आंखों की सही चेकअप और सही नंबर का चश्मा लगावाने के बाद भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है। कई बार चश्मा पहनने के बावजूद सिर में दर्द बना रहता है। कुछ लोगों को पढ़ते समय सिर भारी लगने लगता है, तो कुछ को ऑफिस में कई घंटे कंप्यूटर पर काम करने के बाद सिरदर्द शुरू हो जाता है। ऐसे में अक्सर पहला ख्याल यही आता है कि शायद चश्मे का नंबर बदल गया है। हालांकि, हर बार सिरदर्द होने का मतलब यह नहीं है कि चश्मे की पावर गलत है। इस बारे में Gwalior स्थित Ratan Jyoti Netralaya के Founder & Director और Ophthalmologist Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि कई मामलों में आंखों पर ज्यादा जोर पड़ना, लंबे समय तक स्क्रीन देखना, आंखों में सूखापन या दोनों आंखों के बीच तालमेल की परेशानी भी इसकी वजह हो सकती है। इसलिए ऐसा होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
चश्मा पहनने के बाद भी सिरदर्द क्यों होता है?
British and Irish Orthoptic Journal में ऑप्टोमेट्री क्लिनिक में आने वाले 10 से 40 साल की उम्र के कुल लोगों में सिरदर्द ग्रुप के 1,062 लोग और बिना सिरदर्द वाले ग्रुप के 1,095 लोग शामिल किए गए थे। इस रिसर्च में पाया गया है कि कनपटी का सिरदर्द सबसे आम था। इसमें यह भी देखा गया कि जिन लोगों को कम नंबर का चश्मा लगवाने की जरूरत थी, उन लोगों को भी सिरदर्द की समस्या हुई है।
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “अगर किसी को चश्मा पहनने के बाद भी बार-बार सिरदर्द हो, तो चश्मे का नंबर दोबारा चेक कराने के अलावा इसके अन्य कारणों को समझने की जरूरत है।
1. चश्मे का नंबर और फ्रेम सही न होना
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “चश्मा लगाने के बावजूद सिरदर्द होने की एक वजह गलत पावर हो सकती है। कई बार चश्मे का नंबर नहीं बदला होता, लेकिन सिलिंड्रिकल पावर या एस्टिग्मैटिज्म में बदलाव होने के कारण भी परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में आंखों को चीजों पर फोकस करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। खासतौर पर किताब पढ़ते समय, मोबाइल देखने या कंप्यूटर पर काम करते हुए सिरदर्द और आंखों में थकान महसूस हो सकती है। इसके अलावा, कई बार चश्मे का नंबर तो सही होता है, लेकिन फ्रेम ठीक से फिट नहीं होता। बहुत टाइट फ्रेम कनपटी या कान के आसपास दबाव डाल सकता है। इससे कुछ लोगों को सिर में दर्द या असहजता महसूस हो सकती है।”
2. दोनों आंखों के बीच तालमेल की परेशानी
Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “आंखें हमेशा मिलकर किसी चीज को साफ तरीके से देखती है। अगर आंखों के बीच तालमेल सही न हो, तो आंखों को फोकस करने में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में किताब पढ़ते समय, मोबाइल इस्तेमाल करते हुए या कंप्यूटर पर काम करने के दौरान सिरदर्द हो सकता है। कुछ लोगों को आंखों में खिंचाव या थकान भी महसूस हो सकती है। कई बार आंखों की इस स्थिति को चेक करने के लिए एक्सपर्ट कई अन्य जांच की सलाह भी दे सकते हैं।”
3. लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर इस्तेमाल करना
Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि ऑफिस में सारा दिन लैपटॉप पर नजर रखना, स्क्रीन पर रहना या फिर लगातार मोबाइल देखने से भी आंखों में जलन, थकान, भारीपन या सिरदर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसे डिजिटल आई स्ट्रेन भी कहा जाता है। अगर लंबे समय तक पास की चीजों पर ध्यान लगाया जाता है, तो आंखों को आराम करने का मौका नहीं मिल पाता, तो कुछ ही घंटों बाद सिरदर्द शुरू हो सकता है।
Causes of Headache Even After Wearing Glasses
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4. आंखों में सूखापन होना
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “लगातार मोबाइल और कंप्यूटर पर काम करते समय अक्सर पलके कम झपकाई जाती है। इससे आंखों की सतह पर मौजूद आंसुओं की परत प्रभावित हो सकती है और आंखों में सूखापन बढ़ सकता है। ड्राई आई की समस्या होने पर जलन, किरकिराहट, धुंधला दिखाई देना या आंखों में भारीपन महसूस हो सकता है। ये परेशानियां आंखों की थकान के साथ सिरदर्द की शिकायत को भी बढ़ा सकती हैं। अगर कोई लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल करता है और इससे उसकी आंखों में जलन या सूखापन बढ़ रहा है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें।”
5. स्ट्रेस और नींद की कमी
Sleep Medicine Institute के मुताबिक, नींद की कमी होने से सिरदर्द की समस्या होना सबसे आम है। कई लोग लगातार स्ट्रेस के चलते रात में सो नहीं पाते और सुबह जब उठते हैं, तो उनका सिर भारी होना और सिरदर्द की शिकायत होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं कि इसलिए कई बार चश्मे की समस्या न होने पर भी तनाव और नींद की कमी सिरदर्द कर सकते हैं। सिरदर्द से बचाव के लिए लोगों को रोजाना एक समय पर सोना और जागना चाहिए।
चश्मा पहनने के बावजूद सिरदर्द हो तो क्या करें?
Dr. Purendra Bhasin लोगों को सलाह देते हैं कि चश्मा पहनने के बाद भी सिरदर्द हो, तो लोगों को ये तरीके अपनाने चाहिए।
- अगर सिरदर्द लगातार हो रहा है या पहले के मुकाबले बढ़ गया है, तो आंखों की पावर टेस्ट कराएं।
- लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में आंखों को आराम दें। इसके लिए 20-20-20 नियम अपनाया जा सकता है। हर 20 मिनट में लगभग 20 सेकंड के लिए कम से कम 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।
- बहुत कम रोशनी में पढ़ने या मोबाइल को चेहरे के बेहद पास रखकर न पढ़ें। पर्याप्त रोशनी में पढ़ें और स्क्रीन को आरामदायक दूरी पर रखें।
- पर्याप्त नींद लें और दिनभर अपनी जरूरत के अनुसार पानी पिएं। अगर सिरदर्द बार-बार होता है, तो यह भी देखें कि वह किस समय शुरू होता है और किन एक्टिविटीज के बाद बढ़ता है।
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निष्कर्ष
अगर अचानक बहुत तेज सिरदर्द शुरू हो, दिखाई देना अचानक कम हो जाए, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस हो या बोलने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। वैसे चश्मा पहनने के बाद भी अगर सिरदर्द हो, तो जरूरी नहीं है कि गलत पावर हो। कई बार स्ट्रेस, नींद की कमी या आंखों के तालमेल में परेशानी हो सकती है। सिरदर्द के सही इलाज के लिए लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
FAQ
क्या प्रोग्रेसिव या बाईफोकल लेंस सिरदर्द और चक्कर का कारण बन सकते हैं?
प्रोग्रेसिव लेंस में दूर, मध्यम और पास देखने के अलग-अलग जोन होते हैं। नए लोगों को गर्दन घुमाने के बजाय केवल आंखों को हिलाकर देखने की आदत होती है, जिससे किनारों का धुंधलापन, स्ट्रेस और सिरदर्द की समस्या हो सकती है।क्या डार्क टिंट या गलत पावर वाले धूप के चश्मे से सिरदर्द हो सकता है?
अगर धूप के चश्मे में यूवी प्रोटेक्शन सही न हो या उसका लेंस ऑप्टिकली फ्लैट न होकर टेढ़ा हो, तो आंख की पुतलियां अंधेरे के कारण फैल जाती हैं और खराब लेंस से गुजरने वाली रोशनी सीधे खिंचाव पैदा करती है। सस्ते या लोकल फैंसी चश्मे अक्सर माइग्रेन ट्रिगर करते हैं।
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Oct 26, 2026 18:52 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Purendra Bhasin
