बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार होना आम बात है। कई बार बच्चा सुबह बिल्कुल ठीक दिखाई देता है, लेकिन शाम होने तक उसकी नाक बहने लगती है, फिर खांसी और रात तक बुखार आ जाता है। ऐसे में पैरेंट्स का पूरा ध्यान बच्चे की देखभाल पर होता है, लेकिन पैरेंट्स इस बात को अक्सर भूल जाते हैं कि बीमार बच्चे से घर के दूसरे बच्चों या परिवार के सदस्यों को भी इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है। बच्चों के बीमार होने से दूसरों को संक्रमण से कैसे बचाएं? इस बारे में हमने Dr. Yatish Singh, Consultant Paediatrician and Neonatologist, Cloudnine Group of Hospitals, Indirapuram से बात की। उन्होंने बताया कि बच्चों के बीमार होने पर पैरेंट्स को रोजाना की छोटी-छोटी आदतों में सुधार करना चाहिए, कि बच्चों का संक्रमण घर के अन्य सदस्यों में न फैलें।
बच्चे को सर्दी-जुकाम होने पर क्या करें?
Dr. Yatish Singh ने कहा, “दरअसल, छोटे बच्चों की इम्यूनिटी काफी कम होती है। इसलिए जब वे खेलते समय चीजों को छूते हैं और अक्सर बिना हाथ साफ किए मुंह या नाक पर लगा लेते हैं। इससे सर्दी-जुकाम फैलाने वाले वायरस खांसने, छींकने और संक्रमित हाथों के जरिए दूसरों तक पहुंच सकते हैं। इसलिए बच्चे को आराम देने और उसका इलाज कराने के साथ घर में साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है। बच्चों के बीमार होने पर पैरेंट्स ये बातें जरूर ध्यान रखें।”
1. बच्चे के हाथ बार-बार साफ कराएं
Dr. Yatish Singh कहते हैं, “बच्चों की आदत होती है कि वे खेलते समय खिलौनों, फर्श और दूसरी चीजों को छूने के बाद उन्हीं हाथों से खाना भी खाने लगते हैं। इसलिए खेलने के बाद, टॉयलेट जाने के बाद और खाना खाने से पहले बच्चों को हाथ धोने की आदत बचपन से डलवाना जरूरी है। अगर बच्चा बीमार है, तो खांसने-छींकने या नाक साफ करने के बाद साबुन से हाथ धोना सिखाएं। हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह साफ करना चाहिए। अगर बीमारी में बच्चा बार-बार उठ नहीं पाता, तो कम से कम 60% अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि छोटे बच्चों को सैनिटाइजर हमेशा पैरेंट्स ही दें।”
साल 2023 में मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग साबुन से हाथ धोते हैं, उनमें सांस से जुड़े इंफेक्शन के रिस्क में औसतन करीब 17% प्रतिशत की कमी देखी गई है।
2. बार-बार नाक, मुंह और आंखें छूने से रोकें
Dr. Yatish Singh ने कहा, “कई बार बच्चे बीमार होने पर कभी आंखें रगड़ने लगते हैं, तो कभी नाक में हाथ डाल लेते हैं। अगर उनके हाथों पर वायरस मौजूद हैं, तो इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जब बच्चे बीमार होते हैं, तो उन्हें समझाएं कि नाक साफ करने के लिए साफ टिश्यू का इस्तेमाल करे और उसे तुरंत कूड़ेदान में डाल दे। इसके बाद हाथ धोना भी जरूरी है। अगर बच्चा बार-बार ऐसा करना भूलता है, तो उसे डांटने के बजाय प्यार से समझाएं। धीरे-धीरे यह उसकी आदत बन सकती है। इस आदत से घर के दूसरे बच्चों या सदस्यों में इंफेक्शन फैलने का खतरा कम हो सकता है।”
3. खिलौनों और टीवी रिमोट की सफाई करें
Dr. Yatish Singh के मुताबिक, जब बच्चा बीमार होता है, तो पैरेंट्स उसे खेलने के लिए खिलौने दे देते हैं और फिर वही खिलौने दूसरे बच्चे भी ले लेते हैं। इसके अलावा, टीवी रिमोट भी घर के हर सदस्य के बीच जाता है। इसलिए जब बीमार बच्चा खिलौनों से खेलता है, तो उन्हें सैनिटाइज जरूर करें। टीवी रिमोट को भी जरूर सैनिटाइज करें। बीमारी ठीक होने के बाद वायरस को खत्म करने के लिए खिलौने, टीवी रिमोट, दरवाजे के हैंडल और बेड की चादर सभी की अच्छे से सफाई करें।
Child fever and cold care tips
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4. खांसने और छींकने का सही तरीका बताएं
Dr. Yatish Singh कहते हैं, “बच्चा जब बीमार होता है, तो उसे समझ नहीं आता कि खांसते या छींकते समय मुंह ढकना क्यों जरूरी है। ऐसे में पैरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें बताएं कि खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू से ढके। टिश्यू न होने पर कोहनी के अंदरूनी हिस्से का इस्तेमाल करें। हाथों में खांसने या छींकने से बचना चाहिए, क्योंकि उन्हीं हाथों से बच्चा खिलौने और दूसरी चीजें छू सकता है।”
5. बुखार-जुकाम में बच्चे को स्कूल भेजने से बचें
Dr. Yatish Singh का कहना है, “कुछ पैरेंट्स बच्चे को बुखार या जुकाम-खांसी होने पर स्कूल या डे-केयर भेज देते हैं। इससे दूसरे बच्चों में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए बीमार होने पर बच्चे को घर में आराम करने दें। उसकी पानी की बोतल, तौलिया, रूमाल और खाने के बर्तन दूसरे बच्चों के साथ साझा न करें।”
डॉक्टर की सलाह
Dr. Yatish Singh पैरेंट्स को सलाह देते हैं कि बुखार या जुकाम होने पर कुछ बच्चों की भूख कम हो जाती है। उन्हें जबरदस्ती खाना न खिलाएं, लेकिन धीरे-धीरे दिन भर में पौष्टिक खाना और पर्याप्त तरल पदार्थ जरूर देते रहें। अगर बच्चे को बुखार, सर्दी-जुकाम के साथ सुस्त हो, सांस लेने में परेशानी हो रही है, पानी न पी रहा या पेशाब कम हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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निष्कर्ष
अगर बच्चे को सर्दी-जुकाम और बुखार है, तो उसकी दवा और आराम के साथ साफ-सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को हाथ धोना सिखाएं, खिलौनों की सफाई रखें, खांसते-छींकते समय मुंह ढकने की आदत डालें और बीमारी के दौरान दूसरे बच्चों से थोड़ी दूरी बनाकर रखें।
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FAQ
क्या बीमार बच्चे के साथ अन्य भाई-बहनों को एक ही बिस्तर पर सुलाना चाहिए?
बिल्कुल नहीं। जब तक बच्चे को छींक, खांसी या बहती नाक की समस्या है, तब तक दूसरे बच्चों को उससे कम से कम 2 मीटर की दूरी पर सुलाएं। रात में सांस और खांसी की बूंदों से दूसरे बच्चों में संक्रमण सबसे तेजी से फैलता है।क्या 1 साल से छोटे बच्चे को खांसी में शहद देना सुरक्षित है?
1 साल से कम उम्र के शिशुओं को कभी शहद नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे इन्फेंट बॉटुलिज्म गंभीर और जानलेवा बैक्टीरियल टॉक्सिन इंफेक्शन हो सकता है। 1 साल से बड़े बच्चों को आधा चम्मच शहद रात में खांसी शांत करने के लिए सुरक्षित रूप से दिया जा सकता है।
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Oct 24, 2026 19:19 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr. Yatish Singh
