Mon Nov 2, 2026 | 07:36 PM IST

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प्रदूषण में बच्चों को बार-बार खांसी क्यों होती है? जानें डॉक्टर की सलाह

प्रदूषण के कारण बच्चों को बार-बार खांसी, गले में जलन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। यहां डॉक्टर से जानिए, इसके पीछे की वजह, कौन से लक्षण खतरे का संकेत हैं और बच्चे को कब डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए?
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देशभर में बढ़ता वायु प्रदूषण बच्चों की सेहत के लिए चिंता का बड़ा कारण है। प्रदूषित हवा में मौजूद धूल, धुआं और बारीक कण बच्चों के रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि प्रदूषण बढ़ने पर कई बच्चों को बार-बार खांसी, गले में खराश, नाक बहने और सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कुछ बच्चों में यह समस्या कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन कई बार खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। KIMS हॉस्पिटल्स, महादेवपुरा बेंगलुरु के लीड और सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण सांस के जरिए बच्चों के फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इससे उनकी सांस की नलियों में सूजन, जलन और सेंसिटिविटी बढ़ सकती है।

प्रदूषण में बच्चों को बार-बार खांसी क्यों होती है?

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज के अनुसार, प्रदूषित हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण बच्चों के श्वसन तंत्र यानी रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। ये कण सांस के जरिए नाक और गले से होते हुए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इससे जलन और सूजन हो सकती है, जिसके कारण बच्चों को बार-बार खांसी आने लगती है। बच्चों का रेस्पिरेटरी सिस्टम अभी विकसित हो रहा होता है और उनकी सांस लेने की स्पीड भी वयस्कों की तुलना में ज्यादा होती है। इसलिए प्रदूषण का असर उन पर ज्यादा हो सकता है। प्रदूषण के संपर्क में रहने से बच्चों में कई तरह की सांस संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। जैसे कि-

  • प्रदूषित हवा से गले और रेस्पिरेटरी सिस्टम में जलन होने के कारण सूखी खांसी हो सकती है।
  • वायु प्रदूषण के कारण रेस्पिरेटरी सिस्टम में सूजन और बलगम बनने की समस्या बढ़ सकती है।
  • प्रदूषण के कारण सांस की नलियों में सिकुड़न या सूजन होने से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
  • जिन बच्चों को पहले से अस्थमा है, उनमें प्रदूषण के कारण खांसी, घरघराहट और सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है।
  • प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से गले में खराश, छींक और नाक बंद होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

साल 1997 में American Journal of Respiratory and Critical Care Medicine जर्नल में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, फिनलैंड में हुई स्टडी से पता चलता है कि हवा में मौजूद प्रदूषण (जैसे PM10 और धुआं) बच्चों की सांस की सेहत पर बुरा असर डालता है। सर्दियों के दौरान, अस्थमा के लक्षणों वाले बच्चों में वायु प्रदूषण बढ़ने से उनकी सुबह की सांस लेने की क्षमता में कमी देखी गई। कुल मिलाकर, इस स्टडी से यह साबित होता है कि वायु प्रदूषण अस्थमा से पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खासतौर से हानिकारक है।

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इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज सलाह देते हैं कि अगर बच्चे को सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी हो, सांस लेते समय पसलियों के बीच या छाती के नीचे की स्किन अंदर धंसती दिखे, होंठ या चेहरा नीला पड़े, बच्चा बहुत सुस्त हो जाए या सामान्य रूप से रिएक्शन न दे तो इन संकेतों को मेडिकल इमरजेंसी समझना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

cough in children warning signscough in children warning signs

प्रदूषण में बच्चों को खांसी से बचाने के लिए क्या करें?

प्रोफेसर डॉ. एस.एम. फयाज सलाह देते हैं कि बच्चों को प्रदूषण के प्रभाव से बचाने के लिए कुछ सावधानियां अपनाना जरूरी है-

  • जब AQI बहुत खराब या गंभीर केटेगरी में हो, तो बच्चों को बाहर खेलने और एक्सरसाइज करने से बचाएं।
  • बाहर प्रदूषण ज्यादा होने पर घर में प्रदूषित हवा का प्रवेश कम करने के लिए घर में खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।
  • जरूरत पड़ने पर बाहर जाते समय बच्चे की उम्र और चेहरे के अनुसार अच्छी फिटिंग वाला उपयुक्त मास्क इस्तेमाल करें। छोटे बच्चों को मास्क पहनाते समय खास सावधानी रखें।
  • घर में सिगरेट, अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और अन्य धुआं पैदा करने वाली चीजों का इस्तेमाल कम करें।
  • बच्चों को पर्याप्त पानी दें, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो और गले में सूखापन कम रहे।

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निष्कर्ष

प्रदूषण के कारण बच्चों को बार-बार खांसी आना रेस्पिरेटरी सिस्टम में जलन और सूजन का संकेत हो सकता है। हालांकि, हर खांसी को प्रदूषण का असर मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। खासकर अगर बच्चे को रात में लगातार खांसी आती है, सांस लेने में परेशानी होती है या खांसी कई सप्ताह तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। बच्चों को खराब हवा के संपर्क से बचाना, बाहर खेलने का समय सीमित करना और घर के अंदर धुएं से दूरी बनाए रखना उनकी सांस संबंधी सेहत की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

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FAQ

  • क्या बच्चों को प्रदूषण में नेबुलाइजर देना चाहिए?

    नेबुलाइजर का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। हर तरह की खांसी में नेबुलाइजर की जरूरत नहीं होती। बिना डॉक्टर की सलाह के इसका इस्तेमाल न करें।
  • क्या प्रदूषण से बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है?

    लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से बच्चों के रेस्पिरेटरी सिस्टम पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। इससे सांस संबंधी इंफेक्शन और एलर्जी की परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 02, 2026 18:20 IST

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