Wed Sep 30, 2026 | 01:47 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajat Grover , Paediatrician & Neonatologist - Cloudnine Hospital, East Delhi

शिशु की मालिश कितनी देर करनी चाहिए? डॉक्टर से जानें सही समय और सही तरीका

शिशु की मालिश काफी समय तक करना आम है, लेकिन क्या सच में शिशु की ज्यादा देर तक मालिश करने से उसे ज्यादा पोषण मिलता है? डॉक्टर ने इस सवाल का जवाब विस्तार से बताया है।
शिशु की मालिश कितनी देर करनी चाहिए? डॉक्टर से जानें सही समय और सही तरीकाशिशु की मालिश कितनी देर करनी चाहिए? डॉक्टर से जानें सही समय और सही तरीका

‘शिशु की मालिश जितनी देर तक होगी, उतना ही उसे फायदा मिलेगा’ इसी सोच के चलते भारतीय घरों में शिशु की मालिश काफी देर तक की जाती है। माना जाता है कि देर तक मालिश करने से तेल का पोषण शिशु के शरीर में चला जाता है और इससे शिशु की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती है। क्या सच में ऐसा होता है और शिशु की मालिश कितनी देर करें? इन सवालों के बारे में Dr. Rajat Grover, Senior Pediatrician and Neonatologist, Cloudnine Group of Hospitals, Patparganj कहते हैं कि शिशु की मालिश करते समय एक बात समझना जरूरी है कि यह कोई ऐसा काम नहीं है कि जिसमें ज्यादा देर या ज्यादा दबाव का मतलब ज्यादा फायदा हो। शिशु की स्किन और मांसपेशियां काफी नाजुक होती हैं। इसलिए शिशु की मालिश करते समय सही तरीका होना चाहिए, ताकि शिशु सहज महसूस कर सके।

शिशु की मालिश कितनी देर तक करनी चाहिए?

Dr. Rajat Grover कहते हैं, “अगर शिशु स्वस्थ और सही समय पर जन्म लिया है, तो उस शिशु की मालिश शुरुआत में करीब 10 से 15 मिनट तक की जा सकती है। अगर बच्चा इस दौरान आराम से है और मालिश पसंद कर रहा है, तो धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इसमें यह जरूर जोड़ना चाहूंगा कि अगर शिशु को आराम मिल रहा है और रो नहीं रहा, तो इसे धीरे-धीरे कुछ समय के लिए और बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अगर मालिश के दौरान बच्चा रोने लगे, उसका शरीर अकड़ने लगे, वह बार-बार हाथ-पैर खींचने लगे या उसकी स्किन लाल दिखाई देने लगे, तो मालिश रोक देना बेहतर है।”

शिशु की मालिश करते समय पेरेंट्स को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?

Dr. Rajat Grover ने कहा, “अक्सर पेरेंट्स मेरे पास शिकायत लेकर आते हैं कि शिशु मालिश कराते समय बहुत रोता है, तो इसका कारण है कि लोग मालिश करते समय उसकी स्किन पर तेज हाथों से मालिश करने लगते हैं। इसलिए मालिश करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. मालिश हल्के हाथ से करें

Dr. Rajat Grover ने बताया कि जब पेरेंट्स तेल या मॉइस्चराइजर लगाकर शिशु की स्किन रगड़ने लगते हैं, तो इससे उसकी स्किन पर लाल दाने या लाल हो जाती है। इससे शिशु को जलन भी हो सकती है। इसलिए मालिश हल्के हाथों से करनी चाहिए। कई लोग शिशु को बहुत जोर से मालिश यह सोचकर करते हैं कि इससे शिशु की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होंगी, लेकिन इससे शिशु को दर्द हो सकता है। इसलिए शिशु पर बहुत ज्यादा प्रेशर नहीं देना चाहिए और खासतौर पर नाभि के आस-पास बहुत ध्यान रखना चाहिए।

2. शिशु के जागने पर मालिश करें

Dr. Rajat Grover का कहना, “मैंने कई पेरेंट्स को देखा है, जो शिशु को सोते हुए मालिश करने लगते हैं या शिशु को पहले मालिश करके दूध पिलाना पसंद करते हैं। शिशु की मालिश तभी करनी चाहिए, जब वह जाग रहा हो और उसे भूख न लगी हो। अगर शिशु को नींद आ रही है, तो उसे सोने दें। ऐसे समय में जबरदस्ती उसकी मालिश और नहलाने की जल्दीबाजी न करें।”

3. दूध पिलाने के तुरंत बाद मालिश न करें

Dr. Rajat Grover के अनुसार, शिशु को दूध पिलाने के बाद तुरंत मालिश न करें। उस समय शिशु के डाइजेशन सिस्टम को दूध पचाने का समय देना चाहिए, क्योंकि पेट पर दबाव डालने पर शिशु को पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। मालिश के लिए ऐसा समय चुनें, जब बच्चा न तो बहुत भूखा हो और न ही बहुत नींद में हो। कमरे का तापमान भी सही होना चाहिए।

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4. खुद की साफ-सफाई रखें

Dr. Rajat Grover का कहना, “मालिश करते समय पेरेंट्स को सबसे पहले अपने हाथ अच्छी तरीके से साफ करने चाहिए और उन्हें हल्का गर्म करने चाहिए। कई पेरेंट्स यह सोचते हैं कि इसके बाद शिशु को नहलाना ही है, तो हाथ और अपने कपड़ों पर ध्यान ही नहीं देते। गंदे कपड़ों या हाथों से मालिश करने पर शिशु को संक्रमण का रिस्क हो सकता है।”

5. तेल का सही चुनाव करें

Dr. Rajat Grover ने बताया कि नया तेल लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि शिशु की स्किन पर इसका असर पता चल सके। तेल का चुनाव डॉक्टर से पूछकर करें। शिशु को बुखार है, स्किन इंफेक्शन, चोट, सूजन या किसी दूसरी बीमारी से परेशान है, तो उस समय खुद से मालिश शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। इसके अलावा, तेल लगाते समय आंखों, मुंह, नाक और जननांगों के आसपास के हिस्सों पर लगाने से बचना चाहिए।

शिशु की मालिश करने का सही तरीका

NCT के अनुसार, मालिश करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • मालिश शुरू करने से पहले हाथों में थोड़ा तेल लेकर शिशु के कानों के पास अपनी हथेलियों को रगड़ें। अगर शिशु का मूड नहीं होगा, तो वह रोकर मना कर सकता है।
  • मालिश पैर से शुरू करें और शिशु की मालिश ऊपर से नीचे की ओर करें।
  • तलवों और उंगलियों की मालिश करें।
  • शिशु की हथेली पर गोल-गोल घुमाते हुए हल्की मालिश की जा सकती है।
  • मालिश को पूरा करते हुए आखिर में टखने से ऊपर जांघ की ओर हाथ ले जाएं।
  • मालिश करते समय पेट, नाभि, आंख और जननांगों का खास ध्यान रखें।

निष्कर्ष
Dr. Rajat Grover पेरेंट्स को सलाह देते हैं कि शिशु को आराम देने के लिए मालिश की जाती है। इसलिए उसके शरीर पर बहुत ज्यादा प्रेशर न डालें। हल्के हाथों से शिशु के मूड के अनुसार ही मालिश करें। शिशु की मालिश 10 से 15 मिनट करना काफी होता है।

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FAQ

  • दिन में शिशु की कितनी बार मालिश की जा सकती है?

    दिन में एक से दो बार मालिश करना काफी है। पहली बार सुबह नहलाने से 15 से 20 मिनट पहले और दूसरी बार रात को सोने से पहले की जा सकती है। 
  • क्या मालिश के बाद तेल को शरीर पर छोड़ देना चाहिए या नहलाना जरूरी है?

    मालिश के 15 से 20 मिनट बाद शिशु को हल्के गुनगुने पानी से नहलाना या स्पंज करना जरूरी है। स्किन पर रुका हुआ तेल धूल-मिट्टी चिपकाकर रोमछिद्रों को बंद कर सकता है, जिससे घमौरियां या दाने हो सकते हैं।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 30, 2026 12:18 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Rajat Grover