त्वचा की परेशानी जब लंबे समय तक बनी रहे, तो ये सिर्फ शरीर की परेशानी नहीं रह जाती। इसका असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसका कारण यह है कि कई त्वचा रोग जिनके लक्षण शरीर पर सामने से दिख रहे होते हैं, हमारे यहां छूआ-छूत या किसी अन्य दकियानूसी बात से जोड़े जाते हैं। एक्जिमा भी ऐसी ही बीमारी है। कभी तेज खुजली, कभी लाल चकत्ते, कभी त्वचा का सूखकर फट जाना। कई लोग इसे मामूली एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब यह बार-बार उभरने लगे, तब समझ आता है कि मामला गंभीर है।
आसान भाषा में कहें तो एक्जिमा त्वचा की एक क्रॉनिक समस्या है, जिसमें स्किन की ऊपरी परत कमजोर हो जाती है। नमी जल्दी उड़ जाती है और बाहर के एलर्जन या कीटाणु अंदर घुस जाते हैं। इसी वजह से खुजली, जलन, सूजन और कभी-कभी पानी भरने जैसे लक्षण दिखते हैं। एलोपैथी में अक्सर एक्जिमा के लिए स्टेरॉइड क्रीम का सहारा लिया जाता है, लेकिन कई रिसर्च बताती हैं कि लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से साइड इफेक्ट का डर बना रहता है। ऐसे में एक्जिमा के लिए आयुर्वेद का विकल्प ज्यादा सुरक्षित माना जा सकता है। एक्जिमा का आयुर्वेद में इलाज कैसे किया जाता है- इस बारे में जानने के लिए हमने बात की सिरसा हरियाणा के रामहंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा से। आइए जानते हैं उन्होंने हमें क्या बताया।
आयुर्वेद में एक्जिमा को कैसे देखा जाता है?
डॉ श्रेय हमें बताते हैं, “आयुर्वेद में एक्जिमा को 'विचर्चिका' के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्य कारण स्राव है, जिसे पित्त और कफ दोष की गड़बड़ी से जोड़ा जाता है। जब शरीर में पित्त बढ़ता है, तो जलन और लालपन आता है। कफ दोष बढ़ने पर खुजली, रिसाव और मोटी त्वचा की समस्या होती है। इसके साथ ही रक्त की अशुद्धि भी एक बड़ा कारण मानी जाती है।”
आयुर्वेद का फोकस सिर्फ ऊपर से लगाने वाली दवाओं पर नहीं, बल्कि अंदर से शरीर को साफ और संतुलित करने पर होता है। यही वजह है कि इलाज थोड़ा समय लेता है, लेकिन जड़ से राहत देने की कोशिश करता है।
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एक्जिमा का आयुर्वेद में इलाज क्या है?
डॉ श्रेय बताते हैं, “एक्जिमा दो तरह के होते हैं। एक रिसाव वाला एक्जिमा (Weeping Eczema) और दूसरा शुष्क एक्जिमा (Dry Eczema)। आयुर्वेद में दोनों तरह के एक्जिमा के इलाज के लिए अलग औषधियों का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल किया जाता है।”
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रिसाव वाले एक्जिमा का आयुर्वदेिक इलाज (Ayurvedic Treatment of Weeping Eczema)
डॉ श्रेय के अनुसार रिसाव वाला एक्जिमा कफ दोष के कारण होता है और इसके इलाज के लिए आयुर्वेद में निम्न जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता है।
खादिर, मंजीठ, चोबचीनी, गिलोय, पटोलपत्र- इन 5 जड़ी बूटियों को समान मात्रा में पीसकर एक मिश्रण तैयार करते हैं। अब इस तैयार मिश्रण का जितना वजन है, उसकी आधी मात्रा में त्रिफला मिलाकर एक चूर्ण तैयार किया जाता है। मरीज को इसे दिन में तीन बार खाना खाने के आधे घंटे बाद खाने की सलाह दी जाती है।
शुष्क एक्जिमा का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic Treatment of Dry Eczema)
डॉ श्रेय बताते हैं कि ड्राई एक्जिमा कफ और पित्त दोनों दोषों के कारण होता है इसलिए इसके इलाज में कुछ जड़ी बूटियां वही रहती हैं, जो रिसाव वाले एक्जिमा के इलाज में इस्तेमाल होती हैं लेकिन कुछ को बदल दिया जाता है। इसके लिए-
खादिर, मंजीठ, गिलोय, पटोलपत्र, निशोथ और सारिवा- इन 6 जड़ी-बूटियों को समान मात्रा में पीसा जाता है। अब तैयार मिश्रण के मात्रा की आधी मात्रा में त्रिफला मिलाकर पाउडर तैयार करते हैं। इसे भी मरीज को दिन में तीन बार खाना खाने के आधे घंटे बाद खाने क सलाह दी जाती है।
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एक्जिमा में परहेज है जरूरी
डॉ श्रेय बताते हैं कि एक्जिमा की बीमारी में कुछ चीजों का परहेज बहुत जरूरी है। इस दौरान आपको खानपान और लाइफस्टाइल में बहुत सारे बदलावों की जरूरत होती है। जैसे-
- बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और खट्टा खाना कम करें
- काली, लाल और हरी- तीनों तरह की मिर्च का सेवन बंद कर दें
- भोजन सूर्यास्त के बाद न करें
- दही, पनीर और बहुत ठंडी चीजें सीमित मात्रा में लें
- डेयरी प्रोडक्ट्स में घी को छोड़कर बाकी सभी चीजों का परहेज करें
- ज्यादा पानी पिएं ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलें
- तनाव कम करने की कोशिश करें, क्योंकि स्ट्रेस एक्जिमा को बिगाड़ सकता है
एक बात ध्यान रखें कि एक्जिमा का आयुर्वेदिक इलाज धैर्य मांगता है। इससे जादुई असर की उम्मीद न रखें। लेकिन अगर आप लंबे समय से एक्जिमा से परेशान हैं, तो आयुर्वेदिक तरीका आपको सिर्फ लक्षणों से नहीं, बल्कि बीमारी की जड़ से लड़ने में मदद कर सकता है। यह भी ध्यान रखें कि यहां आपको औषधियां बताई जरूर गई हैं लेकिन इन्हें खुद से प्रयोग करने के बजाय एक अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से लेना बेहतर होता है, ताकि दोषों के अनुसार सही उपचार मिल सके। सेहत और स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी और जानकारियों के लिए पढ़ते रहें ओनलीमायहेल्थ।
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Current Version
Jan 21, 2026 18:36 IST
Modified By : Anurag Gupta Jan 21, 2026 18:36 IST
Published By : Anurag Gupta
Reviewed By : Dr Shrey Sharma