बारिश के मौसम में अक्सर लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है, खासकर स्किन से जुड़ी। इस दौरान वातावरण में नमी होने और जगह-जगह पानी के जमा होने के कारण गंदगी भी बढ़ जाती है। ऐसे में नमी रहने और बारिश में भीगने के कारण व्यक्ति को स्किन इंफेक्शन होने और त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन क्या वाकई में बारिश के पानी से इंफेक्शन हो सकता है? ऐसे में इस दौरान त्वचा का खास ध्यान रखने की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में आइए Dr. Shireen Furtado, Sr. Consultant - Medical & Cosmetic Dermatology, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें।
क्या बारिश के पानी से स्किन इंफेक्शन हो सकता है?
डॉ. शिरीन के अनुसार, "आमतौर पर बारिश का पानी स्किन के लिए नुकसानदायक नहीं होता है, लेकिन मानसून के दौरान, बारिश का पानी अक्सर सड़कों और जलभराव वाले इलाकों में मौजूद धूल-मिट्टी, कीचड़, सीवेज के पानी, केमिकल और कई माइक्रोऑर्गेनिज्म (microorganisms) के साथ मिल जाता है। जब यह दूषित पानी त्वचा के संपर्क में आता है, खासकर अगर त्वचा पर कोई कट, खरोंच, कीड़े के काटने का निशान या पहले से कोई त्वचा की समस्या हो, तो इससे स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए सिर्फ बारिश में भीगना ही नहीं, बल्कि उसके बाद स्किन की सफाई भी उतनी ही जरूरी होती है। ऐसा नहीं करने से लोगों को त्वचा में खुजली, जलन, रैशेज और इंफेक्शन की समस्या बढ़ सकती है।"
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बरसात में स्किन इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
डॉ. शिरीन आगे कहती हैं, बारिश के मौसम में वातावरण में नमी ज्यादा होती है। गर्म और नमी वाला वातावरण बैक्टीरिया और फंगस के बढ़ने या पनपने के लिए अनुकूल माना जाता है। अगर स्किन लंबे समय तक गीली रहती है, तो उसकी नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो सकती है, जिससे इंफेक्शन का खतरा और बढ़ जाता है। इसके अलावा, गीले कपड़े, भीगे हुए जूते और मोजे लंबे समय तक पहनने से त्वचा लगातार नमी के संपर्क में रहती है। इसी कारण से मानसून में स्किन इंफेक्शन के मामले नॉर्मल दिनों के मुकाबले में ज्यादा देखने को मिलते हैं।
साल 2022 में The Journal of Climate Change and Health के अनुसार, हां, बारिश के पानी स्किन इंफेक्शन का एक गंभीर कारण बन सकता है। ज्यादा बारिश और बाढ़ के दौरान पानी में मौजूद कई बैक्टीरिया खुले घावों या कटे-फटे हिस्सों के जरिए अंदर पहुंच जाते हैं। इससे त्वचा में सूजन (सेल्युलाइटिस), फोड़े, रेड रैशेज, दाने और पीप भरी गांठें जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कम इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह इंफेक्शन और भी खतरनाक साबित हो सकता है, जो बढ़कर सेप्सिस (खून में जहर) जैसी जानलेवा स्थिति का रूप ले सकता है। इसलिए बारिश और बाढ़ के पानी से त्वचा का बचाव करना बेहद जरूरी है।
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मानसून में कौन-से स्किन इंफेक्शन ज्यादा होते हैं?
डॉ. शिरीन का कहना है, बारिश के मौसम के दौरान स्किन में फंगल इंफेक्शन होना सबसे आम समस्याओं में से एक है। गर्मी और नमी भरे वातावरण के कारण फंगस तेजी से बढ़ता है, इसलिए इस मौसम में पैरों में और स्किन के फोल्ड्स (skin folds) में फंगल इंफेक्शन, एथलीट्स फुट और दाद (ringworm) जैसी समस्याएं बढ़ जाती है। अगर स्किन पर कोई घाव या खरोंच हो और उसमें बैक्टीरिया चला जाएं, तो बैक्टीरियल इंफेक्शन भी हो सकता है। इसलिए त्वचा में मौजूद छोटे घावों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
डॉ. शिरीन बताती हैं, कुछ लोगों में मानसून के दौरान स्किन इंफेक्शन का खतरा नॉर्मल लोगों की तुलना में ज्यादा होता है। जिन लोगों को पहले से एक्जिमा, सोरायसिस, डायबिटीज या शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होने जैसी समस्याएं हैं, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों की त्वचा इंफेक्शन के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो सकती है, इसलिए लंबे समय तक बारिश के गंदे पानी के संपर्क में आने के बाद स्किन इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में त्वचा की सफाई और देखभाल में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
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किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
डॉ. शिरीन कहती हैं, अगर बारिश के पानी के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर लगातार खुजली, रेडनेस, पपड़ी बनने, छाले पड़ने, दर्द, सूजन, मवाद या बदबू वाले घाव दिखाई दें, तो इन्हें नॉर्मल समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं, जिनका समय पर इलाज कराना जरूरी होता है। जितनी जल्दी इलाज शुरू किया जाता है, इंफेक्शन को नियंत्रित करना उतना ही आसान होता है।
सावधानियां
खुजली होने, रैशेज, दाद, सूजन और मवाद होने जैसी समस्याएं होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इसके अलावा, बिना डॉक्टर की सलाह के त्वचा पर किसी भी क्रीम या दवा का इस्तेमाल करने से बचें। ऐसा करने से स्किन इंफेक्शन के बढ़ने और त्वचा से जुड़ी समस्याओं के होने का खतरा बढ़ता है।
निष्कर्ष
मानसून में दूषित बारिश के पानी, नमी और पसीने के कारण फंगल और बैक्टीरियल स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। खासकर कमजोर इम्यूनिटी, डायबिटीज या त्वचा की समस्याओं से पहले से पीड़ित लोगों में। ऐसे में इन लोगों को गीले कपड़े-जूते पहनने से बचें। लक्षण दिखने पर खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
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FAQ
बारिश में स्किन का इंफेक्शन से बचाव करने के लिए क्या करें?
बारिश में स्किन इंफेक्शन से बचाव करने के लिए स्किन का साफ-सफाई का खास ध्यान रखने, ढीले सूती और साफ कपड़े पहनें, भीगने के बाद तुरंत नहाएं, लंबे समय तक भीगने से बचें और स्किन में खुजली या अन्य परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह जरूर लें।बरसात के मौसम में त्वचा की एलर्जी क्यों बढ़ जाती है?
बरसात के मौसम में नमी और पसीने के बढ़ने के कारण व्यक्ति को स्किन में इंफेक्शन होने और फंगस के पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जिसके कारण व्यक्ति को खुजली, सूजन, रैशेज, घमौरियां, मुंहासे और एग्जिमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Jul 22, 2026 23:39 IST
Modified By : Priyanka Sharma Jul 22, 2026 23:39 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Shireen Furtado