भारत के हर घर में बच्चे की मालिश करना अच्छा माना जाता है, लेकिन सवाल हमेशा यही होता है कि मालिश के लिए तेल कौन सा इस्तेमाल किया जाना चाहिए? कई घरों में बच्चों के लिए सरसों का तेल बेहतर माना जाता है, तो कुछ घरों में देसी घी इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इस बारे में Dr. Chetan Sharma, Sr. Ayurveda Consultant, Sarvodaya Hospital ने बताया कि आयुर्वेद में अभ्यंग यानी तेल से मालिश को शरीर और त्वचा की देखभाल के लिए बहुत जरूरी माना गया है। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है कि तेल की मालिश करते समय शिशु की उम्र, त्वचा की स्थिति और तेल उसे कितना सूट करता है, इन बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
देसी घी या सरसों का तेल: कौन सा बेहतर है?
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “अगर सिर्फ सरसों के तेल या देसी घी में से ही चुनाव करना होगा, तो सरसों का तेल मेरी पहली पसंद नहीं है। हालांकि, देसी घी के मामले में आयुर्वेद इसे स्निग्ध और पोषक तत्वों से भरपूर मानता है, लेकिन शिशु की त्वचा पर घी की मसाज करना कितना सही है? इसका अभी ज्यादा डेटा या स्टडी उपलब्ध नहीं है। इसलिए बच्चे की मालिश करने से पहले डॉक्टर की जरूर सलाह लें, क्योंकि शिश की त्वचा बहुत नाजुक होती है, ऐसे में तेल या घी में से बेहतर क्या हो सकता है? यह डॉक्टर बेहतर बता सकते हैं। इसके साथ ही बच्चे पर किसी भी नए तेल की मालिश करने से पहले पैच टेस्ट किया जा सकता है।”
Baby massage ghee vs mustard oil
रिसर्च क्या कहती है?
Indian Academy of Pediatrics Guidelines for Pediatric Skin Care के अनुसार, तेल मालिश के जरिए शिशु को पोषण और गर्मी मिलती है और यह बच्चों का वजन बढ़ाने में मदद करता है। बिना तेल के मालिश किए जाने वाले बच्चों के मुकाबले तेल से मालिश किए गए शिशुओं में तनावपूर्ण व्यवहार और कोर्टिसोल का स्तर कम देखा गया। गाइडलाइंस के मुताबिक, शिशुओं को सरसों के तेल की मालिश करने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे स्किन में जलन और एलर्जी होने का रिस्क बढ़ सकता है।
डॉक्टर ने कौन सा तेल इस्तेमाल करने की सलाह दी?
Dr. Chetan Sharma ने कहा, “आयुर्वेद के अनुसार, मैं पेरेंट्स को सलाह दूंगा कि जन्म के बाद पहले 28 दिन शिशु का बहुत ध्यान रखें, क्योंकि इस उम्र में स्किन बैरियर पूरी तरह से मैच्योर नहीं होता. इसलिए ज्यादा तेल लगाने से कोई फायदा नहीं मिलेगा। इसके अलावा, मैं उम्र के हिसाब से कुछ तेल लगाने की सलाह दे रहा हूं, लेकिन इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
शिशु की उम्र |
डॉक्टर की सलाह |
0 – 1 महीना |
सरसों का तेल और देसी घी का इस्तेमाल न करें। सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही किसी भी तेल की मालिश करें। |
1 – 6 महीने |
नारियल तेल या सूरजमुखी का तेल जैसे हल्के तेल अपनाए जा सकते हैं। सरसों के तेल को रोजाना इस्तेमाल न करें। |
6 – 12 महीने |
अगर बच्चे की स्किन सेहतमंद है, तो हल्की मालिश जारी रखी जा सकती है। नारियल या सूरजमुखी का तेल बेहतर है। घी का इस्तेमाल केवल तभी करें, जब बच्चे की त्वचा इसे अच्छी तरह सहन कर पा रही हो और कोई समस्या न हो। |
1 साल के बाद |
जिन बच्चों की स्किन हेल्दी है, उनकी तेल मालिश जारी रखी जा सकती है। नारियल तेल बेहतर विकल्प हो सकता है। |
एक्जिमा, रैश, संवेदनशील त्वचा |
किसी भी नए तेल का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। |
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बच्चे की मालिश करने के 5 तरीके
Dr. Chetan Sharma नए पेरेंट्स को सलाह देते हैं कि मालिश करते समय इन खास बातों का ध्यान रखें।
- मालिश आराम देने के लिए है, इसलिए बहुत तेज प्रेशर न दें।
- शिशु को बहुत ज्यादा तेल लगाने की जरूरत नहीं है। उसे थोड़ा ही तेल लगाना चाहिए।
- नया तेल लगाने से पहले छोटे हिस्से पर टेस्ट जरूर करें।
- आंख, नाक, मुंह और नाभि पर तेल न लगाएं।
- रैश या एक्जिमा होने सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही तेल का इस्तेमाल करें।
निष्कर्ष
Dr. Chetan Sharma कहते हैं कि नेचुरल होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह शिशु को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती, इसलिए किसी भी तेल को लगाने से पहले छोटा सा पैच टेस्ट जरूर करें। इसके अलावा, शिशु की उम्र और उसकी स्किन को देखते हुए मालिश का तरीका चुनें। अगर किसी तेल से शिशु को एलर्जी, दाने या रैशेज दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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FAQ
मालिश करने का सबसे सही समय और तरीका क्या है?
नहलाने से 15 से 20 मिनट पहले या सोने से ठीक पहले मालिश का सही समय है। हाथ-पैरों की मालिश नीचे से ऊपर और पेट पर घड़ी की सुई की दिशा में हल्के हाथों से करें।पेट पर मालिश करने से गैस और कोलिक में कैसे राहत मिलती है?
पेट पर क्लॉकवाइज मालिश और बच्चे के पैरों को साइकिल की तरह चलाने से आंतों में फंसी गैस बाहर निकलती है और पेट दर्द से तुरंत राहत मिलती है।
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Sep 25, 2026 20:15 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetan Sharma
