आंखों की रोशनी कम होना या अचानक दिखाई देना बंद हो जाना किसी के लिए भी चिंता का कारण हो सकता है। कई बार लोगों को लगता है कि एक बार आंखों की रोशनी चली गई, तो उसे दोबारा वापस नहीं लाया जा सकता। हालांकि, ऐसा हर मामले में नहीं होता। गुरुग्राम के Marengo Asia Hospital में ऑप्थल्मोलॉजी की क्लिनिकल डायरेक्टर, ग्लूकोमा स्पेशलिस्ट डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, आंखों की रोशनी वापस आएगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रोशनी कम होने की वजह क्या है, आंख के किस हिस्से को नुकसान पहुंचा है और समस्या का इलाज कितनी जल्दी शुरू किया गया है। कुछ स्थितियों में दवाओं, चश्मे या सर्जरी की मदद से नजर में सुधार हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में आंखों की रोशनी का नुकसान स्थायी हो सकता है।
क्या आंखों की रोशनी वापस आ सकती है?
ग्लूकोमा स्पेशलिस्ट डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, आंखों की रोशनी वापस आने की संभावना बीमारी के प्रकार और आंखों को हुए नुकसान पर निर्भर करती है। अगर नजर कम होने की वजह मोतियाबिंद है, तो सर्जरी के जरिए काफी हद तक नजर में सुधार किया जा सकता है। इसी तरह, चश्मे के नंबर में बदलाव होने पर सही नंबर का चश्मा लगाने से साफ दिखाई देने लगता है।
वहीं, अगर आंखों की रोशनी ऑप्टिक नर्व यानी दृष्टि तंत्रिका को गंभीर नुकसान पहुंचने के कारण गई है, तो उसे वापस लाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि हर तरह की खोई रोशनी का इलाज संभव है या हर मामले में रोशनी स्थायी रूप से चली जाती है। इसके लिए ऑप्थल्मोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।
किन बीमारियों में वापस आ सकती है आंखों की रोशनी?
आंखों की कुछ समस्याओं में समय पर इलाज मिलने से नजर में सुधार संभव है। मोतियाबिंद में आंख के नेचुरल लेंस पर धुंधलापन आ जाता है, जिससे चीजें साफ नहीं दिखाई देतीं। सर्जरी में धुंधले लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस लगाया जाता है, जिससे कई मरीजों की नज बेहतर हो सकती है।
इसके अलावा, आंखों में इंफेक्शन या सूजन, कुछ प्रकार की रेटिना संबंधी समस्याओं और अचानक बढ़ने वाले आंखों के दबाव (acute angle closure glaucoma) जैसी स्थितियों में सही समय पर इलाज से दृष्टि यानी नजर को बचाने या सुधारने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इलाज का रिजल्ट बीमारी की गंभीरता और आंख के अंदर हुए नुकसान पर निर्भर करता है।
साल 2018 में eBioMedicine जर्नल में प्रकाशित रिसर्च पेपर के अनुसार, आंखों के मोतियाबिंद का असर केवल नजर पर ही नहीं, बल्कि दिमाग के काम करने के तरीके और उसकी संरचना पर भी पड़ता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन (सर्जरी) से दृष्टि यानी नजर में सुधार होने के बाद, मरीजों के दिमाग के उन हिस्सों के फंक्शन और संरचना में भी सुधार देखा गया जो देखने और सोचने से जुड़े हैं। सर्जरी के कुछ महीनों बाद ये बदलाव ठीक होकर हेल्दी लोगों के लेवल पर पहुंच गए। इससे यह साबित होता है कि आंख और दिमाग आपस में गहराई से जुड़े हैं।
Can loss of vision be restored
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किन कारणों से आंखों की रोशनी स्थायी रूप से जा सकती है?
ग्लूकोमा स्पेशलिस्ट डॉ. शिबल भारतीय बताती हैं कि ग्लूकोमा में आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है। एक बार इसमें स्थायी नुकसान हो जाए, तो खोई हुई रोशनी वापस लाना आमतौर पर संभव नहीं होता। हालांकि, समय पर इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोकने और बची हुई दृष्टि को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। इसी तरह, डायबिटीज के कारण रेटिना को नुकसान, रेटिना का अलग हो जाना या ऑप्टिक नर्व को गंभीर चोट लगना भी आंखों की रोशनी जाने का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में इलाज से सुधार संभव है, लेकिन देरी होने पर स्थायी नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।
Glaucoma Research Foundation में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, हमारे शरीर की परिधीय नसें (peripheral nerves), जैसे हाथ की नसें, चोट लगने पर ठीक हो सकती हैं लेकिन ऑप्टिक नर्व और रीढ़ की हड्डी (spinal cord) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) का हिस्सा हैं, जो चोट लगने के बाद दोबारा ठीक नहीं हो सकतीं। यही कारण है कि रीढ़ की चोट से होने वाले लकवे की तरह ग्लूकोमा में गया हुआ विजन हमेशा के लिए स्थायी रहता है, क्योंकि इस एरिया की सेल्स का वातावरण पुनर्जनन (regeneration) को रोकता है।
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अचानक आंखों से कम दिखने लगे तो क्या करें?
डॉ. शिबल भारतीय के अनुसार, अगर अचानक एक या दोनों आंखों से कम दिखाई देने लगे, नजर के सामने पर्दा-सा आए, रोशनी की चमक दिखे या बहुत सारे काले धब्बे दिखाई देने लगें, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। अचानक नजर कम होना आंखों की गंभीर समस्या या स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी में डॉक्टर से सलाह लें। घरेलू नुस्खे आजमाने, बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप डालने या अपने आप ठीक होने का इंतजार करने से बचें।
निष्कर्ष
आंखों की खोई रोशनी वापस आ सकती है या नहीं, इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। मोतियाबिंद जैसी कुछ स्थितियों में इलाज से नजर में काफी सुधार हो सकता है, जबकि ऑप्टिक नर्व को स्थायी नुकसान होने पर आंखों की रोशनी वापस लाना मुश्किल होता है। इसलिए नजर में किसी भी तरह का बदलाव होने पर समय पर ऑप्थल्मोलॉजिस्ट से जांच कराना सबसे जरूरी है। खासतौर से अचानक रोशनी कम होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि कुछ मामलों में इलाज में देरी से आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
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FAQ
क्या आंखों की रोशनी कम होने पर हमेशा मोटा चश्मा लगाना पड़ता है?
हर मामले में मोटा चश्मा लगाने की जरूरत नहीं होती। नजर कमजोर होने का कारण जानने के लिए आंखों की जांच जरूरी है। कुछ समस्याओं में चश्मा मदद करता है, जबकि अन्य में अलग इलाज की जरूरत हो सकती है।क्या गाजर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ाती है?
गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है, जिससे शरीर विटामिन A बनाता है। यह आंखों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन केवल गाजर खाने से चश्मे का नंबर खत्म नहीं होता।क्या आंखों की सर्जरी के बाद दोबारा नजर कमजोर हो सकती है?
कुछ मामलों में सर्जरी के बाद भी नजर कमजोर हो सकती है। इसकी वजह आंखों की दूसरी बीमारी, रेटिना की समस्या या सर्जरी के बाद होने वाली कुछ समस्याएं हो सकती हैं।
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Oct 14, 2026 12:02 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Shibal Bhartiya
