क्या कोई व्यक्ति पूरी तरह हेल्दी दिखाई देने के बावजूद कैंसर से पीड़ित हो सकता है? क्या बिना दर्द, गांठ या किसी दूसरी परेशानी के भी शरीर में कैंसर हो सकता है? इन सवालों को लेकर अक्सर लोगों के मन में उलझन रहती है। आमतौर पर लोग तभी डॉक्टर के पास जाते हैं, जब शरीर में कोई असामान्य बदलाव दिखाई देने लगता है लेकिन कैंसर के मामले में लक्षणों का इंतजार करना कई बार भारी पड़ सकता है। मणिपाल अस्पताल भुवनेश्वर के सलाहकार मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर में शुरुआती अवस्था में लक्षण न होना संभव है। जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है, जो लंबे समय से धूम्रपान करते हैं या अन्य जोखिम कारकों से प्रभावित हैं, उन्हें कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
क्या बिना लक्षणों के भी कैंसर हो सकता है?
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, बिना किसी खास लक्षण के भी कैंसर हो सकता है। कैंसर की शुरुआती स्टेज में शरीर की सेल्स में असामान्य बदलाव होने लगते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि इन बदलावों का असर तुरंत शरीर पर दिखाई दे। कई बार बीमारी शुरुआती स्टेज में होती है, लेकिन व्यक्ति को इसके बारे में पता भी नहीं चलता है।
डॉक्टर सचिन बिस्वाल बताते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर यानी बड़ी आंत के कैंसर में शुरुआती अवस्था में लक्षण दिखाई न देना संभव है। ऐसे में व्यक्ति को बीमारी का पता स्क्रीनिंग या किसी अन्य जांच के दौरान चल सकता है। इसलिए यह मानना सही नहीं है कि अगर शरीर में दर्द या कोई परेशानी नहीं है, तो कैंसर होने की आशंका भी नहीं है।
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- कैंसर की बीमारी जब आगे बढ़ने लगती है, तब कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं। इनमें बिना किसी कारण वजन कम होना, शरीर में गांठ महसूस होना, असामान्य ब्लीडिंग और लगातार खांसी शामिल हैं।
- डॉक्टर के अनुसार, इन लक्षणों के सामने आने तक कुछ मामलों में कैंसर बढ़ चुका हो सकता है।
- इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर जांच करवाने का फैसला नहीं करना चाहिए।
- खासकर जिन लोगों में कैंसर होने का जोखिम ज्यादा है, उन्हें डॉक्टर से स्क्रीनिंग के बारे में बात करनी चाहिए।
किन लोगों को नियमित कैंसर स्क्रीनिंग की जरूरत होती है?
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल सलाह देते हैं कि हर व्यक्ति को एक जैसी कैंसर स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं होती है। कुछ खास जोखिम वाले लोगों को अपनी उम्र और मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार जांच करवानी चाहिए।
- अगर परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदारों को कैंसर हुआ है, तो डॉक्टर से अपने कैंसर के जोखिम के बारे में बात करें। कुछ कैंसर आनुवंशिक कारणों से भी हो सकते हैं।
- लंबे समय से धूम्रपान करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर लो-डोज सीटी स्कैन (Low-Dose CT Scan) से फेफड़ों की स्क्रीनिंग करवाने की सलाह दे सकते हैं।
- महिलाओं को उम्र और जोखिम के अनुसार ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। ब्रेस्ट कैंसर के लिए मैमोग्राफी और सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट की सलाह दी जा सकती है।
- उम्र बढ़ने के साथ कुछ कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए उम्र के अनुसार कोलोरेक्टल और अन्य कैंसर की स्क्रीनिंग पर ध्यान देना जरूरी है।
साल 2024 में Current Oncology जर्नल में प्रकाशित एनालिसिस के अनुसार, अस्पष्ट लक्षणों के साथ कैंसर की आशंका वाले मरीजों को शुरुआती और बेहतर डायग्नोस्टिक टूल्स की बहुत जरूरत है। अमेरिका के ऑन्कोलॉजी नेटवर्क पर किए गए इस शोध में पाया गया कि ऐसे लक्षणों के साथ आने वाले मरीजों में से लगभग 6.3% लोगों को एक साल के भीतर कैंसर की पुष्टि हुई, जिनमें से अधिकांश को ब्लड कैंसर था। रिजल्ट बताते हैं कि लक्षणों के दिखने के बाद कैंसर का पता लगाने में औसतन 5 हफ्ते से ज्यादा का समय लगा।
can cancer develop without symptoms
कैंसर स्क्रीनिंग कब और कौन-सी जांच करवानी चाहिए?
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सचिन शेखर बिस्वाल के अनुसार, कैंसर स्क्रीनिंग का समय हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। यह उसकी उम्र, पारिवारिक इतिहास यानी फैमली हिस्ट्री, धूम्रपान की आदत और मेडिकल हिस्ट्री पर निर्भर करता है।
- महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित मैमोग्राफी और सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट करवाना चाहिए।
- वहीं, लंबे समय से धूम्रपान करने वाले कुछ लोगों को फेफड़ों के कैंसर की पहचान के लिए लो-डोज सीटी स्कैन की जरूरत हो सकती है।
- इसके अलावा, बड़ी आंत के कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए उम्र और जोखिम के आधार पर स्टूल टेस्ट या कोलोनोस्कोपी की सलाह दी जा सकती है।
- ध्यान रखें कि हर व्यक्ति को सभी जांच करवाने की जरूरत नहीं होती। बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार स्कैन या कैंसर से जुड़े ब्लड टेस्ट करवाना भी सही नहीं है।
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निष्कर्ष
बिना किसी लक्षण के भी कैंसर हो सकता है और केवल दर्द या गांठ का इंतजार करने से बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है। डॉक्टर सचिन बिस्वाल के मुताबिक, जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास है, जो लंबे समय से धूम्रपान करते हैं या अन्य गंभीर कारकों से प्रभावित हैं, उन्हें नियमित स्क्रीनिंग के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। महिलाओं को ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की निर्धारित स्क्रीनिंग पर भी ध्यान देना चाहिए। सही समय पर उचित जांच करवाने से कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद मिल सकती है।
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FAQ
क्या कैंसर की शुरुआती पहचान होने पर मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है?
कई कैंसर में शुरुआती पहचान और सही समय पर इलाज मिलने से बेहतर रिजल्ट मिल सकते हैं। हालांकि, ठीक होने की संभावना कैंसर के प्रकार, स्टेज और मरीज की हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करती है।क्या शाकाहारी लोगों को भी कैंसर हो सकता है?
कैंसर किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। केवल शाकाहारी या मांसाहारी भोजन करने से कैंसर का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।
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Nov 03, 2026 16:56 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sachin Sekhar Biswal
