Wed Oct 14, 2026 | 02:15 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shibal Bhartiya , Clinical Director – Ophthalmology, Marengo Asia Hospitals, Gurugram

क्या आंखों की खोई रोशनी वापस आ सकती है? डॉक्टर से जानें

आंखों की रोशनी कम होने या जाने का कारण पता चलने पर इलाज की संभावना तय होती है। यहां डॉक्टर से जानिए, किन स्थितियों में नजर वापस आ सकती है?
क्या आंखों की खोई रोशनी वापस आ सकती है? डॉक्टर से जानेंक्या आंखों की खोई रोशनी वापस आ सकती है? डॉक्टर से जानें

आंखों की रोशनी कम होना या अचानक दिखाई देना बंद हो जाना किसी के लिए भी चिंता का कारण हो सकता है। कई बार लोगों को लगता है कि एक बार आंखों की रोशनी चली गई, तो उसे दोबारा वापस नहीं लाया जा सकता। हालांकि, ऐसा हर मामले में नहीं होता। गुरुग्राम के Marengo Asia Hospital में ऑप्थल्मोलॉजी की क्लिनिकल डायरेक्टर, ग्लूकोमा स्पेशलिस्ट डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, आंखों की रोशनी वापस आएगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रोशनी कम होने की वजह क्या है, आंख के किस हिस्से को नुकसान पहुंचा है और समस्या का इलाज कितनी जल्दी शुरू किया गया है। कुछ स्थितियों में दवाओं, चश्मे या सर्जरी की मदद से नजर में सुधार हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में आंखों की रोशनी का नुकसान स्थायी हो सकता है।

क्या आंखों की रोशनी वापस आ सकती है?

ग्लूकोमा स्पेशलिस्ट डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, आंखों की रोशनी वापस आने की संभावना बीमारी के प्रकार और आंखों को हुए नुकसान पर निर्भर करती है। अगर नजर कम होने की वजह मोतियाबिंद है, तो सर्जरी के जरिए काफी हद तक नजर में सुधार किया जा सकता है। इसी तरह, चश्मे के नंबर में बदलाव होने पर सही नंबर का चश्मा लगाने से साफ दिखाई देने लगता है।

वहीं, अगर आंखों की रोशनी ऑप्टिक नर्व यानी दृष्टि तंत्रिका को गंभीर नुकसान पहुंचने के कारण गई है, तो उसे वापस लाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि हर तरह की खोई रोशनी का इलाज संभव है या हर मामले में रोशनी स्थायी रूप से चली जाती है। इसके लिए ऑप्थल्मोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।

किन बीमारियों में वापस आ सकती है आंखों की रोशनी?

आंखों की कुछ समस्याओं में समय पर इलाज मिलने से नजर में सुधार संभव है। मोतियाबिंद में आंख के नेचुरल लेंस पर धुंधलापन आ जाता है, जिससे चीजें साफ नहीं दिखाई देतीं। सर्जरी में धुंधले लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस लगाया जाता है, जिससे कई मरीजों की नज बेहतर हो सकती है।

इसके अलावा, आंखों में इंफेक्शन या सूजन, कुछ प्रकार की रेटिना संबंधी समस्याओं और अचानक बढ़ने वाले आंखों के दबाव (acute angle closure glaucoma) जैसी स्थितियों में सही समय पर इलाज से दृष्टि यानी नजर को बचाने या सुधारने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इलाज का रिजल्ट बीमारी की गंभीरता और आंख के अंदर हुए नुकसान पर निर्भर करता है।

साल 2018 में eBioMedicine जर्नल में प्रकाशित रिसर्च पेपर के अनुसार, आंखों के मोतियाबिंद का असर केवल नजर पर ही नहीं, बल्कि दिमाग के काम करने के तरीके और उसकी संरचना पर भी पड़ता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन (सर्जरी) से दृष्टि यानी नजर में सुधार होने के बाद, मरीजों के दिमाग के उन हिस्सों के फंक्शन और संरचना में भी सुधार देखा गया जो देखने और सोचने से जुड़े हैं। सर्जरी के कुछ महीनों बाद ये बदलाव ठीक होकर हेल्दी लोगों के लेवल पर पहुंच गए। इससे यह साबित होता है कि आंख और दिमाग आपस में गहराई से जुड़े हैं।

Can loss of vision be restoredCan loss of vision be restored

इसे भी पढ़ें: क्या चश्मा लगाने से आंखों की रोशनी कम होती है? डॉक्टर से जानें सच्चाई

किन कारणों से आंखों की रोशनी स्थायी रूप से जा सकती है?

ग्लूकोमा स्पेशलिस्ट डॉ. शिबल भारतीय बताती हैं कि ग्लूकोमा में आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है। एक बार इसमें स्थायी नुकसान हो जाए, तो खोई हुई रोशनी वापस लाना आमतौर पर संभव नहीं होता। हालांकि, समय पर इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोकने और बची हुई दृष्टि को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। इसी तरह, डायबिटीज के कारण रेटिना को नुकसान, रेटिना का अलग हो जाना या ऑप्टिक नर्व को गंभीर चोट लगना भी आंखों की रोशनी जाने का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में इलाज से सुधार संभव है, लेकिन देरी होने पर स्थायी नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।

Glaucoma Research Foundation में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, हमारे शरीर की परिधीय नसें (peripheral nerves), जैसे हाथ की नसें, चोट लगने पर ठीक हो सकती हैं लेकिन ऑप्टिक नर्व और रीढ़ की हड्डी (spinal cord) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) का हिस्सा हैं, जो चोट लगने के बाद दोबारा ठीक नहीं हो सकतीं। यही कारण है कि रीढ़ की चोट से होने वाले लकवे की तरह ग्लूकोमा में गया हुआ विजन हमेशा के लिए स्थायी रहता है, क्योंकि इस एरिया की सेल्स का वातावरण पुनर्जनन (regeneration) को रोकता है।

इसे भी पढ़ें: लो-ब्लड प्रेशर कैसे ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा सकता है? डॉक्टर से जानें आंखों की सेहत और लो-बीपी का कनेक्शन

अचानक आंखों से कम दिखने लगे तो क्या करें?

डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, अगर अचानक एक या दोनों आंखों से कम दिखाई देने लगे, नजर के सामने पर्दा-सा आए, रोशनी की चमक दिखे या बहुत सारे काले धब्बे दिखाई देने लगें, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। अचानक नजर कम होना आंखों की गंभीर समस्या या स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी में डॉक्टर से सलाह लें। घरेलू नुस्खे आजमाने, बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप डालने या अपने आप ठीक होने का इंतजार करने से बचें।

निष्कर्ष

आंखों की खोई रोशनी वापस आ सकती है या नहीं, इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। मोतियाबिंद जैसी कुछ स्थितियों में इलाज से नजर में काफी सुधार हो सकता है, जबकि ऑप्टिक नर्व को स्थायी नुकसान होने पर आंखों की रोशनी वापस लाना मुश्किल होता है। इसलिए नजर में किसी भी तरह का बदलाव होने पर समय पर ऑप्थल्मोलॉजिस्ट से जांच कराना सबसे जरूरी है। खासतौर से अचानक रोशनी कम होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि कुछ मामलों में इलाज में देरी से आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • क्या आंखों की रोशनी कम होने पर हमेशा मोटा चश्मा लगाना पड़ता है?

    हर मामले में मोटा चश्मा लगाने की जरूरत नहीं होती। नजर कमजोर होने का कारण जानने के लिए आंखों की जांच जरूरी है। कुछ समस्याओं में चश्मा मदद करता है, जबकि अन्य में अलग इलाज की जरूरत हो सकती है।
  • क्या गाजर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ाती है?

    गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है, जिससे शरीर विटामिन A बनाता है। यह आंखों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन केवल गाजर खाने से चश्मे का नंबर खत्म नहीं होता।
  • क्या आंखों की सर्जरी के बाद दोबारा नजर कमजोर हो सकती है?

    कुछ मामलों में सर्जरी के बाद भी नजर कमजोर हो सकती है। इसकी वजह आंखों की दूसरी बीमारी, रेटिना की समस्या या सर्जरी के बाद होने वाली कुछ समस्याएं हो सकती हैं।

Read Next

→ गर्दन पर मस्से क्यों होते हैं? जानें मस्सों को दूर करने के उपाय

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 14, 2026 12:02 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Shibal Bhartiya