Wed Oct 14, 2026 | 02:11 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Jee Sharma , Sr. Consultant – Internal Medicine

रोज गरारे करने से सर्दी-जुकाम सही हो सकता है? डॉक्टर से जानें कब एंटीबायोटिक्स हैं जरूरी

क्या रोज गरारे करने से सर्दी-जुकाम से बचा जा सकता है या सिर्फ गले को राहत मिलती है? डॉक्टर से जानिए, वायरल इंफेक्शन में एंटीबायोटिक्स कब जरूरी हैं और कब इनसे बचना चाहिए।
रोज गरारे करने से सर्दी-जुकाम सही हो सकता है? डॉक्टर से जानें कब एंटीबायोटिक्स हैं जरूरीरोज गरारे करने से सर्दी-जुकाम सही हो सकता है? डॉक्टर से जानें कब एंटीबायोटिक्स हैं जरूरी

सर्दी-जुकाम होते ही गले में खराश, दर्द या जलन महसूस होने लगती है। ऐसे में कई घरों में सबसे पहले गुनगुने नमक वाले पानी या मेथी के पानी से गरारे करने की सलाह दी जाती है। कुछ लोग दिन में दो से तीन बार गरारे करते हैं, तो कुछ हर बार गले में परेशानी होने पर इस उपाय को अपनाते हैं, वहीं कुछ लोग एंटीबायोटिक्स लेना शुरू कर देते हैं। कैलाश अस्पताल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, सर्दी-जुकाम को लेकर एक आम गलतफहमी यह भी है कि गले में दर्द होने पर एंटीबायोटिक्स लेने से बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है। जबकि ऐसा हर मामले में नहीं होता।

इंटरनल मेडिसिन डॉ. गोपाल जी शर्मा से समझें कि सर्दी-जुकाम के दौरान घरेलू उपाय किस तरह राहत दे सकते हैं और किन परिस्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है। सही जानकारी होने से आप बेवजह दवाएं लेने से बच सकते हैं और जरूरत पड़ने पर समय पर उचित इलाज भी करा सकते हैं।

क्या नमक के पानी से गरारे सर्दी-जुकाम में राहत देते हैं?

डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, गुनगुने नमक वाले पानी या सादा गुनगुने पानी से गरारे करने से गले में खराश, जलन और दर्द में राहत मिल सकती है। गरारे करने से गले में जमा बलगम को साफ करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि गरारे करने से सर्दी-जुकाम पैदा करने वाले वायरस शरीर से खत्म नहीं होते हैं।

सामान्य सर्दी-जुकाम ज्यादातर वायरस के कारण होता है। ऐसे में गरारे लक्षणों को कम करने का एक आसान घरेलू उपाय हैं, लेकिन इन्हें बीमारी का पूरा इलाज नहीं माना जा सकता। गरारे करने के लिए हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाएं और दिन में जरूरत के अनुसार दो से तीन बार गरारे कर सकते हैं। पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए। गरारे करने के बाद पानी को निगलने के बजाय बाहर निकाल दें।

  • गरारे करने से गले की असहजता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बहुत ज्यादा नमक मिलाने या बार-बार गरारे करने से गले में जलन हो सकती है।
  • सर्दी-जुकाम में पर्याप्त आराम करना और पानी पीना भी जरूरी है। नाक बंद होने पर सलाइन नेजल स्प्रे से राहत मिल सकती है।
  • छोटे बच्चों को गरारे नहीं करवाने चाहिए, यदि वे सुरक्षित तरीके से गरारे करके पानी बाहर नहीं निकाल सकते।
  • अगर गले का दर्द लगातार बढ़ रहा है या कई दिनों तक ठीक नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

साल 2005 में American Journal of Preventive Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, सादे पानी से गरारे करना हेल्दी लोगों में अपर रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट के इंफेक्शन (जैसे सर्दी-जुकाम और गले के इंफेक्शन) को रोकने में काफी असरदार है। स्टडी में पाया गया कि सादे पानी से गरारे करने वाले लोगों में इंफेक्शन का खतरा काफी कम हो गया, जबकि एंटीसेप्टिक या दवा वाले पानी से गरारे करने पर ऐसा कोई खास फायदा नहीं दिखा। चूंकि सादा पानी पूरी तरह से मुफ्त और आसान उपाय है, इसलिए यह आम जनता के लिए सर्दी-जुकाम से बचने का एक बेहद फायदेमंद और सरल तरीका साबित हो सकता है।

can gargling treat common coldcan gargling treat common cold

सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक्स कब जरूरी होते हैं?

डॉ. गोपाल जी शर्मा बताते हैं कि एंटीबायोटिक्स ऐसी दवाएं हैं, जो बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। सामान्य सर्दी-जुकाम ज्यादातर वायरस के कारण होता है, इसलिए इसमें एंटीबायोटिक्स लेने से फायदा नहीं होता। बिना जरूरत इन दवाओं का सेवन करने से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि फ्यूचर में बैक्टीरिया पर ये दवाएं असर करना कम कर सकती हैं।

हालांकि, कुछ मामलों में गले में दर्द बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर लक्षणों की जांच और जरूरत पड़ने पर टेस्ट के आधार पर एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दे सकते हैं। केवल गले में दर्द, खांसी या नाक बहने के आधार पर खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना सही नहीं है।

इसे भी पढ़ें: क्या सच में विटामिन सी लेने से सर्दी-जुकाम से बचाव हो सकता है? डॉक्टर से जानें

सर्दी-जुकाम में डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

सामान्य सर्दी-जुकाम के साथ अगर तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, पानी पीने या निगलने में कठिनाई हो या लक्षण ठीक होने के बजाय बिगड़ने लगें, तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना चाहिए। यदि गले में तेज दर्द के साथ बुखार हो और खांसी न हो, तो भी चेकअप की जरूरत पड़ सकती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को लक्षण बिगड़ने पर खास सावधानी बरतनी चाहिए।

सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, सर्दी-जुकाम से बचने के लिए हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें और बीमार व्यक्ति के साथ तौलिया या दूसरी निजी चीजें शेयर करने से बचें। पर्याप्त नींद लें और शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके अलावा, बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स या दूसरी दवाएं न लें। अगर आपको बार-बार सर्दी-जुकाम होता है या लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसके पीछे एलर्जी या कोई अन्य समस्या भी हो सकती है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूरी है।

इसे भी पढ़ें: काढ़ा ही नहीं, सर्दी-जुकाम में राहत दिला सकते हैं आयुर्वेद के ये 5 असरदार उपाय

निष्कर्ष

रोज गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करने से सर्दी-जुकाम के दौरान गले की खराश और दर्द में राहत मिल सकती है, लेकिन इससे वायरस खत्म नहीं होते और न ही सर्दी-जुकाम तुरंत ठीक होता है। सामान्य वायरल इंफेक्शन में एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं होती। इनका इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर, बैक्टीरियल इंफेक्शन होने पर किया जाना चाहिए। अगर लक्षण गंभीर हों, लंबे समय तक बने रहें या लगातार बिगड़ रहे हों, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • क्या सर्दी-जुकाम में भाप लेना फायदेमंद होता है?

    भाप लेने से कुछ लोगों को नाक बंद होने की समस्या में कुछ समय के लिए राहत महसूस हो सकती है, लेकिन इससे बीमारी जल्दी ठीक हो जाएगी ऐसा जरूरी नहीं है।
  • क्या सर्दी-जुकाम में एक्सरसाइज करनी चाहिए?

    अगर केवल हल्की छींक या नाक बहने जैसे लक्षण हैं, तो हल्की एक्सरसाइज की जा सकती है लेकिन बुखार, शरीर में दर्द, बहुत ज्यादा थकान या सीने से जुड़ी परेशानी होने पर आराम करना चाहिए।

Read Next

→ क्या आंखों की खोई रोशनी वापस आ सकती है? डॉक्टर से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 14, 2026 12:19 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Gopal Jee Sharma