Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

PMOS आपकी आंखों की सेहत को कैसे प्रभावित करता है? डॉक्टर से जानें

PMOS से पीड़ित महिलाओं को कई तरह की हार्मोनल समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और इसमें आंखों से जुड़ी दिक्कतें भी शामिल है। आमतौर पर महिलाएं PMOS को आंखों से जोड़कर नहीं देखती, लेकिन इस लेख में डॉक्टर ने PMOS से होने वाली आंखों की समस्याओं को विस्तार से समझाया है।

जब भी PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) की बात होती है, तो महिलाओं के हार्मोन्स से जुड़ी समस्या उभरकर आती है। PMOS की वजह से महिलाओं के पीरियड्स रेगुलर न होना, वजन बढ़ना, मुंहासे या हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। अगर PMOS गंभीर हो जाए, तो प्रेग्नेंसी में भी दिक्कत हो सकती है, लेकिन महिलाएं इस बीमारी को आंखों से जुड़ी समस्या से नहीं जोड़ पाती है। PMOS के कारण आंखों को कैसे नुकसान पहुंच सकता है? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Founder & Director, Ratan Jyoti Netralay, MP से बात की। उन्होंने बताया कि कई महिलाओं को PMOS के दौरान आंखों में सूखापन, जलन, चुभन, लालिमा या बार-बार धुंधला दिखने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसे आमतौर पर महिलाएं थकान, लंबे समय तक स्क्रीन टाइम या नींद की कमी मानकर इग्नोर कर देती हैं। इस वजह से कई बार आंखों की समस्या गंभीर भी हो सकती है।

PMOS की वजह से आंखों पर असर

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “आंखों की सतह पर एक पतली आंसुओं की परत होता है, जो आंखों को नमी देने में मदद करती है और इंफेक्शन से बचाती है। PMOS में शरीर के हार्मोंस खासतौर पर एस्ट्रोजन और एंड्रोजन के लेवल में लगातार बदलाव होता है और इस बदलाव का असर इस पतली आंसुओं की परत पर पड़ने लगता है। इस वजह से आंखें जल्दी सूखने लगती है और आंखों में जलन, चुभन और लालिमा का कारण बन सकता है।”

PMOS में ड्राई आई सिंड्रोम का रिस्क क्यों बढ़ सकता है?

Dr. Purendra Bhasin के मुताबिक, “PMOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर में क्रोनिक सूजन हो सकता है और ये दोनों कारण आंखों की सतह को प्रभावित कर सकते हैं। जो महिलाएं कई घंटों तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर देखती हैं, उन्हें कई बार स्क्रीन पर धुंधला दिखाई दे सकता है। हालांकि, अगर महिलाएं बार-बार पलकें झपकाती हैं, तो उन्हें कुछ समय बाद साफ दिखाई देने लगता है। अगर किसी महिला की आंख में धूल का कण या रेत जाना महसूस हो या रोशनी से परेशानी हो, तो यह ड्राई आई के संकेत हो सकते हैं।”

pmos impact on eyes

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आंखों से जुड़ी बीमारी के किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?

Dr. Purendra Bhasin का कहना है कि PMOS से पीड़ित महिलाओं को सलाह देते हैं कि उन्हें आंखों से जुड़ी इन परेशानियों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर बार-बार ये लक्षण महसूस हो, तो बिना डॉक्टर की सलाह बार-बार आई ड्रॉप्स न डालें, बल्कि डॉक्टर को दिखाएं।

  1. आंखों में लगातार सूखापन या जलन महसूस हो।
  2. आंखों में चुभन या रेत जैसा महसूस होना।
  3. आंखों का बार-बार लाल होना।
  4. स्क्रीन पर कुछ देर देखने के बाद धुंधला दिखाई देना।
  5. आंखों में जल्दी थकान महसूस हो।
  6. बिना किसी कारण बार-बार पानी आने लगे।

आंखों की देखभाल के लिए क्या करें?

Dr. Purendra Bhasin ने कहा कि PMOS को पूरी तरह से कंट्रोल करना तो मुश्किल है। इसके लिए डॉक्टर आमतौर पर महिलाओं को अपने लाइफस्टाइल और डाइट पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। इसके अलावा, आंखों की अच्छी देखभाल के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बैलेंस्ड डाइट लें, रेगुलर एक्सरसाइज करें और वजन को नियंत्रित रखने के साथ नींद पूरी करें। अगर कोई बहुत ज्यादा स्क्रीन पर काम करता है, तो उसे 20-20-20 का नियम जरूर फॉलो करना चाहिए। इसका मतलब है कि हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी चीज को देखें। इससे आंखों पर पड़ने वाला स्ट्रेस कम होता है और ड्राई आई का रिस्क कम हो सकता है।

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निष्कर्ष
जिन महिलाओं को PMOS की समस्या है, तो उन्हें इसे सिर्फ हार्मोन से जोड़कर नहीं देखना चाहिए क्योंकि इसका असर आंखों पर भी पड़ सकता है। अगर किसी महिला को बार-बार आंखों में सूखापन, जलन, धुंधली नजर या रोशनी से परेशानी महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। साथ ही अपने लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने की कोशिश करें।

FAQ

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस आंखों के पर्दे को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

    PMOS से पीड़ित लगभग 70% महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस पाया जाता है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनता है। खून में बढ़ी हुई शुगर आंखों के पर्दे की नसों को कमजोर कर देती है, जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी और आंखों के अंदर ब्लीडिंग का खतरा कम उम्र में ही बढ़ जाता है।
  • क्या PMOS के मरीजों को ग्लूकोमा का भी खतरा होता है?

    PMOS से जुड़ी पुरानी और लगातार बनी रहने वाली अंदरूनी सूजन आंख के अंदरूनी दबाव को बढ़ा सकती है। यह बढ़ा हुआ दबाव धीरे-धीरे आंख की मुख्य नस को नुकसान पहुंचाकर ग्लूकोमा का खतरा पैदा करता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 08, 2026 18:17 IST

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