परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है।”

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4. कीड़े-मच्छरों के काटने से खुजली होना 

Dr. Karuna Malhotra के मुताबिक, मानसून में मच्छर और कई तरह के कीड़े बढ़ जाते हैं। अगर पूरे कपड़े नहीं पहने, तो मच्छर या कीड़े के काटने से लोगों को छोटे लाल दाने, सूजन और तेज खुजली हो सकती है। कुछ लोगों को कीड़े के काटने से स्किन पर काफी ज्यादा लालिमा भी आ सकती है। अगर किसी को कीड़े के काटने के बाद बहुत ज्यादा सूजन, सांस लेने में परेशानी या शरीर के दूसरे भागों पर गंभीर एलर्जी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

5. स्किन की प्राकृतिक सुरक्षा परत कमजोर होना

Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “स्किन के ऊपर एक नेचुरल बैरियर होता है, जो उसे बाहरी गंदगी, कीड़ों और जलन पैदा करने वाली चीजों से बचाने में मदद करता है। दरअसल, मानसून के सीजन में बार-बार पसीना आने, गीले वातावरण में रहने और कई बार स्किन को जरूरत से ज्यादा बार साबुन से धोने के कारण इसका नेचुरल बैरियर कमजोर हो सकता है। अगर स्किन बहुत सेंसिटिव है, तो इसके कारण सूखापन, खुजली, लालिमा और रैशेज जैसी शिकायतें देखने को मिल सकती है।”

Journal of the European Academy of Dermatology & Venereology के मुताबिक, मौसम में नमी या रिलेटिव ह्यूमिडिटी स्किन के बैरियर फंक्शन को कमजोर बना सकती है। बैरियर कमजोर होने से स्किन बाहरी रगड़ के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव हो सकती है। इससे स्किन में सूजन, जलन या एलर्जी हो सकती है।

मानसून में किन लोगों को सावधान रहना चाहिए?

Dr. Karuna Malhotra सलाह देती हैं कि जिन लोगों को पहले से एक्जिमा, एलर्जी, अस्थमा या बार-बार फंगल इंफेक्शन की समस्या होती है, उन्हें बारिश के मौसम में अपनी स्किन पर खास ध्यान देना चाहिए। अगर घर के अंदर नमी होने पर फंफूदी लग गई है, तो एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है। इस वजह से कई बार सेंसिटिव लोगों को खुजली के साथ छींक, नाक बहना, खांसी या सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसी कंडीशन में तुरंत डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

मानसून में खुजली से बचने के आसान तरीके

Dr. Karuna Malhotra ने कहा कि लोगों को बारिश के मौसम में कुछ आदतों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि स्किन से जुड़ी समस्याएं कम हो सकें।

  • भीगे या पसीने वाले कपड़े जल्द से जल्द बदलें।
  • नहाने के बाद शरीर में पड़ने वाली सिलवटों को जरूर सुखाएं।
  • ढीले कॉटन के कपड़े पहनें।
  • पैरों को सूखा रखें।
  • बहुत देर तक गीले जूते या जुराबें पहनकर न रखें।
  • तौलिया, जुराबे या जूते किसी के साथ शेयर न करें।
  • सड़क पर जमा गंदे पानी में जाने के बाद शरीर को साफ पानी से धोएं।
  • जरूरत से ज्यादा साबुन का इस्तेमाल न करें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह लिए किसी भी तरह की स्टेरॉयड या एंटीफंगल क्रीम न लगाएं।
  • घर में नमी और फफूंद होने पर उसे ठीक कराएं।

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निष्कर्ष
मानसून के सीजन में स्किन पर होने वाली खुजली को नजरअंदाज न करें। अगर खुजली, लाल चकत्ते या दाने शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल रहे हैं या फिर परिवार के अन्य लोगों को भी खुजली हो रही है, तो स्किन इंफेक्शन जरूर चेक करानी चाहिए। इसके अलावा, मानसून में गंदे पानी, कीड़ों और मच्छरों से खुद को बचाकर रखें। स्किन को साफ और सूखा रखने के साथ हाइजीन का भी ध्यान रखें।

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FAQ

  • बारिश में दाद-खाज होने पर घरेलू स्तर पर कौन-सी गलतियों से बचना चाहिए?

    बिना डॉक्टरी सलाह के मेडिकल स्टोर से स्टेरॉयड युक्त क्रीम न लगाएं। ये क्रीम शुरुआती खुजली दबा देती हैं लेकिन फंगल इंफेक्शन को शरीर में गहराई तक फैला देती हैं।
  • नहाने के पानी में नीम के पत्ते डालने से क्या फंगल इंफेक्शन ठीक हो सकता है?

    एंटीसेप्टिक लिक्विड एंटी-बैक्टीरियल होते हैं, एंटी-फंगल नहीं है। इसका ज्यादा इस्तेमाल स्किन को और सुखाकर खुजली बढ़ा सकता है। नीम का पानी ठंडक दे सकता है, लेकिन इलाज के लिए एंटी-फंगल दवाओं की ही जरूरत होती है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 01, 2026 17:01 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Karuna Malhotra