Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Karuna Malhotra , Cosmetologist, Skin specialist & Homoeopath Physician

बच्चों और शिशुओं में एक्जिमा क्यों होता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण और शुरुआती लक्षण

Eczema In Babies And Children: बच्चों और शिशुओं में एक्जिमा होने के पीछे कई कारण हैं, जैसे फैमिली हिस्ट्री, इम्यून सिस्टम का अधिक संवेदनशील होना और फिलाग्रीन प्रोटीन की कमी। जानें, इसके लक्षणों के बारे में तथा पैरेंट्स इस मामले में क्या करें।

एक्जिमा स्किन से जुड़ी परेशानी है, जिसमें मरीज को तेज खुजली, जलन और त्वचा का ड्राई होना जैसी समस्याएं हो जाती हैं। क्या आप जानते हैं कि ऐसा सिर्फ वयस्कों के साथ ही नहीं, बल्कि शिशुओं और छोटे बच्चों के साथ भी हो सकता है। सवाल है, छोटे बच्चों में यह समस्या क्यों होती है? विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि जीन्स या इम्यून सिस्टम के ओवररिएक्टिव होने के कारण हो सकता है। आइए, इस लेख में राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से आगे जानते हैं कि इन शिशुओं और बच्चों में यह समस्या होने के और क्या-क्या कारण हैं तथा इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं।

बच्चों-शिशुओं में एक्जिमा होने के कारण

why do babies and children get eczema 1 (13)

  • पारिवारिक इतिहास: The Journal Of Pediatrics में प्रकाशित एक रिव्यू के अनुसार, अगर किसी परिवार में पहले से ही एक्जिमा की समस्या है, तो संभवतः बच्चे को भविष्य में होने का जोखिम बना रहता है। विशेषकर, जिन परिवारों में एलर्जी, अस्थमा और हे फीवर का इतिहास है, उनमें एक्जिमा का रिस्क बढ़ जाता है।
  • फिलाग्रिन प्रोटीन की कमी: फिलाग्रिन एक ऐसा प्रोटीन है, जो हमारी स्किन के लिए बहुत जरूरी है। यह हमारी त्वचा की ऊपरी परत को मजबूती प्रदान करता है, नमी को अंदर लाॅक करता है और बाहरी बैक्टीरिया तथा प्रदूषण से हमारा बचाव करता है। कुछ छोटे बच्चों और शिशुओं में इस प्रोटीन का निर्माण प्राकृतिक रूप से ही कम होता है। ऐसे में उनकी प्रोटेक्टिव लेयर कमजोर हो जाती है, त्वचा में सूखापन, दरारें और इंफेक्शन आसानी से होने लगता है।
  • संवेदनशील इम्यून सिस्टम: Childhood Atopic Eczema में प्रकाशित एक रिव्यू के अनुसार कुछ बच्चों में इम्यून सिस्टम जन्म से ही ओवररिएक्टिव और सामान्य बाहरी तत्वों के प्रति भी अति-संवेदनशील प्रतिक्रिया देता है। होता है। इसकी वजह से बच्चे जब भी त्वचा के संपर्क में आने वाली सामान्य चीजों (जैसे धूल, साबुन, परागकण या ठंडी हवा) को भी हानिकारक समझ लेता है, तो इम्यून सिस्टम तुरंत प्रतिक्रिया करता है। नतीजतन, त्वचा में अंदरूनी सूजन, लालिमा, खुजली और जलन जैसीस समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जो कि एक्जिमा को भी ट्रिगर करती हैं।

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बच्चों-शिशुओं में एक्जिमा के लक्षण

छोटे बच्चों (0 से 6 महीने)

  • स्किन में ड्राईनेसः छोटे बच्चों के सिर, माथे और गालों पर ड्राईनेस होने लगती है और पपड़ीदार चकत्ते दिखाई देने लगते हैं।
  • रिसने वाले लाल चकत्तेः एक्जिमा होने पर त्वचा पर लाल रंग के ऐसे चकत्ते बनने लगते हैं, जिनमें छोटे-छोटे छाले या बुलबुले हो जाते हैं। इनसे हल्का तरल पदार्थ निकल सकता है, जिसमें बाद में पपड़ी जम जाती है।
  • चिड़चिड़ा होनाः छोटे बच्चों को एक्जिमा होने पर उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार खुजली और जलन काफी तेज होती है, जिससे बच्चा रोता रहता है और चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे में वह अच्छी नींद भी नहीं ले पाता है।

बड़े बच्चों में

  • जोड़ों के मोड़ पर चकत्ते का फैलनाः बड़े बच्चों में एक्जिमा के दाने या चकत्ते सिर्फ गाल तक सीमित नहीं रहते हैं। यह शरीर के ज्वाइंट्स के अंदरूनी हिस्सों जैसे कोहनी के अंदरूनी मोड़, घुटनों के पीछे का हिस्सा, कलाई और टखनों पर।
  • खुरदुरी त्वचा होनाः एक्जिमा के कारण बच्चों को लगातार और लंबे समय तक खुजली बनी रहती है, जिससे प्रभावित त्वचा मोटी, सख्त, चमड़े जैसी और खुरदरी हो जाती है।

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पैरेंट्स क्या करें?

बच्चे एक्जिमा जैसी स्थिति को ठीक से समझ नहीं पाते हैं। ऐसे में पैरेंट्स की जिम्मेदारी हो जाती है कि वे अपने बच्चे की प्रॉपर देखभाल करें। इसके लिए पैरेंट्स यहां बताए गए टिप्स को अपनाएं-

  1. स्किन केयर करेंः बच्चे की स्किन की अच्छी देखभाल करें। एक्जिमा में खुजली से बचने के लिए जरूरी है कि आप समय-समय पर प्रभावित हिस्से पर मॉइश्चराइजर लगाएं। ध्यान रखें कि यह मॉइश्चराइजर फ्रेग्रेंस फ्री हो और दिन में कम से दो से तीन बाद अप्लाई करें। Cochrane Library के अनुसार, एक्जिमा जैसी कंडीशन में आप माॅइश्राइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं और यह काफी फायदेमंद भी है। 
  2. सादे पानी से नहलाएंः एक्जिमा से प्रभावित बच्चों के शरीर में केमिकल युक्त साबुन आदि न लगाएं और न ही उन्हें गर्म पानी से नहलाएं। उन्हें नियमित रूप से सादे पानी से नहलाएं और बिना सेंट वाले क्लींजर का उपयोग करें।
  3. सूती के कपड़े पहनाएंः एक्जिमा से पीड़ित बच्चों को सूती के कपड़े ही पहनाएं। ध्यान रखें कि कई फैब्रिक सही नहीं होती हैं। विशेषकर, सिंथेटिक के कपड़े के कारण त्वचा में खुजली बढ़ सकती है, जो कि शिशु या छोटे बच्चे के लिए सही नहीं होगा।
  4. डॉक्टर को दिखाएंः बच्चे को एक्जिमा जैसी संवेदनशील त्वचा संबंधी समस्या हो, तो इसका ट्रीटमेंट घर में करने की कोशिश न करें। इस संबंध में जरूरी है कि आप नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाएं। उनकी दी हुई दवा बच्चों को समय पर दें। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर लो-पेटेंसी वाले स्टेरॉयड क्रीम दे सकते हैं। उनकी दी हुई सलाह के हिसाब से बच्चे पर इस तरह की क्रीम अप्लाई करें।

निष्कर्ष

बच्चों को भी एक्जिमा हो सकता है और इसका मुख्य कारण परिवार का इतिहास हो सकता है। इसके लक्षणों के तौर पर बच्चों को जलन, खुजली और त्वचा का पपड़ीदार होना शामिल है। ऐसे में पैरेंट्स की जिम्मेदारी बन जाती है कि वे समय पर बच्चे का ट्रीटमेंट करवाएं और डॉक्टर की दी हुई सलाह को फाॅलो करें। ध्यान रखें कि एक्जिमा जैसी स्थिति को कभी-भी खुद से मैनेज करने की कोशिश न करें। इसमें डॉक्टर की राय महत्वपूर्ण होती है।

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FAQ

  • क्या नहाने के पानी में ओटमील मिलाना एक्जिमा से पीड़ित बच्चों की त्वचा के लिए फायदेमंद होता है?

    विशेषज्ञों के अनुसार ओटमीटी में प्राकृतिक एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इसे गुनगुने पानी में मिलाकर नहलाने से बच्चे की त्वचा की खुजली, रेडनेस और सूखेपन में कमी आती है।
  • एक्जिमा से पीड़ित शिशु के कपड़े किस तह के डिटर्जेंट से धोने चाहिए?

    हाइपोएलर्जेनिक, डाई-फ्री और फ्रेग्रेंस-फ्री डिटर्जेंट से इन बच्चों के कपड़े धोने चाहिए। कपड़े धोने के बाद उन्हें अच्छी तरह खंगाले और अच्छी धूप भी दिखाएं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Aug 19, 2026 17:25 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Karuna Malhotra

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