Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

जाती सर्दी में कहीं भारी न पड़ जाए रोज काढ़ा पीना, जानें क्यों बदल देनी चाहिए इस मौसम में काढ़े की रेसिपी

जाती सर्दी में ऐसा काढ़ा पिएं, जो आपको सर्दी-जुकाम और खांसी की समस्या को दूर करे। साथ ही, उसकी तासीर भी अधिक गर्म न हो। जानें, इस काढ़े की रेसिपी और फायदों के बारे में।

Kadha For Winter End Benefits Recipe: सर्दी जा रही है और जल्द ही गर्मी का मौसम आने वाला है। इस दौरान दिन में गर्मी का एहसास होता है, जबकि सुबह और रात के समय ठंड लगती है। इस बदलते मौसम में वूलेन कपड़े पहनने हैं या सूती, समझ ही नहीं आता है। गर्म कपड़े पहनो तो ठंड लगती है और सूती कपड़े पहनें तो सर्दी-जुकाम लगने का रिस्क रहता है। बदलते मौसम में इस तरह की कशमश सबकी बनी रहती है। निश्चित रूप से आपके साथ भी ऐसा होता होगा। कई बार तमाम कोशिशों के बावजूद सर्दी-खांसी हो जाती है। इस तरह की परिस्थितियों में काढ़ा एक अच्छा विकल्प होता है। हालांकि, कड़ाके की सर्दी में काढ़ा पीना शरीर के लिए सुरक्षित होता है। इसलिए, यह सवाल जरूर मन में उठता है कि क्या जाती सर्दी में काढ़ा पीना सेफ है? आइए, जानते हैं कि इन दिनों किस तरह का काढ़ा पीना होता है और उसकी रेसिपी क्या है? इस बारे में जानने के लिए हमने सिरसा के रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से बात की।

जाती सर्दी के काढ़े की रेसिपी- Recipe Of Kadha For Winter End

  1. तुलसी, मघ, सोंठ और बहेड़ा आवश्यकतानुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लें।
  2. सभी सामग्री को एक साथ पानी में उबाल लें।
  3. उबाल आने पर गैस बंद कर दें।
  4. आपका सर्दियों का काढ़ा तैयार है।

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जाती सर्दी में काढ़ा पीने के फायदे- Benefits Of Kadha For Winter End

kadha recipe and benefits for season change 01 (11)

चूंकि, इस काढ़े के बनाने में ऐसी सामग्रियों का उपयोग नहीं किया जा रहा है, जो कि अधिक गर्म है। इसलिए, इसे जाती सर्दी में सीमित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है। इससे आपको कई तरह के लाभ मिल सकते हैं, जैसे जाती सर्दी में अक्सर लोग बंद नाक या बहनी नाक से परेशान रहते हैं। असल में, यह मौसम बुहत सेंसिटिव होता है और जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, वे आसानी से बीमार पड़ सकते हैं। वहीं, जब आप सीमित मात्रा में घर में बने इस तुलसी, मघ, सोंठ और बहेड़ा से बने काढ़े का सेवन करते हैं, तो इसमें मौजूद इंफ्लेमेटरी तत्व सेहत में सुधार करते हैं, इम्यूनिटी बूस्ट करते हैं और बंद नाक की समस्या से राहत दिलाते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार सर्दी-जुकाम से कैसे बचें?

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मौसम में सर्दी-जुकाम से बचने के लिए कुछ टिप्स अपनाने जरूरी हैं, जैसे-

क्रम क्या न करें क्या करें
1. जब भी घर से बाहर निकलें मास्क जरूर पहनें। उबला हुआ सलाद खाएं।
2. डेयरी प्रोडक्ट का सेवन कम करें। हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें।
3. रात को लेट नाइट डिनर न करें। हल्का मील लें।
4. तली-भुनी चीजों से दूर रहें। भूख न हो, तो न खाएं।
5. अनाज का सेवन कम करें।  

एक्सपर्ट की सलाह

चूंकि, मौसम बदल रहा है। बदलते मौसम में हम काढ़े के लिए ऐसी सामग्री का उपयोग नहीं करेंगे, जिनकी तासीर बहुत ज्यादा गर्म है। जैसे काली मिर्च का इस्तेमाल करना सही नहीं है। असल में अब पित्त बढ़ने का समय है, इसलिए काली मिर्च जैसी तीक्ष्ण चीजें पेट में जलन कर सकती हैं। इसके अलावा, काढ़ा बनाते वक्त यह भी ध्यान रखें कि आापको किस तरह का बलगम आ रहा है? अगर पीला या हरा बलगम आ रहा है, तो यह पित्त का लक्षण है। ऐसे में आपको सौंठ और तुलसी से बना काढ़ा पी सकते हैं। हां, इसके साथ-साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि काढ़ा बहुत देर तक उबालें नहीं और न ही इसकी मात्रा अधिक रखें। साथ ही अगर किसी को एसिडिटी की समस्या है, तो उन्हें भी इसका सेवन कम करना चाहिए।

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निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि हमें जाती सर्दी में काढ़ा बनाने के लिए ऐसी सामग्री का उपयोग करना है, जिन्हें हजम करना मुश्किल न हो। जैसे यहां बताए गए काढ़े में तुलसी, बहेड़ा और मघ का इस्तेमाल किया गया है। तुलसी की तासीर हल्की गर्म होती है, बहेड़ा की तासरी ठंडी होती है और मघ की तासीर भी गर्म मानी जाती है। बहरहाल, आप अपनी जरूरत और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काढ़ा तैयार कर सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि अगर किसी सामग्री से एलर्जी है, तो इसका उपयोग न करें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या इस मौसम में काली मिर्च वाला काढ़ा नुकसान कर सकता है?

    विशेषज्ञों के अनुसार काली मिर्च का तासीर काफी ज्यादा गर्म होती है। इसका सेवन करने से पित्त बढ़ता है। इसलिए, अगर पहले से ही पित्त हाई है, तो काली मिर्च वाले काढ़े का सेवन न करें।
  • एक दिन में कितना काढ़ा पीना सुरक्षित है?

    बदलते मौसम में दिन में सिर्फ एक बार काढ़ा पीना पर्याप्त होता है। आप खाली पेट काढ़ा न पिएं।
  • क्या बच्चों को काढ़ा दिया जा सकता है?

    अगर आपका बच्चा 5 साल से अधिक उम्र का है, तो आप उसे महज दो चम्मच काढ़ा पिला सकते हैं। हालांकि, सभी सामग्री की मात्रा का ध्यान अवश्य रखें।

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Disclaimer

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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