छोटे बच्चों की आंखें, आजकल बड़े लोगों की तरह जल्दी-जल्दी खराब हो रही हैं। दरअसल, Dr. Shreya Gupta, Consultant - Ophthalmology, Sri Balaji Action Medical Institute, Delhi कहती हैं कि बच्चों में चश्मा लगने की उम्र कम होने की एक बड़ी वजह है उनका लाइफस्टाइल जिसमें स्क्रीन टाइम ज्यादा है और खेले कूद कम। इसके अलावा छोटे बच्चों की आंखों पर चश्मा लगने के कई अन्य कारण भी हैं, जानते हैं इस बारे में विस्तार से। साथ ही जानेंगे डिजिटल स्क्रीन और मोबाइल का बच्चों की आंखों पर क्या प्रभाव हो रहा है।
छोटे बच्चों की आंखों पर चश्मा लगने के मुख्य कारण
डॉ. श्रेया शर्मा कहती हैं कि बच्चों में कम उम्र में चश्मा लगने के मामले अब पहले की तुलना में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण बच्चों की बदलती जीवनशैली है। आज बच्चे पढ़ाई के अलावा मोबाइल, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी पर भी काफी समय बिताते हैं। लंबे समय तक नजदीक से स्क्रीन देखने और लगातार पढ़ने की आदत आंखों पर दबाव बढ़ा सकती है।
डिजिटल स्क्रीन और मोबाइल का बच्चों की आंखों पर प्रभाव
डिजिटल स्क्रीन और मोबाइल की वजह से बच्चों का बाहर खेलने और नेचुरल रोशनी में समय बिताना कम हुआ है, जो मायोपिया यानी दूर की चीजें धुंधली दिखाई देने की समस्या से जुड़ा पाया गया है। हालांकि, हर बच्चे में चश्मे की जरूरत का कारण एक जैसा नहीं होता और आनुवंशिक कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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बच्चों की आंखों को स्वस्थ रखने के लिए सही आहार
American Academy of Ophthalmology के अनुसार बच्चों की आंखों को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे-
- सबसे पहले अपने बच्चों को हरी सब्जियां खिलाएं क्योंकि उनमें ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन होता है जो कि आंखों के लिए बेहद जरूरी एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करते हैं।
- इसके बाद अपने बच्चे को मछली खिलाएं जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है।
- विटामिन ए से भरपूर शकरकंद और गाजर को डाइट में शामिल करें और अपने बच्चों को इनसे तरह-तरह की चीजें बनाकर खिलाएं।
- इसके अलावा विटामिन सी से भरपूर फूड्स को खाएं जैसे कि संतरा, मैंडरिन, ग्रेपफ्रूट और नींबू। इसके अलाव आड़ू, लाल शिमला मिर्च, टमाटर और स्ट्रॉबेरी को भी डाइट में शामिल करें।
- डॉ. श्रेया शर्मा कहती हैं कि बच्चे हों या बड़े सभी के लिए विटामिन ई से भरपूर फूड्स बेहद जरूरी हैं ऐसे में रोजाना सुबह अपने बच्चों को बादाम और अखरोट भिगोकर खिलाएं। इसके अलावा उन्हें एवोकाडो और सूरजमुखी के बीजों को स्नैक्स के रूप में खिलाएं।
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आंखों की सुरक्षा के लिए 20-20-20 नियम का पालन करें
डॉ. श्रेया शर्मा कहती हैं कि स्क्रीन या पढ़ाई के बीच नियमित अंतराल पर ब्रेक देना, किताब और आंखों के बीच उचित दूरी रखना तथा रोज कुछ समय बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना चाहिए और लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से बचाना चाहिए। इसके अलावा अभी से ही हर 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद, कम से कम 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने की ट्रेनिंग दें।
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डॉक्टर की सलाह: बच्चों की आंखों की जांच कब कराएं
अगर आपका बच्चा टीवी या मोबाइल बहुत पास से देखने लगे, दूर की चीजों को देखने के लिए आंखें सिकोड़ता हो, बार-बार सिरदर्द की शिकायत करे या स्कूल में बोर्ड देखने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे की आंखों की जांच कराना जरूरी है, ताकि नजर की समस्या का समय रहते पता लगाकर उचित चश्मा या उपचार दिया जा सके।
निष्कर्ष:
अंत में डॉ. श्रेया शर्मा कहती हैं कि अपने बच्चों की आंखों का अभी से ख्याल रखें। हर 6 महीने पर आई टेस्ट करवाएं और अगर आपका बच्चा किसी बात की शिकायत करता है तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं क्योंकि ध्यान न देने पर समय के साथ दिक्कत बढ़ सकती है।
FAQ
आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?
आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो मछली खाएं और अगर नहीं खाते तो अखरोट खाएं। इसके अलावा विटामिन ए से भरपूर गाजर खाएं जो कि आंखों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।कौन सा फल खाने से आंखों की रोशनी तेज होती है?
विटामिन सी से भरपूर फल जैसे संतरा और मौसंबी खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
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Sep 30, 2026 20:11 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr Shreya Gupta
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