Wed Oct 7, 2026 | 09:35 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

World Sight Day 2026: क्या चश्मा लगाने से आंखों की रोशनी कम होती है? डॉक्टर से जानें सच्चाई

अगर किसी की आंखें कमजोर हो जाती है, तो वे चश्मे लगाने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि चश्मे लगाने से नजर और ज्यादा कमजोर हो जाएगी। क्या सच में ऐसा होता है? इसे जानने के लिए यह लेख जरूर पढ़ें।
World Sight Day 2026: क्या चश्मा लगाने से आंखों की रोशनी कम होती है? डॉक्टर से जानें सच्चाईWorld Sight Day 2026: क्या चश्मा लगाने से आंखों की रोशनी कम होती है? डॉक्टर से जानें सच्चाई

‘अगर एक बार चश्मा लगा लिया, तो नजर और कमजोर हो जाएगी…’
‘चश्मे लगते ही आंखें इसकी आदी हो जाएगी, फिर बिना चश्मे के देख नहीं पाओगे’
जब आंखों की रोशनी कमजोर होती है, तो लोग इसी सोच की वजह से चश्मा लगवाने से कतराते हैं। कई बार तो लोग कई सालों तक सिर्फ इसी वजह से चश्मा नहीं लगाते। आमतौर पर जब बच्चे के चश्मा लगवाना होता है, तो उन्हें चिंता रहती है कि अगर बच्चे ने चश्मा लगाना शुरू कर दिया, तो उसकी आंखों की रोशनी और कमजोर हो जाएगी। क्या सच में चश्मा लगाने से आंखें और कमजोर हो जाती हैं? World Sight Day के मौके पर Dr. Purendra Bhasin, Opthamologist, Founder & Director, Ratan Jyoti Netralaya, Gwalior से बात की। उन्होंने बताया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। चश्मा आंखों को कमजोर नहीं करता, बल्कि यह आंखों में मौजूद रिफ्रैक्टिव एरर को ठीक करता है और चीजों को साफ देखने में मदद करना है।

क्या चश्मे का नंबर बढ़ सकता है?

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “अक्सर लोग आकर बताते हैं कि नजर कमजोर होने के बाद भी बिना चश्मे के देखने या फोकस करने से आंखों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और चश्मा नहीं लगाना पड़ता। यह सोच बिल्कुल गलत है, जबकि नजर कमजोर होने पर चश्मा न लगाने से काम करने की क्षमता कम होती है और बच्चों को तो फोकस करने या सीखने-पढ़ने में दिक्कत हो सकती है। हालांकि, कुछ लोगों का समय के साथ चश्मे का नंबर बदल सकता है, लेकिन इसका कारण गलत तरीके से चश्मा पहनना होता है। इसलिए चश्मा पहनने वाले लोगों को समय-समय पर आंखों का चेकअप कराते रहना चाहिए।”

जर्नल क्या कहता है?

Cleveland Clinic के मुताबिक, चश्मा पहनने से आंखें खराब नहीं होती, बल्कि यह आंखों पर पड़ने वाले तरीके को बदलकर विजन को सुधारती है। चश्मा पहनने से ये समस्याएं ठीक करने में मदद मिलती है।

  • मायोपिया - अगर किसी को पास की चीजें साफ दिखना, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देना।
  • हाइपरमेट्रोपिया - दूर की चीजें साफ दिखना, लेकिन पास की चीजें धुंधली दिखना।
  • धुंधला दिखना - किसी भी दूरी पर चीजें स्पष्ट न दिखना या धुंधली दिखाई देना।
  • पढ़ने में परेशानी होना - उम्र के साथ पास की चीजें पढ़ने या फोकस करने में दिक्कत होना।

चश्मा लगाने के बाद बिना चश्मे के धुंधला क्यों दिखता है?

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “अगर किसी व्यक्ति को मायोपिया, हाइपरमेट्रोपिया या एस्टिग्मैटिज्म है, तो उसकी आंखें रोशनी को रेटिना पर सही तरीके से फोकस नहीं कर पातीं। सही नंबर का चश्मा इस फोकस को बेहतर करने में मदद करता है, जिससे सामने की चीजें साफ दिखाई देती हैं। अब अगर वही व्यक्ति चश्मा उतार देता है, तो दोबारा धुंधला दिखाई देने लगता है। इसका मतलब यह नहीं है कि चश्मे ने आंखों को कमजोर कर दिया। असल में, आंखों में मौजूद रिफ्रैक्टिव एरर अभी भी वहीं है। इसलिए चश्मा उतारने के बाद धुंधला दिखना आदत की वजह से नहीं होता।”

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गलत चश्मा पहनने के नुकसान

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “अक्सर लोग कई सालों तक एक ही चश्मा पहने रखते हैं या फिर किसी दूसरे का चश्मा पहन लेते हैं। इस वजह से व्यक्ति को साफ दिखाई नहीं देता और वह चीजों को देखने के लिए बार-बार आंखें सिकोड़कर या ज्यादा जोर लगाकर देखता है। इससे आंखों में थकान या स्ट्रेन महसूस हो सकता है। इससे लोगों को सिरदर्द की समस्या भी हो सकती है।”

Cleveland Clinic के मुताबिक, गलत नंबर का चश्मा पहनने से आंखों को प्रभावित कर सकता है और असहज महसूस करा सकता है। व्यक्ति को ये लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि, अगर नया चश्मा बनाया है, तो शुरुआत में कुछ ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यह कुछ समय के लिए ही होते हैं।

  • आंखों में स्ट्रेस या थकान
  • सिरदर्द या माइग्रेन
  • धुंधला दिखाई देना
  • चक्कर आना

आंखों की जांच कब करानी चाहिए?

Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार धुंधला दिखाई देता है, सिरदर्द, आंखों में थकान या किसी चीज को साफ देखने के लिए आंखें सिकुड़ने पड़ती हैं, तो आंखों का चेकअप कराना बहुत जरूरी है। अगर कोई किताब को बहुत पास से पढ़ने की कोशिश करता है या फिर दूर से टीवी देखना मुश्किल लगता है, तो समय पर आंखों की जांच कराकर सही नंबर का चश्मा लगवा लेना चाहिए।

डॉक्टर की सलाह

Dr. Purendra Bhasin का कहना, “अगर आंखों से जुड़ी कोई भी समस्या है, तो समय पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए और खासतौर पर बच्चों में आंखों की समस्या को लेकर लापरवाही करना ठीक नहीं है। अगर बच्चे को साफ दिखाई नहीं दे रहा है और वह लगातार चश्मा नहीं पहन रहा, तो उसकी लेजी आई यानी एम्ब्लियोपिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। visual development प्रभावित हो सकती है। इसलिए बच्चे को चश्मा पहनने से सिर्फ इसलिए न रोकें कि उसकी आंखें चश्मे की आदी हो जाएंगी।”

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निष्कर्ष
चश्मा पहनने से आंखें और ज्यादा कमजोर नहीं होती है, बल्कि इससे व्यक्ति को देखने में मदद मिलती है। अगर चश्मा लगाने के बाद नजर कमजोर होती है, तो इसका कारण गलत तरीके से चश्मा पहनना हो सकता है या डाइट और लाइफस्टाइल की समस्या हो सकती है। इसलिए अगर डॉक्टर ने बच्चे को चश्मा पहनने की सलाह दी है, तो उसे बताए गए तरीके से पहनाना ज्यादा जरूरी है।

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FAQ

  • क्या 'ब्लू कट' चश्मा डिजिटल स्क्रीन से आंखों को पूरी तरह सुरक्षित रखता है?

    ब्लू कट लेंस स्क्रीन की हानिकारक नीली रोशनी को रोकते हैं, जिससे आंखों की थकान में आराम मिलता है। लेकिन केवल ब्लू कट चश्मा काफी नहीं है; आंखें झपकाना और पर्याप्त दूरी बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
  • क्या धूप का चश्मा पहनना भी आंखों की रोशनी बचाने के लिए जरूरी है?

    UV-A और UV-B प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस आंखों को सूरज की पराबैंगनी किरणों से बचाते हैं, जो कम उम्र में मोतियाबिंद और मैकुलर डिजनरेशन का मुख्य कारण बनती हैं।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 07, 2026 19:23 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Oct 07, 2026 19:23 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Purendra Bhasin