‘शिशु की मालिश सुबह कर देना अच्छा होता है…’, ‘आज मालिश नारियल के तेल के बजाय देसी घी से कर देते हैं…’ ऐसी कई बातें मालिश करते हुए सुनी जा सकती है। हालांकि, कुछ बातें तो शिशु की मालिश के लिए बेहतर होती हैं, लेकिन कई बार इस दौरान पेरेंट्स ऐसी गलतियां (Baby Massage Mistakes) कर देते हैं, जिनके बारे में उन्हें समझ भी नहीं आता। इस कारण शिशु लगातार रोता रहता है और चिड़चिड़ा हो जाता है। इस बारे में गुरुग्राम के Cloudnine Group of Hospitals के Department of Pediatrics and Neonatologist के Director Dr. Gopal Aggarwal कहते हैं कि मालिश शिशु की स्किन को ध्यान में रखकर ही की जानी चाहिए। शिशु की मांसपेशियां और जोड़ बहुत नाजुक होते हैं, इसलिए छोटी-छोटी गलतियां करने पर शिशु को परेशानी हो सकती है।
शिशु की मालिश करते समय 7 गलतियां करने से बचें
MDPI में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, साल 2017 से 2021 के बीच 1416 शिशुओं पर 16 स्टडी की गईं। इसमें 7 में से 5 अध्ययनों में पाया गया कि शिशु की मालिश करने से दर्द कम होता है। मालिश करने से पेट की ऐंठन या गैस कम हुई और नींद में सुधार हुआ है। इसलिए मालिश करने के कोई नुकसान नहीं देखे गए। इससे पेरेंट्स और शिशु के बीच इमोशनल बॉन्डिंग मजबूत हो सकती है।
Dr. Gopal Aggarwal कहते हैं कि मालिश करने के कई फायदे हैं, लेकिन इसे सही तरीके से करना बहुत जरूरी है। इसलिए पेरेंट्स को ये गलतियां बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।
1. मालिश करते समय बहुत ज्यादा प्रेशर डालना
Dr. Gopal Aggarwal ने कहा, “अक्सर पेरेंट्स मालिश जोर-जोर से करने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे बच्चे की ग्रोथ तेजी से होगी, लेकिन ऐसा नहीं होता। जोर लगाने या प्रेशर देने से शिशु असहज हो सकता है और रो सकता है। इसलिए मालिश हमेशा हल्के हाथों से करें। हाथ, पैर और पीठ पर हल्के और धीमे स्ट्रोक काफी होते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि शिशु की हड्डियों और जोड़ों पर ज्यादा जोर से दबाव नहीं डालना चाहिए। पेरेंट्स इसे शिशु की एक्सरसाइज न समझें।”
2. देर तक मालिश करना
Dr. Gopal Aggarwal ने बताया कि कई बार पेरेंट्स सोचते हैं कि जितनी देर शिशु की मालिश करेंगे, उतना ही ज्यादा फायदा होगा। ऐसा जरूरी नहीं है, क्योंकि ज्यादा देर मालिश करने से शिशु की स्किन में जलन हो सकती है। इसलिए पेरेंट्स को शुरुआत में करीब 10 से 15 मिनट मालिश करने की सलाह दी जा सकती है। अगर शिशु परेशान नहीं होता, तो इसे थोड़ा सा बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अगर शिशु थका हुआ, परेशान या असहज महसूस करता है, तो मालिश रोक देना बेहतर होता है।
3. बच्चे के रोने को नजरअंदाज करना
Dr. Gopal Aggarwal कहते हैं, “मेरे पास कई पेरेंट्स ऐसे आते हैं, जो शिशु के रोने पर भी मालिश करते रहते हैं। उनका मानना होता है कि मालिश करने के बाद शिशु नॉर्मल हो जाएगा, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। अगर शिशु मालिश के दौरान रो रहा है, तो मालिश रोक देनी चाहिए। शायद मालिश या तेल की वजह से उसे परेशानी हो रही हो। रोना, शरीर का अकड़ना, चेहरा सिकोड़ना या बार-बार हाथ-पैर पीछे खींचना इस बात के संकेत हो सकते हैं कि शिशु असहज महसूस कर रहा है।”
4. दूध पिलाने के तुरंत बाद मालिश करना
Dr. Gopal Aggarwal ने बताया कि कुछ पेरेंट्स शिशु को दूध पिलाने के बाद मालिश शुरू कर देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि शिशु का पेट भरा है, तो रोएगा नहीं, लेकिन दूध पिलाने के बाद तुरंत मालिश करने से पेट पर दबाव पड़ सकता है और इससे शिशु उलटी भी कर सकता है। इसलिए ब्रेस्टफीड के तुरंत बाद मालिश न करें।
baby massage mistakes
यह भी पढ़ें- शिशु का रोना बंद नहीं हो रहा? इसे केवल जिद न समझें, डॉक्टर से जानें 5 बड़े कारण
5. बहुत ज्यादा तेल या घरेलू चीजें लगा देना
Dr. Gopal Aggarwal कहते हैं कि मालिश करने से पहले तेल का पैच टेस्ट करना चाहिए। इसके अलावा, किसी भी तरह के घरेलू नुस्खे नहीं अपनाने चाहिए। खुशबू वाला तेल या घरेलू नुस्खे ने अपनाएं क्योंकि इससे शिशु की स्किन पर असर पड़ सकता है।
NCT के मुताबिक, शिशु की स्किन का बैरियर पहले साल के दौरान बनता है, तो ऐसे में गलत तेल लगाने से एक्जिमा की दिक्कत हो सकती है। आमतौर पर जैतून का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग सरसों का तेल भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसमें मौजूद तीखापन ज्यादा होने के कारण शिशु की नाजुक और सेंसिटिव स्किन पर जलन, लालिमा और स्किन बैरियर को नुकसान पहुंच सकता है।
6. ठंडे हाथों से मालिश शुरू करना
Dr. Gopal Aggarwal कहते हैं, “कई बार पेरेंट्स महसूस ही नहीं कर पाते कि उनके हाथ ठंडे हैं और वे मालिश शुरू कर देते हैं। जैसे ही शिशु को हाथ ठंडे महसूस होते हैं, वह रोता है या चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसा आमतौर पर सर्दियों में ज्यादा होता है। इसलिए मालिश शुरू करने से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करके सुखा लेना चाहिए। अपने हाथों को थोड़ा गर्म करके ही शिशु को छुएं। इससे शिशु को आराम महसूस हो सकता है।”
7. बच्चे के बीमार होने पर मालिश करना
Dr. Gopal Aggarwal ने कहा कि कई बार शिशु को बुखार, इंफेक्शन या स्किन पर रैशेज होते हैं, तो भी उसकी मालिश यह सोचकर की जाती है कि इससे आराम मिलेगा। ऐसा करने से कई बार शिशु को दिक्कत हो सकती है। जो शिशु समय से पहले जन्मे या कम वजन वाले हैं, उनकी मालिश शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी हो जाता है।
मालिश करने का सही तरीका
American Academy of Pediatrics के मुताबिक, शिशु की मालिश इस तरह से करना काफी फायदेमंद हो सकती है।
- कंधों से लेकर कमर की तरफ हल्के दबाव के साथ मालिश करें।
- हथेली में अंगूठा रखकर गोल घुमाते हुए मालिश करें।
- टखना पकड़कर तलवे पर अंगूठे से दबाव दें।
- गोद में बैठाकर कंधों को सहलाते हुए बाहों की तरफ हाथ ले जाएं।
- पीठ के बल लिटाकर सिर से पैरों तक बाहरी हिस्से या सीने से पेट और पैरों के सामने की तरफ हाथ फेरें।
- सिर के ऊपरी भाग पर पीछे की ओर, माथे, भौहें और जबड़े पर हल्के हाथों से मालिश करें।
निष्कर्ष
Dr. Gopal Aggarwal पेरेंट्स को बताते हैं कि शिशु मालिश के दौरान कैसा महसूस कर रहा है, उसे समझने के लिए शिशु के हाव-भाव देखने चाहिए। अगर शिशु शांत है और सामान्य सांस ले रहा है, तो मालिश जारी रखी जा सकती है। वहीं, अगर वह बेचैन या रोने लगे, तो मालिश करना रोक देना चाहिए।
All Image Credit: Magnific
FAQ
क्या शिशु के नाक, कान या नाभि में तेल डालना सुरक्षित है?
कान या नाक में तेल डालने से फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन और फेफड़ों में तेल खिंचने का रिस्क रहता है। नाभि पर तेल लगाने से संक्रमण हो सकता है।वैक्सीनेशन के तुरंत बाद क्या शिशु की मालिश की जा सकती है?
इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द और सूजन हो सकती है। वैक्सीनेशन के कम से कम 48 घंटे तक उस पैर या हाथ की मालिश न करें। अगर शिशु को बुखार हो तो पूरी मालिश बंद रखें।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Oct 01, 2026 17:29 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Gopal Agrawal
