आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ऑफिस का बढ़ता काम, पढ़ाई का दबाव, आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां और घंटों मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला समय मानसिक तनाव को बढ़ाने का काम करता है। आमतौर पर लोग तनाव का असर केवल मेंटल हेल्थ, नींद या मूड पर ही देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका प्रभाव आपकी आंखों और नजर पर भी पड़ सकता है? इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, PPG और Esskay Ortho & Eye Center की ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट, डॉ. नीतू गगनेजा से बात की।
क्या तनाव से आपकी दृष्टि खराब हो सकती है?
डॉ. नीतू गगनेजा के अनुसार, जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। जिसके कारण ब्लड फ्लो, मांसपेशियों की एक्टिविटी और नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली में बदलाव आते हैं। इसका असर आंखों की मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है, जिससे कुछ समय के लिए धुंधला दिखना, फोकस करने में परेशानी या आंखों में भारीपन महसूस हो सकता है। हालांकि यह स्थिति आमतौर पर अस्थायी होती है और तनाव कम होने पर सुधार हो सकता है।
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डॉ. नीतू गगनेजा बताती हैं कि तनाव केवल धुंधली नजर तक सीमित नहीं रहता। कई लोगों में आंखों की मांसपेशियों में खिंचाव, आंखों का फड़कना, सूखी आंखें (Dry Eyes), आंखों में जलन, सिरदर्द और लंबे समय तक स्क्रीन देखने पर जल्दी थकान जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। तनाव के कारण व्यक्ति बार-बार पलकें झपकाना कम कर देता है, खासकर जब वह कंप्यूटर या मोबाइल पर काम कर रहा हो। इससे आंखों की नमी कम हो सकती है और ड्राई आई की समस्या बढ़ सकती है। यदि पहले से माइग्रेन की समस्या है, तो तनाव के कारण विजुअल डिस्टर्बेंस भी हो सकते हैं।

आंखों को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
डॉक्टर नीतू गगनेजा सलाह देती हैं कि तनाव को कंट्रोल रखना आंखों के साथ-साथ पूरे शरीर के लिए जरूरी है। नियमित योग, ध्यान, गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस और पर्याप्त नींद तनाव कम करने में मदद करती है। यदि लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं, तो 20-20-20 नियम अपनाएं, यानी हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें। पर्याप्त पानी पिएं, बैलेंस डाइट लें और स्क्रीन की ब्राइटनेस को उचित लेवल पर रखें। आंखों में लगातार ड्राईनेस महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, नियमित आई चेकअप भी कराते रहें, खासकर यदि पहले से आंखों की कोई समस्या हो।
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साल 2018 में Springer EPMA Journal में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि मानसिक तनाव और आंखों की रोशनी का कम होना, दोनों एक-दूसरे से गहरे जुड़े हैं। तनाव के कारण आंखों की बीमारियां बढ़ती हैं और रोशनी कम होने पर मानसिक तनाव, डर या डिप्रेशन और ज्यादा बढ़ जाता है। हमारा दिमाग, आंखें और ब्लड सर्कुलेशन आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए, आंखों का इलाज सिर्फ मेडिकल या फिजिकल तौर पर ही नहीं, बल्कि मरीज की मेंटल हेल्थ को सुधारकर भी किया जाना चाहिए। इस तनाव के चक्र को तोड़ना और इसके पीछे के कारणों को समझना ही इलाज का सही तरीका है।
निष्कर्ष
तनाव कुछ लोगों में अस्थायी रूप से धुंधली नजर, आंखों का फड़कना, ड्राईनेस और फोकस करने में परेशानी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। हालांकि अधिकांश मामलों में तनाव कम होने पर ये लक्षण भी ठीक हो जाते हैं लेकिन यदि नजर संबंधी परेशानी बार-बार हो, लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य तनाव समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। डॉक्टर नीतू गगनेजा के अनुसार, मेंटल हेल्थ को कंट्रोल रखना, आंखों को पर्याप्त आराम देना और समय-समय पर आई स्पेशलिस्ट से जांच कराना आंखों की बेहतर सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
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FAQ
आंखों का तनाव कैसे खत्म करें?
आंखों का तनाव कम करने के लिए 20-20-20 का रूल फॉलो करें, साथ ही, लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का उपयोग करें।आंखों की कमजोरी दूर करने के लिए क्या खाएं?
आंखों की कमजोरी दूर करने के लिए विटामिन्स और फैटी एसिड से भरपूर फूड्स का सेवन करें।दिमाग में टेंशन कैसे दूर करें?
टेंशन दूर करने के लिए मेडिटेशन, प्राणायाम और योग करें, इसके साथ ही हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें।
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Jul 14, 2026 14:18 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Neetu Gagneja Arora