फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। इस बीमारी की गंभीरता को समझने और सही इलाज तय करने के लिए इसका स्टेज पता होना जरूरी होता है। लंग कैंसर की स्टेज यह समझने में मदद करती है कि बीमारी फेफड़े में कितनी सीमित है और आसपास के हिस्सों या शरीर के दूसरे अंगों तक कितना फैला है। फेफड़ों के कैंसर की ये चार स्टेज ट्यूमर के आकार, उसकी स्थिति और शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने की क्षमता को दिखाते हैं। लंग कैंसर की शुरुआत यानी पहली स्टेज में इसका पता चलना मरीज के लिए काफी फायदेमंद होता है, जबकि चौथी स्टेज तक आते-आते यह बहुत खतरनाक रूप ले लेता है। इसलिए, आइए Dr. Mandeep Singh Malhotra, Oncologist, Art of Healing Cancer, Delhi से जानते हैं कि फेफड़ों के कैंसर के 4 स्टेज क्या हैं और इनका मतलब क्या होता है
लंग कैंसर स्टेज 1
Dr. Mandeep Singh Malhotra बताते हैं कि स्टेज 1 में लंग कैंसर आमतौर पर फेफड़े तक ही सीमित होता है और आसपास के लिम्फ नोड्स तक नहीं फैलता है। इस स्टेज में बीमारी सीमित रहती है, इसलिए मरीज की स्थिति और कैंसर के प्रकार के आधार पर इलाज के विकल्पों में सर्जरी जैसे इलाज अहम भूमिका निभा सकते हैं।
साल 2023 में Clinical Lung Cancer जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च स्टडी के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर को शुरुआती स्टेज में पहचाने जाने वाले मरीजों की संख्या 2004 में 17% थी, जो 2018 तक बढ़कर 28% हो गई। स्टेज 1 में बीमारी का जल्दी पता चलने से मरीजों के जीवित रहने की संभावना बढ गई है।
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लंग कैंसर स्टेज 2
स्टेज 2 लंग कैंसर में ट्यूमर बड़ा हो सकता है या कैंसर आसपास के लिम्फ नोड्स तक पहुंच सकता है। बीमारी अभी भी मुख्य रूप से छाती तक ही सीमित हो सकती है, लेकिन इलाज की योजना स्टेज 1 की तुलना में अलग हो सकती है। ट्यूमर के आकार और लिम्फ नोड्स की स्थिति के आधार पर इलाज अलग-अलग हो सकता है।
साल 2025 में Journal of Thoracic Disease जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर का स्टेज 2 के मरीजों में अक्सर ट्यूमर निकालने के लिए सर्जरी की जाती है। इसके बाद, डॉक्टर कीमोथेरेपी की सलाह देते हैं, ताकि कैंसर के वापस आने के खतरे को कम किया जा सके और मरीज के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना बढ़ सके।
लंग कैंसर स्टेज 3
फेफड़ों के कैंसर में स्टेज 3 आमतौर पर स्थानीय रूप से फैला हुआ लंग कैंसर माना जाता है। इस स्टेज में कैंसर सीने के अंदर आसपास के टिश्यू या जरूरी लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है। कुछ मरीजों में सर्जरी की स्थिति हो सकती है, जबकि कई मामलों में रेडिएशन, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी या कई ट्रीटमेंट एक साथ किया जा सकता है।

साल 2023 में Current Oncology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, स्टेज 3 के मरीजों में स्मोकिंग एक बड़ा जोखिम पाया गया है। आंकड़ों के अनुसार, इस स्टेज के लगभग 58% मरीज स्मोकिं करने वाले होते हैं, जबकि कभी धूम्रपान न करने वालों की संख्या बहुत कम यानी 4% से 11% के बीच होती है। अलग-अलग स्थितियों के आधार पर, इस स्टेज में जीवित रहने की दर लगभग 13% से 36% के बीच होती है
लंग कैंसर स्टेज 4
लंग कैंसर स्टेज 4 में फेफड़े से दूर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका होता है। इसे मेटास्टैटिक फेफड़ों का कैंसर कहा जाता है। इस स्टेज में इलाज का मकसद बीमारी को कंट्रोल करना, उसके बढ़ने की गति को कम करना, लक्षणों से राहत पाना और मरीज की लाइफ क्वालिटी को बनाए रखना होता है। इलाज कैंसर के प्रकार, उसके मॉलिक्यूलर या जेनेटिक विशेषताओं, मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति और बीमारी के फैलने के आधार पर किया जाता है।
साल 2013 में Indian Journal of Medical and Paediatric Oncology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, स्टेज 4 में कैंसर फेफड़ों से निकलकर शरीर के दूसरे अंगों तक फैल चुका है। यह आमतौर पर दिमाग, हड्डियों, लिवर और एड्रिनल ग्लैंड्स में फैलता है। लगभग 20% से 50% मरीजों में कैंसर का पता इसी स्टेज पर चलता है।
इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि स्टेज 4 लंग कैंसर मरीजों में औसत जीवीत रहने का समय 7 से 11 महीने होता है। हालांकि, अगर कैंसर शरीर के किसी एक ही बाहरी हिस्से में फैला है, तो सर्जरी के जरिए जीवीत रहने की संभावना को बढ़ाया जा सकता है।
डॉक्टर की राय
Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं कि यह समझना जरूरी है कि एक ही स्टेज के हर मरीज की स्थिति एक जैसी हो यह जरूरी नहीं होती है। खासकर, स्टेज 1 से 4 के अंदर भी अलग-अलग सब-स्टेज होते हैं और इलाज का फैसला सिर्फ स्टेज देखकर नहीं किया जाता है। इसलिए, मरीज की रिपोर्ट, बायोप्सी, इमेजिंग और अन्य जांचों को एक साथ देखकर इलाज की प्लानिंग डॉक्टर करते हैं।
निष्कर्ष
Dr. Mandeep Singh Malhotra का कहना है कि लंग कैंसर की स्टेज से बीमारी की गंभीरता का पता चलता है, लेकिन यह मरीज की बीमारी का इकलौता पैमाना नहीं होता है। सही, जांच, कैंसर के प्रकार, उसके जीन और मरीज की सेहत भी इलाज और नतीजों पर बहुत असर डालते हैं। इसलिए, सिर्फ स्टेज को देखकर बीमारी को लेकर निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि डॉक्टर की सलाह से पूरी मेडिकल रिपोर्ट पर ध्यान देना जरूरी है। सही समय पर सही इलाज की स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।
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FAQ
लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
लंग कैंसर के शुरुआती लक्षणों में लगातार रहने वाली और समय के साथ बदतर होने वाली खांसी, खांसी में खून आना, बिना किसी कारण सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द और थकान भी शामिल हैं।फेफड़ों का कैंसर क्यों होता है?
फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से स्मोकिंग या लंबे समय तक पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में रहने के कारण होता है। इसके अलावा, वायु प्रदूषण, हानिकारक केमिकल के संपर्क में आना और जेनेटिक कारण भी फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
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Aug 19, 2026 16:54 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra