बच्चों की आंखें उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए एक जरूरी हिस्सा होती हैं। साफ और हेल्दी आंखें न सिर्फ पढ़ाई में मदद करती है, बल्कि खेलकूद, आत्मविश्वास और रोजाना की गतिविधियां पर भी सकारात्मक असर डालती है। बार-बार आंखें मलना, टीवी को पास से देखना या स्कूल में ब्लैकबोर्ड पर लिखा साफ नजर न आने की समस्या को पेरेंट्स अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार बच्चों को खुद यह समझ नहीं आता है कि उन्हें देखने में परेशानी हो रही है। बड़ों के लिए कमजोर आंखों के लक्षणों को पहचानना बहुत आसान होता है, लेकिन बच्चों में कमजोर आंखों के संकेतों को पहचानना काफी मुश्किल हो सकता है। इसलिए, बच्चे इसकी शिकायत भी नहीं कर पाते हैं। ऐसे में माता-पिता को कुछ शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना चाहिए, जिनसे पता चल सके कि बच्चे को आंखों की जांच या चश्मे की जरूरत है। आइए इस बारे में Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Ratan Jyoti Netralaya Ophthalmic Institute & Research Centre, Gwalior से जानते हैं इस बारे में।
बच्चे को चश्मे की जरूरत होने के 7 संकेत
Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, बच्चे की आंखें कमजोर होने पर पेरेंट्स को उनमें कुछ संकेत नजर आ सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-
1. आंखें सिकोड़कर देखना
अगर आपका बच्चा किसी चीज, टीवी, ब्लैकबोर्ड या किताब को देखने के लिए बार-बार आंखें सिकोड़ता है या सिर को एक तरफ झुककार देखने की कोशिश करता है, तो यह आंखों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसा करने से बच्चा चीजों को ज्यादा साफ देखने की कोशिश करता है। यह पास का साफ-साफ न दिखना, मायोपिया या एस्टिग्मैटिज्म जैसी समस्याओं का लक्षण हो सकता है।
StatPearls मेडिकल रिसोर्स के अनुसार, आंख तिरछी होने पर दिमाग उससे मिलने वाली तस्वीर को छोड़ देता है, ताकि चीजें दो-दो या धुंधली न दिखें। अगर समय रहते इसका इलाज नहीं होता है तो वह आंख हमेशा के लिए कमजोर हो सकती है।
2. आंखों से पानी आना
अगर बिना किसी इंफेक्शन, एलर्जी या धूल-मिट्टी के संपर्क में आए बच्चे की आंखों से लगातार पानी आता है तो इसे नॉर्मल मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कभी-कभी आंखों पर ज्यादा तनाव या आंखों से जुड़ी समस्या के कारण भी आंखों में पानी आने लगता है। अगर बच्चे में यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि तुरंत उनकी आंखों की जांच करवानी चाहिए।
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StatPearls मेडिकल रिसोर्स के मुताबिक बिना चश्मे या गलत चश्मे का इस्तेमाल करने पर आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता है। यह तनाव रिफ्लेक्स टेयरिंग को ट्रिगर कर सकता है, जिससे आंखों से पानी आने की समस्या होती है।
3. बार-बार आंखें मलना
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं कि बच्चा अगर पढ़ते समय, होमवर्क करते समय या स्क्रीन देखने के बाद बार-बार आंखें मलता है या आंखों में जलन, भारीपन और थकान की शिकायत करता है तो यह आंखों पर ज्यादा प्रेशर का संकेत हो सकता है। लंबे समय तक ऐसा बने रहने पर पढ़ाई में रुचि कम हो सकती है और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं।
4. देखने के लिए एक आंख बंद करना
Dr. Purendra Bhasin का कहना है कि कुछ बच्चे किसी चीज को साफ देखने के लिए अपनी एक आंख बंद कर लेते हैं या हाथ से एक आंख को ढककर देखने की कोशिश करते हैं। यह आगत आंखों के बीच रोशनी में अंतर, दो चीजें दिखना या अन्य आंखों से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में जल्द से जल्द आंखों के डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।

5. अलग-अलग दूरी पर धुंधला दिखाना
Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि अगर बच्चा कहता है कि उसे ब्लैकबोर्ड ठीक तरह से नहीं दिखता है, दूर के साइनबोर्ड को पढ़ने में मुश्किल होती है या किताब पढ़ते समय शब्द धुंधले नजर आते हैं तो यह चश्मे की जरूरत का साफ संकेत हो सकता है। कई बच्चे पढ़ाई में कमजोर नहीं होते हैं, बल्कि उन्हें दिखने में परेशानी होती है, जिस कारण वे सही तरह से पढ़ नहीं पाते हैं।
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6. तेज रोशनी से परेशानी होना
अगर बच्चा तेज धूप, कैमरे की फ्लैश या तेज रोशनी में आंखें खोलने में असुविधा महसूस करता है या बार-बार आंखें बंद करता है तो या नॉर्मल सेंसिटिविटी से ज्यादा गंभीर समस्या हो सकती है। हालांकि, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन लगातार बनी रहने वाली रोशनी को लेकर समस्या बच्चों की कमजोर आंखों का संकेत हो सकता है।
साल 2025 में Scientific Reports में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, जिन लोगों की आंखें कमजोर या ड्राई आई से प्रभावित होती है, उन्हें नॉर्मल रोशनी, ठंडी रोशनी या चमकती रोशनी से परेशान हो सकते हैं।
7. स्क्रीन के पास बैठना
Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि अगर आपका बच्चा टीवी देखने के लिए बहुत पास बैठता है या मोबाइल और टैबलेट को आंखों के बहुत करीब रखकर इस्तेमाल करता है तो यह संकेत हो सकता है कि उसे दूर की चीजें साफ दिखाई नहीं दे रही हैं। हालांकि, यह आदत हमेशा आंखों की रोशनी कमजोर होने का संकेत नहीं होता है, लेकिन अगर यह लगातार बनी रहती है तो आंखों की जांच कराना जरूरी हो जाता है।
डॉक्टर से कब करें संपर्क?
अगर बच्चों को आंखों से जुड़ी समस्याएं जैसे धुंधला दिखना, आंखों में दर्द, आंखों का लाल होना, जलन या रोशनी को लेकर असुविधा होने की परेशानियों को नजरअंदाज न करें। इसके अलावा, बच्चे को बार-बार सिरदर्द के साथ देखने में परेशानी होना, पढ़ाई या खेल के दौरान बार-बार आंखों में दर्द या थकान महसूस होना, आंखों में रेडनेस, सूजन या लगातार पानी आने की समस्या बनी रहना, बच्चे को स्कूल में ब्लैकबोर्ड देखने में मुश्किल होना आदि समस्याओं को भी अनदेखा न करें। इस स्थिति में बिना देर किए पेरेंट्स को अपने बच्चे को तुरंत आई स्पेशलिस्ट को दिखाना चाहिए।
निष्कर्ष
बच्चों की आंखों से जुड़े शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है। आंखें सिकोड़कर देखना, बार-बार आंखें मलना, धुंधला दिखाई देना, स्क्रीन के बहुत करीब बैठना या तेज रोशनी से असुविधा होना जैसे लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि बच्चे को आंखों की जांच करवाने की जरूरत है। समय पर बच्चों की आंखों की जांच और सही चश्मा मिलने से न सिर्फ बच्चे की आंखों की रोशनी बेहतर होती है, बल्कि उसकी पढ़ाई, खेलकूद और संपूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।
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FAQ
कौन से विटामिन की कमी से आंखें कमजोर होती हैं?
आंखों की रोशनी शरीर में विटामिन ए की कमी के कारण प्रभावित हो सकती है, जिसके कारण रात में कम दिखने और आंखों में ड्राईनेस जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।बच्चों की आंखें कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?
बच्चों की आंखें कमजोर होने पर टीवी या स्क्रीन के बहुत पास बैठना, बार-बार आंखें मलना और सिरदर्द की समस्या जैसे लक्षण नजर आते हैं।
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Jul 28, 2026 21:28 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Purendra Bhasin