Fri Sep 11, 2026 | 06:25 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajat Grover , Paediatrician & Neonatologist - Cloudnine Hospital, East Delhi

शिशु का रोना बंद नहीं हो रहा? इसे केवल जिद न समझें, डॉक्टर से जानें 5 बड़े कारण

शिशु का रोना कई बार इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि पेरेंट्स को समझ नहीं आता कि शिशु को कैसे चुप कराएं। कई बार दूध देने या कंधे पर रखने के बावजूद शिशु चुप नहीं होता, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। जानने के लिए इस लेख को जरूर पढ़ें।

शिशु का रोना ही उसकी बात कहने का तरीका है। जब भी उसे भूख लगती है, नींद आ रही है, डायपर गीला है या बस गोद में आना चाहता है, तो इसके लिए रोकर बता देता है, लेकिन अगर शिशु सामान्य से ज्यादा देर तक रो रहा है, बार-बार रोने के बाद भी शांत नहीं हो रहा या उसका रोना पहले से अलग और तेज लग रहा है, तो पेरेंट्स को अलर्ट रहने की जरूरत है। अगर शिशु रोना बंद नहीं करता, तो इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है। इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Rajat Grover, Senior Consultant, Department of Paediatrics and Neonatology, Cloud Group of Hospitals, Patparganj से बात की।

शिशु के लगातार रोने के 5 कारण

Dr. Rajat Grover ने कहा, “अगर शिशु लगातार रो रहा है और रोने के साथ बुखार, उल्टी, दूध न पीना या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण हो, तो पेरेंट्स को ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।”

1. पेट में गैस या कब्ज की परेशानी

Dr. Rajat Grover कहते हैं, “दूध पीने के बाद पेट में गैस, पेट फूलना या कब्ज जैसी समस्या भी शिशु को परेशान कर सकती है। ऐसे में शिशु बेचैन होकर रोने लगता है। अगर रोते समय अपने पैरों को पेट की तरफ खींचता है, तो पेट में गैस या कब्ज की समस्य हो सकती है। अगर फीड के बाद बच्चा बार-बार रोता है, पेट फूला हुआ लगता है या मल त्याग में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। खुद से ही गैस की दवा न दें।”

2. नींद पूरी न होना

Dr. Rajat Grover ने बताया कि कई बार शिशु को नींद आ रही होती है, लेकिन वह आसानी से सो नहीं पाता। कई बार शिशु बहुत ज्यादा थक जाते हैं और इस वजह से बहुत ज्यादा चिड़चिड़े होने लगते हैं। लगातार रोने के साथ शिशु अगर आंखें मल रहा है, जम्हाई ले रहा है, बार-बार करवट बदल रहा है या सामान्य से ज्यादा चिड़चिड़ा नजर आ रहा है, तो हो सकता है कि उसे आराम और नींद की जरूरत हो।

3. बहुत गर्म या ठंडा लगना

Dr. Rajat Grover ने कहा, “शिशुओं के शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती। इसलिए कमरे का तापमान बहुत ज्यादा होना, बहुत ठंड लगना या जरूरत से ज्यादा कपड़े पहनाना भी उन्हें परेशान कर सकता है। बच्चे को मौसम के हिसाब से आरामदायक कपड़े पहनाने चाहिए। कई बार पेरेंट्स इस डर से शिशु को बहुत ज्यादा कपड़ों में लपेट देते हैं, जिससे शिशु असहज हो सकता है।”

infant crying

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4. दर्द या बीमारी की वजह से रोना

Dr. Rajat Grover कहते हैं, “अगर शिशु का रोना अचानक शुरू हुआ है, बहुत तेज है या सामान्य तरीके से शांत नहीं हो रहा, तो किसी बीमारी या दर्द की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बुखार, बार-बार उल्टी, दस्त, दूध या खाना न लेना, असामान्य सुस्ती, सांस लेने में परेशानी, पेट फूलना, दौरे या शरीर का रंग नीला पड़ना जैसे लक्षण साथ दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर के दिखाना चाहिए।”

5. भूख लगना

Dr. Rajat Grover ने कहा, “शिशु को जब भूख लगती है, तो वे अक्सर रोकर अपनी जरूरत बताते हैं। अगर शिशु बार-बार मुंह चलाता है, होंठ चाटता है, हाथ मुंह तक लेकर जाता है या बेचैनी दिखाना शुरू कर देता है, तो इसे भूख लगी हो सकती है। अगर शिशु दूध पिलाने के बाद धीरे-धीरे शांत हो जाए और सामान्य व्यवहार करने लगे, तो संभव है कि रोने की वजह भूख रही हो, लेकिन अगर दूध पीने के बाद भी शांत न हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।”

यूनिसेफ का क्या कहना है?

यूनिसेफ के अनुसार भी शिशु के रोने का कारण आसपास बहुत ज्यादा शोर होना, बहुत ज्यादा थकान, भूख, डायपर बदलना, बहुत अकेलापना या बोरियत महसूस करना, गैस और बीमार या दर्द हो सकता है।

शिशु के लगातार रोने पर पेरेंट्स क्या करें?

Dr. Rajat Grover ने कहा कि जब शिशु लगातार रोने लगे, तो पैरेंट्स को घबराने की जरूरत नहीं है।

  • सबसे पहले सामान्य कारणों को चेक करें।
  • शिशु की भूख, डायपर और नींंद जैसे लक्षणों की जांच करें।
  • शिशु के फीड, पेशाब और पॉटी के पैटर्न पर भी नजर रखें।
  • बच्चे को कभी भी गुस्से में जोर से न झकझोरें।
  • कभी-कभी बच्चे को सिर्फ गोद और सुकून चाहिए। इसलिए उसे गोद में लेकर चुप कराने की कोशिश करें।

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डॉक्टर की सलाह

Dr. Rajat Grover सलाह देते हैं कि अगर बच्चा लगातार रो रहा है और किसी भी तरह शांत नहीं हो रहा, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासतौर पर अगर रोने के साथ बुखार, सांस लेने में दिक्कत, बार-बार उल्टी, दूध न पीना, बहुत ज्यादा सुस्ती, दौरे, शरीर का रंग नीला पड़ना या असामान्य बिहेवियर दिखाई दे, तो उसे हल्के में न लें।

निष्कर्ष
Dr. Rajat Grover ने बताया कि शिशु का रोना हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता। इसका कारण भूख, नींद, गीला डायपर, गैस या पेरेंट्स की गोद की जरूरत जैसी सामान्य वजहें भी हो सकती हैं। अगर शिशु लगातार रो रहा है और उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आया है, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • कोलिक का दर्द होने पर बच्चा कैसे लक्षण दिखाता है?

    कोलिक के दौरान शिशु अचानक रोना शुरू करता है, अपनी मुट्ठियां कस लेता है, टांगों को पेट की तरफ खींचता है और उसका पेट छूने पर सख्त महसूस होता है। यह रोना अक्सर रोजाना एक ही समय पर होता है।
  • दूध पिलाने के तुरंत बाद शिशु का रोना किस बात का संकेत है?

    अगर बच्चा दूध पीने के तुरंत बाद रोता है, तो यह पेट में हवा फंसने, लेक्टोज इनटोलरेंस, एसिड रिफ्लक्स का संकेत है। दूध पिलाते समय बच्चे का सिर हमेशा थोड़ा ऊपर रखें।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 27, 2026 16:39 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Rajat Grover

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