Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shilpa Aroskar , Head of Department – Paediatrics & Neonatology

जन्म से लेकर 1 साल की उम्र तक बच्चे को Vitamin D देना क्यों जरूरी? डॉक्टर से जानें

डॉक्टर आमतौर पर जन्म के तुरंत बाद से रोजाना 400 IU विटामिन D देने की सलाह देते हैं। दरअसल, ये हड्डियां को हेल्दी रखने के साथ बच्चे के विकास में मददगार है, आइए आगे जानते हैं विस्तार से कि बच्चे को ये क्यों दें?

जन्म के बाद लगभग 1 साल तक के लिए बच्चे को डॉक्टर विटामिन डी देने की सलाह देते हैं। दरअसल, अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को रोजाना 400 IU विटामिन D की जरूरत होती है। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है। इससे बच्चे के शुरुआती समय में हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स जैसी हड्डियों की विकृति हो सकती है और ये उनके विकास को बढ़ावा देता है। इसके अलावा मां का दूध पीने वाले बच्चों के लिए ये कितना जरूरी है? आइए, जानते हैं इस बारे में Dr. Shilpa Aroskar, Paediatrician, Navi Mumbai, Kokilaben Hospital और Dr. Parimala V Thirumalesh, Lead Sr. Consultant - Neonatology & Paediatrics, Aster CMI Hospital, Bangalore

जन्म से ही विटानिन डी क्यों जरूरी है?

Dr. Parimala V Thirumalesh बताती हैं कि जन्म से बच्चों के लिए विटामिन D जरूरी है क्योंकि मां के दूध में विटामिन D बहुत कम मात्रा में होता है, जबकि तेजी से बढ़ रहे उनके शरीर को इस पोषक तत्व की ज्यादा जरूरत होती है। यह शरीर को कैल्शियम और फॉस्फरस सोखने में मदद करता है। ये चीजे हड्डियों और दांतों की सेहत और सामान्य विकास के लिए जरूरी होती हैं। इसके अलावा जन्म से ही विटामिन डी देने से विटामिन D की कमी और रिकेट्स का खतरा कम होता है। इसके अलावा विटामिन डी बच्चों में

  • इम्यूनिटी बढ़ाता है और संक्रामक बीमारियों से बचाव में मदद करता है।
  • ये बड़े होकर बच्चे के मेंटल हेल्थ को भी सही रखने में मददगार है और डिप्रेशन जैसी बीमारियों से भी बचाता है।

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1 साल की उम्र तक बच्चों को कितना दें Vitamin D?

Dr. Shilpa Aroskar बताती हैं कि ज्यादातर, बच्चों के लिए खासकर उन्हें जिन्हें मां का दूध पिलाया जाता है, डॉक्टर  पर जन्म के तुरंत बाद से 1 साल तक रोजाना 400 IU विटामिन डी देने की सलाह देते हैं। यह आमतौर पर पहले साल तक या तब तक जारी रखा जाता है जब तक बच्चे को जरूरत के हिसाब से विटामिन D-युक्त इन्फेंट फॉर्मूला न मिलने लगे। जो बच्चे पूरी तरह से फॉर्मूला दूध पीते हैं और पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी युक्त फॉर्मूला लेते हैं, उन्हें शायद अतिरिक्त सप्लीमेंट की जरूरत न पड़े।

एक साल के बाद बच्चे को कितना विटामिन डी दें?

NHS.UK की ये स्टडी बताती है कि 1 साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चों को रोजाना 10 माइक्रोग्राम विटामिन D की जरूरत होती है। 4 साल से ऊपर के बड़े बच्चों और किशोरों को हर दिन 600 IU विटामिन D की जरूरत होती है। ध्यान रखें कि 1 से 10 साल की उम्र के बच्चों को रोजाना 50 माइक्रोग्राम (2,000 IU) से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। 12 महीने से कम उम्र के शिशुओं को रोजाना 25 माइक्रोग्राम (1,000 IU) से ज्यादा नहीं लेना चाहिए।

विटानिन डी की कमी से क्या होता है?

Dr. Shilpa Aroskar बताती हैं कि जन्म से ही विटामिन डी की कमी बच्चे में रिकेट्स की बीमारी का कारण बन सकता है। इसमें बढ़ती हुई हड्डियां नरम और कमजोर हो जाती हैं। इतना ही नहीं, frontiersin.org journal में प्रकाशित शोध की मानें तो जिन बच्चों को जन्म के बाद के 1 साल तक विटामिन डी नहीं मिलता उन्हें आगे चलकर ऑस्टियोमलेशिया (osteomalacia) की बीमारी हो सकती है।

यही कारण है कि सरकार की भी यही सलाह है कि 1 से 4 साल की उम्र के सभी बच्चों और सभी शिशुओं जब तक कि वे दिन में 500ml से ज्यादा इन्फेंट फॉर्मूला न ले रहे हों तो उन्हें रोजाना विटामिन डी देना चाहिए।

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निष्कर्ष:

इसलिए, माता-पिता को अपने बच्चों के डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए और इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्मूला या सप्लीमेंट में मौजूद विटामिन डी की मात्रा की जांच करनी चाहिए। साथ ही बच्चों को विटामिन D तय रूप और मात्रा में ही दिया जाना चाहिए। माता-पिता को तय मात्रा से ज्यादा विटामिन डी देने से बचना चाहिए क्योंकि विटामिन डी की अधिक मात्रा से नुकसान हो सकता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है और लगभग छह महीने की उम्र में ऊपरी आहार (कॉम्प्लिमेंट्री फूड) लेना शुरू करता है, तो अलग-अलग तरह के खाने से उसे अतिरिक्त पोषक तत्व मिल सकते हैं, लेकिन बच्चे के खाने के तरीके के आधार पर पहले साल में भी विटामिन D सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही यह तय करने के लिए कि सप्लीमेंट कब बंद करना है या उसमें कब बदलाव करना है, बच्चों के डॉक्टर से नियमित जांच करवाना जरूरी है।

Image Credit: Freepik

FAQ

  • विटामिन ए की कमी से कौन सा रोग होता है?

    विटामिन ए की कमी से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है और बच्चों की नजरें कमजोर हो सकती हैं इसलिए जरूरी है कि बच्चों को विटामिन ए भी दें।
  • विटामिन C से कौन से रोग होते हैं?

    विटामिन सी की कमी से स्कर्वी की बीमारी हो सकती है। इसके अलावा इस विटामिन की कमी से इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है, स्किन और मसूड़ों की समस्या हो सकती है और कुछ लोगों को एनीमिया की भी कमी हो सकती है। 

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Pallavi Kumari

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चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 14, 2026 11:52 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Shilpa Aroskar

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