बच्चों का बार-बार बीमार पड़ना पेरेंट्स के लिए चिंता का कारण बन सकता है। कभी सर्दी-जुकाम, कभी खांसी, तो कभी बुखार होने पर अक्सर माता-पिता सोचने लगते हैं कि आखिर उनका बच्चा बार-बार बीमार क्यों हो रहा है? KIMS हॉस्पिटल्स, महादेवपुरा बेंगलुरु के लीड और सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, कई बार इसके पीछे बच्चों की कमजोर इम्यूनिटी, बदलता मौसम या इंफेक्शन के संपर्क में आना हो सकता है। हालांकि, रोजाना की कुछ आदतें भी बच्चों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।
हाथों की सफाई का ध्यान न रखना, खान-पान में लापरवाही और फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसी आदतें बच्चों की हेल्थ पर असर डाल सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चे के डेली रूटीन पर ध्यान दें और समय रहते जरूरी बदलाव करें। आइए जानते हैं कि बच्चों की कौन-सी रोजमर्रा की आदतें उन्हें बीमार पड़ने के प्रति ज्यादा सेंसिटिव बना सकती हैं और पेरेंट्स उनकी सेहत का ध्यान कैसे रख सकते हैं।
बच्चा बार-बार बीमार क्यों पड़ता है?
प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, बच्चों के बार-बार बीमार पड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, हर बार बीमारी की वजह कमजोर इम्यूनिटी ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
1. हाथों की सफाई का ध्यान न रखना
प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज का कहना है कि बच्चे खेलते समय खिलौनों, दरवाजों, जमीन और कई दूसरी चीजों को छूते हैं। इसके बाद बिना हाथ धोए खाना खाने या मुंह और नाक को छूने से इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ सकता है। हाथों की सफाई न रखने से सर्दी-जुकाम और पेट से जुड़ी कुछ संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए बच्चों को खाना खाने से पहले, शौचालय इस्तेमाल करने के बाद और बाहर से घर आने पर साबुन और पानी से हाथ धोने की आदत डालें।
2. पर्याप्त नींद न लेना
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है। नींद की कमी शरीर के इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। देर रात तक मोबाइल देखना, अनियमित समय पर सोना और सुबह जल्दी उठना बच्चों की नींद पूरी होने में बाधा बन सकते हैं। इसलिए बच्चे की उम्र के अनुसार उसकी नींद का समय तय करें। सोने से पहले मोबाइल, टीवी का इस्तेमाल कम कराएं।
3. खान-पान में लापरवाही
बच्चों को बैलेंस डाइट न मिलने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। भोजन में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की कमी होने पर बच्चे के विकास और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है। अगर बच्चा रोजाना केवल जंक फूड, चिप्स, बिस्कुट का सेवन करता है, तो उसकी डाइट में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। बच्चों को दाल, हरी सब्जियां, मौसमी फल, प्रोटीन सोर्स और साबुत अनाज दें। जबरदस्ती खिलाने के बजाय बैलेंस डाइट की आदत धीरे-धीरे विकसित करें।
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4. फिजिकल एक्टिविटी की कमी
प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज का मानना है कि आजकल कई बच्चे बाहर खेलने के बजाय मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम में ज्यादा समय बिताते हैं। फिजिकल एक्टिविटीज बच्चों के शारीरिक विकास, अच्छी नींद और पूरी सेहत के लिए जरूरी हैं। उम्र के अनुसार खेलकूद, दौड़ना, साइकिल चलाना और अन्य एक्टिविटीज उनके डेली रूटीन का हिस्सा होनी चाहिए।
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5. बार-बार संक्रमित लोगों के संपर्क में आना
प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, स्कूल, डेकेयर और खेल के मैदानों में बच्चे कई दूसरे बच्चों के संपर्क में आते हैं। इस दौरान सर्दी-जुकाम जैसे इंफेक्शन एक बच्चे से दूसरे बच्चे तक पहुंच सकते हैं। बच्चों को खांसते या छींकते समय मुंह ढकने, इस्तेमाल किए गए टिश्यू को सही तरीके से फेंकने और पानी की बोतल या तौलिया शेयर न करने की आदत सिखाएं।
साल 2009 में International Journal of Clinical Pediatric Dentistry में प्रकाशित स्टडी के अनुसार-
- बच्चों में बुरी ओरल आदतें जैसे नाखून चबाना और शरीर की सफाई की कमी हेल्थ के लिए हानिकारक हो सकती है।
- इस रिसर्च में 4 से 15 वर्ष के बच्चों का परीक्षण किया गया, जिसमें लगभग 20% बच्चों में बुरी आदतें पाई गईं, जिनमें नाखून चबाना सबसे आम और ब्रुक्सिसम (दांत पीसना) सबसे कम पाया गया।
- हालांकि बच्चों में सफाई की सामान्य जानकारी अच्छी थी, लेकिन कुछ बच्चे इससे अनजान थे। इसलिए, बच्चों की हेल्थ को सुरक्षित रखने के लिए घर और स्कूल दोनों लेवल पर उन्हें सही आदतें सिखाना और जागरुक करना बेहद जरूरी है।
बच्चे के बार-बार बीमार पड़ने पर डॉक्टर को कब दिखाएं?
प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज सलाह देते हैं कि अगर बच्चा बार-बार बीमार पड़ रहा है, तो हर बार इसे कमजोर इम्यूनिटी मानकर नजरअंदाज न करें। खासकर यदि उसे बार-बार गंभीर इंफेक्शन हो रहे हों, लंबे समय तक बुखार बना रहता हो, वजन नहीं बढ़ रहा हो, लगातार कमजोरी रहती हो या इंफेक्शन से ठीक होने में ज्यादा समय लगता हो, तो पीडियाट्रिशियन डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर बच्चे की उम्र, लक्षणों, विकास और बीमारी कितने बार हो रही है इसके आधार पर सही कारण का पता लगा सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को एंटीबायोटिक्स या इम्यूनिटी बढ़ाने वाले सप्लीमेंट न दें।
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निष्कर्ष
बच्चों को बार-बार बीमार पड़ने से बचाने के लिए उनकी रोजाना की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। हाथ धोना, पर्याप्त नींद लेना, बैलेंस डाइट, साफ पानी पीना और फिजिकली एक्टिव रहना बच्चों की हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही, वैक्सीनेशन समय पर करवाएं और बीमारी के लक्षण गंभीर या असामान्य होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर होने के लक्षण क्या हैं?
बार-बार गंभीर इंफेक्शन होना, इंफेक्शन से ठीक होने में असामान्य रूप से ज्यादा समय लगना और कुछ मामलों में वजन या विकास ठीक से न बढ़ना जांच की जरूरत का संकेत हो सकते हैं।क्या बच्चों को मल्टीविटामिन देना चाहिए?
हर बच्चे को मल्टीविटामिन देने की जरूरत नहीं होती। यदि बच्चा बैलेंस डाइट ले रहा है, तो उसे भोजन से कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। सप्लीमेंट की जरूरत बच्चे की डाइट, उम्र और हेल्थ कंडीशन के आधार पर डॉक्टर तय कर सकते हैं।बच्चों के लिए कितने घंटे की नींद जरूरी है?
नींद की जरूरत उम्र के अनुसार बदलती है। सामान्य तौर पर 1-2 साल के बच्चों को दिन की नींद सहित 11-14 घंटे, 3-5 साल के बच्चों को 10-13 घंटे और 6-12 साल के बच्चों को 9-12 घंटे की नींद चाहिए।
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Oct 15, 2026 17:41 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Prof Dr S M Fayaz
