Thu Oct 1, 2026 | 09:14 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineeta Singh Tandon , Sr. Consultant – Internal Medicine

खांसी-जुकाम को ठीक होने में क्यों लगता है समय? डॉक्टर से जानें कारण और रिकवरी टिप्स

मौसम बदलने के साथ ही खांसी-जुकाम लगना आम है, लेकिन इसे ठीक होने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है। पहले सर्दी-जुकाम की होता था और फिर जल्दी ही ठीक भी हो जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। इससे कारणों को इस लेख में जानें।
खांसी-जुकाम को ठीक होने में क्यों लगता है समय? डॉक्टर से जानें कारण और रिकवरी टिप्सखांसी-जुकाम को ठीक होने में क्यों लगता है समय? डॉक्टर से जानें कारण और रिकवरी टिप्स

मौसम बदलते ही खांसी-जुकाम की समस्या काफी आम हो जाती है। आमतौर पर वायरल के कारण इंफेक्शन होती है और कुछ दिनों बाद खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाता है, लेकिन कई लोगों का अब खांसी-जुकाम जल्दी ठीक नहीं हो रहा (why cold and cough takes time to heal) ऐसे में सवाल उठता है कि खांसी जुकाम ठीक होने में समय क्यों लगता है? इसके कारणों को जानने को जानने के लिए हमने Dr. Vineeta Singh Tandon, Senior Consultant, Internal Medicine, ISIC Multispeciality Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि खांसी-जुकाम के दौरान सांस की नली और गले में हुई जलन या सेंसटिविटी कुछ समय तक बनी रह सकती है। इसी वजह से नाक बहने या खांसी की समस्या लंबे समय तक परेशान कर सकती है।

खांसी-जुकाम ठीक होने में ज्यादा समय क्यों लगता है?

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “खांसी-जुकाम वायरस की वजह से होता है और इस दौरान इंफेक्शन के कारण नाक और गले की अंदरूनी परत में सूजन और जलन हो सकती है। शरीर इंफेक्शन कम करने के लिए ज्यादा म्यूकस बनाने लगता है और यही म्यूकस जब गले के पीछे जाता है तो खांसी शुरू हो सकती है। कई मामलों में इंफेक्शन खत्म होने के बाद भी सांस की नलियां कुछ समय के लिए सेंसिटिव रहती हैं। ऐसे में धूल, धुआं, प्रदूषण, ठंडी हवा या तेज खुशबू जैसी चीजें खांसी को और ज्यादा बढ़ा सकती हैं। इस वजह से जुकाम और खांसी कुछ समय के लिए रह सकती है।”

उनका कहना है, “हालांकि, अगर खांसी लंबे समय तक रहती है, तो उसे नॉर्मल जुकाम या खांसी मान लेना सही नहीं है। कई बार एलर्जी, फ्लू, कोविड, साइनस, अस्थमा या फेफड़ों से जुड़ी दूसरी समस्याओं में भी खांसी और जुकाम जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए अगर जुकाम या खांसी लंबे समय तक रहती है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।”

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क्या कहते हैं जर्नल?

Harvard Health Publishing के अनुसार, अगर वायरल इंफेक्शन के कारण खांसी होती है, तो इसके साथ होने वाली खांसी कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाती है। अगर क्रोनिक खांसी 3 से 8 हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहती है, जो कभी-कभी महीनों या सालों तक खिंच सकती है। ऐसे में खांसी के कारणों को जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
इसके अलावा, क्रोनिक खांसी का कारण नाक भी हो सकता है। नाक वायरस, एलर्जी, साइनस, धूल के कण और हवा में मौजूद केमिकल नाक की झिल्ली में जलन पैदा कर सकते हैं। इसके लिए नाक की झिल्ली पतला और बहने वाला बलगम बनाने लगती है। यह बलगम गले के पीछे टपकता है और नाक में सूजन हो सकती है।

खांसी-जुकाम के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

Dr. Vineeta Singh Tandon लोगों को सलाह देती हैं कि प्रदूषण और धूल के कारण खांसी-जुकाम की समस्या थोड़ी ज्यादा लंबी खिंच सकती है। अगर खांसी-जुकाम के लक्षण हल्के होते हैं, तो शरीर को आराम देने और कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।

  1. आराम करें - बीमारी के दौरान शरीर इंफेक्शन से लड़ रहा होता है। इसलिए बहुत ज्यादा थका देने वाले काम करने से बचें और मरीज को पर्याप्त आराम करना चाहिए।
  2. पानी और तरल जरूर लें - पानी, सूप और दूसरे गुनगुने ड्रिंक्स शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते। इससे गले की जलन में भी कुछ राहत मिल सकती है।
  3. धूल-धुएं से दूर रहें - स्मोकिंग, प्रदूषण, धूल और तेज परफ्यूम जैसी चीजें सांस की नलियों को परेशान कर सकती हैं और खांसी बढ़ा सकती हैं। इसलिए जुकाम-खांसी होने पर इससे दूर रहना बेहतर रहता है।
  4. गले को आराम दें - गुनगुना पानी पीने से गले को आराम मिल सकता है। एक साल से ज्यादा उम्र के बच्चों और वयस्कों में शहद भी खांसी से राहत देने में मदद कर सकता है।
  5. हाइजीन का ध्यान रखें - खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढक लें और हाथों को रेगुलर धोते रहें। इससे इंफेक्शन दूसरे लोगों तक नहीं फैल पाएगी।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

Dr. Vineeta Singh Tandon कहती हैं, “वैसे तो आमतौर पर समय के साथ खांसी-जुकाम में सुधार होने लगता है, लेकिन अगर लक्षण लगातार बने हुए हैं, बढ़ रहे हैं या करीब 10 दिन बाद भी सुधार नहीं दिख रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। इसके अलावा, इन लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

  • सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना
  • सीने में दर्द
  • खांसी के साथ खून आना
  • बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना
  • शरीर में पानी की कमी होना
  • भ्रम, असामान्य नींद या बेहोशी जैसा महसूस होना

डॉक्टर की सलाह

Dr. Vineeta Singh Tandon सलाह देती हैं कि खांसी-जुकाम होने पर कई लोग तुरंत ही एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं, लेकिन वायरल जुकाम में एंटीबायोटिक काम नहीं करती। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी तरह की एंटीबायोटिक दवा लेने से बचना चाहिए। इसरे अलावा, खुद से किसी भी तरह की सर्दी, खांसी या जुकाम की दवाएं लेना समस्या को गंभीर कर सकता है। इसलिए वायरल इंफेक्शन होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

निष्कर्ष
वैसे तो खांसी-जुकाम कुछ दिनों में खुद ही ठीक हो जाता है, लेकिन जिन लोगों को पहले से अस्थमा, हार्ट या फेफड़ों की बीमारी, डायबिटीज या कमजोर इम्यूनिटी की समस्या है, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इसके अलावा, वायरल इंफेक्शन में दवा, आराम और पर्याप्त फ्लूड लेते रहना चाहिए।

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FAQ

  • रात में सोने के बाद ही खांसी का दौरा ज्यादा क्यों बढ़ जाता है?

    लेटने पर नाक और साइनस का बलगम गले के पीछे जमा होने लगता है। इससे गले में खराश होती है और खांसी ट्रिगर होती है। सोते समय सिर के नीचे 2 तकिए लगाकर लेटने से राहत मिलती है।
  • क्या कफ सिरप पीने से खांसी तुरंत ठीक हो जाती है?

    कफ सिरप केवल कुछ समय के लिए गले की खराश और खांसी के रिफ्लेक्स को दबाते हैं, बीमारी को खत्म नहीं करते। सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी के लिए अलग-अलग दवाएं होती हैं, जो डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 01, 2026 19:32 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Vineeta Singh Tandon