Fri Oct 2, 2026 | 12:50 PM IST

बच्चे दिनभर मोबाइल-टीवी देखते हैं? पढ़ाई और भाषा में दिख रहा है बदलाव, नई स्टडी का दावा

अगर आपके बच्चे भी सारा दिन मोबाइल या टीवी ही देखते रहते हैं, तो आपके लिए यह स्टडी पढ़ना बहुत जरूरी है। नई स्टडी में दावा किया गया है कि जिन बच्चों का लंबा समय स्क्रीन टाइम में गुजरता है, उनकी भाषा और पढ़ाई पर असर पड़ता है।
बच्चे दिनभर मोबाइल-टीवी देखते हैं? पढ़ाई और भाषा में दिख रहा है बदलाव, नई स्टडी का दावाबच्चे दिनभर मोबाइल-टीवी देखते हैं? पढ़ाई और भाषा में दिख रहा है बदलाव, नई स्टडी का दावा

मोबाइल और लैपटॉप पर पढ़ाई करना या फिर गेम्स खेलने में ही बच्चों का सारा समय निकल जाता है। इसलिए बच्चों से अब मोबाइल, टीवी या लैपटॉप के स्क्रीन टाइम को कम करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं रह जाता कि बच्चा स्क्रीन देख रहा है या नहीं, बल्कि यह भी है कि वह स्क्रीन पर कितना समय बिता रहा है। हाल ही में नई स्टडी में बच्चों के स्क्रीन टाइम और उनकी ग्रोथ से जुड़े अलग-अलग पहलुओं के बीच कनेक्शन समझने की कोशिश की गई। इसमें पढ़ाई, भाषा, इमोशनल स्थितियां शामिल है।

क्या है स्टडी?

इस स्टडी को कनाडा के कैलगरी यूनिवर्सिटी ने बच्चों के स्क्रीन टाइम के असर को लेकर पुराने अध्ययनों का विश्लेषण किया है। इसे JAMA Pediatrics में प्रकाशित किया गया है। इस रिसर्च में 64 देशों के 18 साल या इससे कम उम्र के करीब 28.17 लाख बच्चों का डेटा शामिल किया गया। इस स्टडी में उनकी अकेदिमक, भाषा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े परिणामों का विश्लेषण किया गया था। शोधकर्त्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम ज्यादा था, उनमें अकादमिक, भाषा और इमोशनल समस्याओं का कनेक्शन मिल है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि स्क्रीन ही इन समस्याओं की सीधी वजह है।

स्क्रीन टाइम ज्यादा होने से बच्चों पर क्या असर पड़ता है?

रिसर्च के मुताबिक, ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चे पढ़ाई में कमजोर पाए गए हैं और उनकी भाषा पर भी पकड़ कमजोर देखी गई है। हालांकि, एग्जीक्यूटिव फंक्शनिंग यानी सोचने और व्यवहार को कंट्रोल करना, गणित, साइंस और रीडिंग स्कोर के साथ स्पष्ट संबंध नहीं मिला। यह बच्चे की उम्र और स्क्रीन के प्रकार के अनुसार अलग भी थे। इसके अलावा, बच्चों में इमोशनल समस्याएं भी देखने को मिली थी। इस स्टडी में पाया गया कि जो बच्चे बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम देते हैं, उनकी भाषा के विकास में कमी देखी गई। फोन, टीवी या लैपटॉप पर बहुत ज्यादा समय बिताने पर आमने-सामने बातचीत करना कम हो जाता है। हालांकि, इस रिसर्च में सीधे तौर पर नहीं जोड़ा गया है।

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क्या बच्चों को मोबाइल या लैपटॉप से दूर रखना चाहिए?

रिसर्च के नतीजों में सीधे तौर पर इसे खराब नहीं माना है, क्योंकि डिजिटल होना बच्चों के लिए जरूरी है। मोबाइल या लैपटॉप पर पढ़ाई करना आज की जरूरत बन गया है। लैपटॉप या मोबाइल के जरिए ही बच्चे जरूरी जानकारियां जुटाकर एक्टिविटीज में पार्टिस्पेट भी करते हैं। इसलिए मोबाइल या लैपटॉप से दूर रखना सही नहीं है, लेकिन अगर बच्चे की नींद पूरी न हो रही हो, चिड़चिड़ापन हो, फिजिकल एक्टिविटी न कर रहा हो या परिवार के साथ बातचीत लगभग बंद हो गई हो, तो पेरेंट्स को ध्यान देने की जरूरत है।

बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?

Mayo Clinic में पेरेंट्स के लिए सलाह है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम इतना ही होना चाहिए। इसके साथ पेरेंट्स को इस बात की नजर रखनी चाहिए कि बच्चे मोबाइल, लैपटॉप या टीवी पर क्या देख रहे हैं।

  • 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बिल्कुल स्क्रीन टाइम नहीं होना चाहिए।
  • 2 से 12 साल के बच्चों के लिए रोजाना ज्यादा से ज्यादा एक घंटा
  • टीनएजर्स और वयस्कों के लिए रोजाना ज्यादा से ज्यादा दो घंटे।

स्क्रीन टाइम कम करने के लिए पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?

Mayo Clinic के अनुसार, बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए ये तरीके अपनाएं जा सकते हैं।

  • बच्चों का रोजाना का एक स्क्रीन टाइम रखें। इसे बढ़ाने के बजाय घटाने की ओर ज्यादा ध्यान दें।
  • बच्चा जब स्कूल से लौटता है, तो उसके साथ रोजाना आमने-सामने बैठकर बातचीत करें।
  • जब बच्चा बात कर रहा हो, तो आप उसकी बातों को ध्यान से सुनें।
  • जब बच्चा मोबाइल या लैपटॉप नहीं देख रहा, तो डिवाइस को किसी कॉमन एरिया में रखें, ताकि बच्चे का ध्यान ही न जाए।
  • खाते समय फोन देखने की आदत को बंद करें। न खुद देखें और न ही बच्चे को देखने दें।
  • फोन छोड़कर बच्चे के साथ बाहर पार्क में टहलने या खेलने जाएं। इससे शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन बढ़ते हैं। इससे मूड बेहतर होता है और दिमाग शांत होता है।

निष्कर्ष
हालांकि, स्टडी में बच्चों की स्क्रीन टाइम को लेकर कई पढ़ाई और भाषा से जुड़े कई खुलासे किए हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि स्क्रीन टाइम सीधे तौर पर बच्चों में विकास संबंधी या मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं पैदा करता है। यह भी संभव है कि जिन बच्चों को पहले से भाषा, भावनात्मक या सीखने से जुड़ी परेशानियां हैं, वे ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताने लगे हो। इसलिए रिसर्चर्स ने स्क्रीन टाइम और बच्चों से जुड़े विकास को और बेहतर तरीके से समझने के लिए और रिसर्च करने की जरूरत पर जोर दिया है।

FAQ

  • क्या स्क्रीन टाइम का बच्चों की आंखों की रोशनी और नींद पर बुरा असर पड़ता है?

    स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद वाले हार्मोन मेलाटोनिन को रोकती है, जिससे रात में नींद नहीं आती। साथ ही, लगातार पलकें न झपकाने से आंखों में सूखापन, सिरदर्द और मायोपिया का खतरा बढ़ता है।
  • वर्चुअल ऑटिज्म क्या है और इसका ज्यादा स्क्रीन टाइम से क्या संबंध है?

     बहुत छोटे बच्चों जैसे कि 2 साल से कम उम्र के बच्चे बहुत ज्यादा स्क्रीन देखने लगते हैं, तो उनमें ऑटिज्म जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। इसमें आंखों में न देखना, नाम पुकारने पर जवाब न देना और अकेले में रहना शामिल है। ऐसे बच्चों को स्क्रीन हटाकर बातचीत बढ़ाने से इसमें सुधार हो सकता है।
  • बच्चों को खाना खिलाते समय मोबाइल देना सही है या गलत?

    स्क्रीन देखते हुए खाना खाने से बच्चा बिना चबाए भोजन निगलता है और उसे पेट भरने के सिग्नल का पता नहीं चलता। इससे बचपन में ही मोटापा या कुपोषण की समस्या हो सकती है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 02, 2026 11:08 IST

    Published By : Aneesh Rawat