बार छींक आना सिर्फ सर्दी-जुकाम का ही लक्षण नहीं है। कभी-कभी यह एलर्जी या किसी तरह के इंफेक्शन का लक्षण भी हो सकता है। विशेषकर, छींक आना धूल, पोलन या किसी गंध से एलर्जी का संकेत हो सकता है। आइए, जानते हैं कि छींक आना कब-कब एलर्जी का संकेत है और कब किसी अन्य समस्या का। इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से बात की।
एलर्जी और जुकाम में अंतर
| लक्षण | एलर्जी | सामान्य जुकाम |
| शुरुआत | किसी एलर्जन के संपर्क में आते ही अचानक छींक आना | 1-2 दिनों में धीरे-धीरे छींक की समस्या का बढ़ना |
| समय | समस्या हफ्तों या महीनों तक रह सकती है | सामान्य तौर पर 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाता है |
| बुखार | कभी नहीं होता | हल्का बुखार हो सकता है |
| आंखों में खुजली होना या पानी आना | बहुत आम है | आमतौर पर ऐसा नहीं होता है |
| नाक का बलगम | बिल्कुल साफ और पानी जैसा | गाढ़ा, पीला या हरा |
| शरीर में दर्द | नहीं होता | जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द |
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बार-बार छींक आने का कारण और लक्षण
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Dr. Akshay Chugh यह स्पष्ट करते हैं कि बार-बार छींक आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे-
एलर्जीः जब किसी को धूल-मिट्टी, पालतू जानवरों के डैंडर, पोलन आदि से एलर्जी होती है और वे अचानक उनके संपर्क में आ जाते हैं, तो इसकी वजह से उन्हें बार-बार छींक आ सकती है। यह लगातार बनी रहती है। यहां तक कि कई बार लगातार छींकने के कारण सिरदर्द हो जाता है। NIH के अनुसार एलर्जी में बुखार कभी नहीं होता है और न ही शरीर में दर्द होता है।
लक्षणः एलर्जी के लक्षण सर्दी-जुकाम के कारण होने वाली छींकों से बिल्कुल अलग होते हैं। जहां एक ओर सर्दी-जुकाम जब तक बनी रहती है, तब तक छींक की समस्या बनी रह सकती है और एलर्जी की छींके तभी तक रहती है, जब आप उसके ट्रिगर के संपर्क में आ जाते हैं।
वायरल संक्रमणः राइनोवायरस जैसे वायरस के कारण नाक और गले में सूजन हो जाती है। इसी क्रम में बार-बार छींक आने की समस्या भी हो जाती है। आमतौर पर वायरल इंफेक्शन में छींक के साथ-साथ गले में खराश, शरीर में दर्द, हल्का बुखार, थकान और नाक से गाढ़ा/पीला बलगम निकलने जैसे लक्षण नजर आते हैं। यही नहीं, जुकाम में नाक बंद हो सकता है और पानी भी बह सकता है।
लक्षणः Mayoclinic के अनुसार वायरल संक्रमण में कई लक्षण नजर आते हैं, जैसे वायरल इन्फेक्शन के दौरान नाक से तरल पदार्थ बहता है, जो कि शुरुआती 1-2 दिनों के बाद गाढ़ा, पीला या हरा हो जाता है। कभी-कभी शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। असल में, वायरल इंफेक्शन होने के कारण हल्का बुखार, गले में खराश और मांसपेशियों में दर्द होता है।
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डॉक्टर से पास कब जाएं?
एलर्जी और वायरल संक्रमण, दोनों ही स्थिति में समय पर डाॅक्टर के पास जाना जरूरी होता है। Dr. Akshay Chugh स्पष्ट करते हैं कि छींक आना सामान्य समस्या लग सकती है, लेकिन कुछ मामले ऐसे होते हैं, जब इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और समय पर डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए। आप इन लक्षणों पर गौर करें और तुरंत डाॅक्टर के पास जाएं-
- जब छींक के कारण नींद प्रभावित होने लगे।
- दवाइयों के बावजूद लक्षण 10-12 दिनों में ठीक न हों।
- छींक के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ हो और छाती में दर्द का एहसास हो।
- नाक का स्राव अत्यधिक गाढ़ा हो जाए।
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बार-बार छींक की समस्या से कैसे बचें?
Dr. Akshay Chugh के अनुसार, सही समय पर बचाव के उपाय अपनाकर इस समस्या को कंट्रोल कर सकते हैं-
- अगर आपको एलर्जी की समस्या है, तो ट्रिगर्स से बचें। इसका मतलब है कि धूल-मिट्टी वाले जगहों पर मास्क पहनकर जाएं और अपने आस-पास साफ-सफाई को प्राथमिकता दें।
- अगर बार-बार छींक आती है, तो उसे कंट्रोल करने के लिए आप नेजल वाॅश का यूज कर सकते हैं। दरअसल, इस स्प्रे से नाक की नली की सफाई करने पर नैजल पैसेज में जमा एलर्जन बाहर निकल जाता है।
- डॉक्टर की सलाह पर सही एंटी-एलर्जिक दवा ली जा सकती है।
- छींक की समस्या से राहत पाने के लिए आप स्टीम यानी भाप ले सकते हैं। इससे कंजेशन दूर होता है और सूजन में भी कमी आती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, कहने की बात यह है एलर्जी और सर्दी-जुकाम में होने वाली छींके अलग-अलग कारणों से होती हैं। इसलिए, आपको क्यों छींक आ रही है और इसका क्या कारण है, यह जानना जरूरी है। सही कारण जानकर समय पर उसका इलाज किया जा सकता है। आमतौर पर सर्दी-जुकाम वाली छींकें कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है, जबकि किसी एलर्जन के संपर्क में आने से एलर्जी की छींकें ट्रिगर हो जाती है। आप चाहें, तो लक्षणों में फर्क करके यानी बलगम के रंग और खुजली जैसे संकेतों पर ध्यान देकर आप आसानी से एलर्जी और जुकाम के बीच अंतर समझ सकते हैं।
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FAQ
एलर्जी के कारण हो रही छींकों की जांच के लिए कौन सा टेस्ट करवाया जाता है?
इसके लिए डॉक्टर मुख्य रूप से स्किन प्रिक टेस्ट (Skin Prick Test) या IgE ब्लड टेस्ट की सलाह देते हैं।क्या एलर्जिक राइनाइटिस यानी बार-बार छींक आने की समस्या का समय पर इलाज न कराने से क्या होता है?
अगर लगातार होने वाली एलर्जी का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो इससे आगे चलकर साइनसाइटिस (Sinusitis), कान के संक्रमण या अस्थमा (दमा) जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ सकता है।
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Current Version
Aug 24, 2026 16:48 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Akshay Chugh
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