Wed Sep 30, 2026 | 10:43 AM IST

Medically Reviewed by Dr Major Rajesh Bhardwaj , ENT Specialist & Head and Neck Surgeon

बच्चों की सुनने की क्षमता कमजोर होने पर दिखते हैं ये 5 संकेत, पेरेंट्स जरूर दें ध्यान

बच्चों में सुनने की क्षमता की पहचान उनके बोलने, भाषा सीखने और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। तेज आवाज पर रिएक्ट न करना या भाषा विकास में देरी जैसे शुरुआती संकेत माता-पिता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 
बच्चों की सुनने की क्षमता कमजोर होने पर दिखते हैं ये 5 संकेत, पेरेंट्स जरूर दें ध्यानबच्चों की सुनने की क्षमता कमजोर होने पर दिखते हैं ये 5 संकेत, पेरेंट्स जरूर दें ध्यान

सुनने की क्षमता सही होना हम सभी के जीवन के लिए बहुत जरूरी है। खासकर छोटे बच्चों की सुनने की क्षमता का बहुत महत्व होता है, क्योंकि इसी से उनके बोलने, भाषा सीखने और सामाजिक विकास की नींव पड़ती है। अक्सर पेरेंट्स के लिए यह समझ पाना थोड़ा मुश्किल होता है कि उनका बच्चा ठीक से सुन पा रहा है या नहीं। Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, Consultant, MedFirst ENT Centre, New Delhi का मानना है कि बच्चों में सुनने की समस्या को जितनी जल्दी पहचाना जाए, उतना ही बेहतर होता है, क्योंकि सुनने की क्षमता का सीधा संबंध बच्चे के बोलने, भाषा सीखने और सामाजिक विकास से है। छोटे बच्चों में यह पहचानना हमेशा आसान नहीं होता कि वे ठीक से सुन पा रहे हैं या नहीं, इसलिए माता-पिता को उनके रोजमर्रा के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।

बच्चों में सुनने की समस्या के शुरुआती लक्षण

Dr. Rajesh Bhardwaj के अनुसार, शिशु आमतौर पर तेज आवाज पर चौंकते हैं, आवाज की दिशा में देखने या सिर घुमाने की कोशिश करते हैं और माता-पिता की आवाज पर प्रतिक्रिया देते हैं। अगर बच्चे इन चीजों पर प्रतिक्रिया न दें तो यह कान में समस्या का संकेत होता है। इसलिए, इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, बच्चों में सुनने की समस्या के शुरुआती संकेतों में नवजात शिशुओं का तेज आवाज पर न चौंकना, 6 महीने की उम्र के बाद आवाज की दिशा में सिर न घुमाना, 1 साल की उम्र तक कुछ बोल न पाना और सिर्फ सामने देखने पर प्रतिक्रिया देना, लेकिन बुलाने पर ध्यान न देना शामिल है।

  1. तेज आवाज पर रिएक्ट न करना- आमतौर पर शिशु तेज आवाज पर चौंकते हैं या सिर घुमाकर आवाज की दिशा देखने की कोशिश करते हैं। अगर बच्चा ऐसा न करे या तेज आवाज सुनकर शांत न हो, तो पेरेंट्स को ध्यान देने की जरूरत है।
  2. आवाजों की अनदेखी करना- आवाजों पर प्रतिक्रिया देना बच्चों कान की स्थिति पहचानने का एक बेहतरीन तरीका है। उम्र के हिसाब से आवाज, शोर या आस-पास के लोगों की तरफ ध्यान न देना चिंता का कारण हो सकता है।
  3. नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना- जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, बार-बार अपना नाम सुनने पर आपकी तरफ देखता है। अगर बच्चे के कान में समस्या है तो अपना नाम सुनने के बाद भी उसकी ओर प्रतिक्रिया नहीं देता है।
  4. चीजें समझने में मुश्किल- घर के छोटे-मोटे निर्देश या कही गई बातें समझने में बच्चे को परेशानी महसूस होने लगती है।
  5. चेहरे या होठों की ओर देखना- बात सुनते समय या समझने के लिए बार-बार सामने वाले के चेहरे के हाव-भाव या होठों की ओर देखना।

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भाषा विकास में देरी और अन्य लक्षण

Dr. Rajesh Bhardwaj बताते हैं कि बच्चों में भाषा और बोलने के विकास में देरी भी सुनने की समस्या का संकेत हो सकती है। अगर बच्चा उम्र के अनुसार शब्द नहीं बोल रहा है, दूसरों की बात समझने में परेशानी होती है या उसके उच्चारण में लगातार दिक्कत बनी हुई है तो सिर्फ इसे बोलने की देरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ बच्चे टीवी या मोबाइल की आवाज बहुत तेज रखते हैं या बार-बार पूछते हैं कि क्या कहा गया, यह भी ध्यान देना बच्चों में बहुत जरूरी है।

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बचपन में सुनने की समस्या के कारण

Dr. Rajesh Bhardwaj के मुताबिक, माता-पिता को यह भी समझना जरूरी है कि सुनने की समस्या हमेशा जन्म से नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कुछ कारण भी हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-

  1. जन्मजात कारण- कुछ बच्चों में सुनने की समस्या जन्म से ही हो सकती है, जो जेनेटिक या प्रेग्नेंसी के दौरान किसी स्वास्थ्य समस्या के कारण होती है।
  2. कान में बार-बार इंफेक्शन- बच्चों के कानों में होने वाले लगातार इंफेक्शन या सूजन से सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।
  3. कान में वैक्स जमा होना- कान के अंदर ज्यादा मात्रा में मैल जमा हो जाने से आवाज अंदर तक ठीक से नहीं पहुंच पाती है, जो सुनने में समस्या का कारण बन सकता है।
  4. तेज आवाज के संपर्क में आना- लाउडस्पीकर, तेज संगीत या अन्य तेज आवाजों के संपर्क में लंबे समय तक रहने से भी कानों को नुकसान पहुंच सकता है।
  5. अन्य मेडिकल कारण- कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट, चोट लगने या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी बच्चे की सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

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डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर बच्चे के सुनने की क्षमता या बोलने के विकास को लेकर आपको किसी तरह की समस्या है तो इंतजार करने के बजाय बच्चों के डॉक्टर या ENT स्पेशलिस्ट से सलाह लेकर हियरिंग टेस्ट करवाना सही है। समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चे की भाषा और सीखने के विकास को सही तरीके से मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष
Dr. Rajesh Bhardwaj का कहना है कि अगर माता-पिता अपने बच्चे के हाव-भाव और हरकतों पर थोड़ा ध्यान दें तो सुनने से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती दौर में ही आसानी से पहचाना जा सकता है। नाम पुकारने पर जवाब न देना, तेज आवाज पर न चौंकना या भाषा सीखने में देरी होना जैसे संकेत यह बताते हैं कि आपको अपने बच्चे के न सुन पाने की समस्या को लेकर सतर्क होने की जरूरत है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • कान से कम सुनाई देने का इलाज क्या है?

    कान से कम सुनाई देने का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। जैसे वैक्स जमे होने पर सफाई करना और कोई गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह पर इलाज लेना बेहतर होता है।
  • सुनने की क्षमता बढ़ाने के क्या उपाय हैं?

    सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखने और बेहतर बनाने के लिए तेज आवाज से बचाव, कान को सही तरह से साफ करना और संतुलित डाइट अपनाना जरूरी है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 30, 2026 09:15 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj