कैंसर के इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन कराना बहुत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन कई बार मरीजों को इलाज पूरा होने के बाद रेडिएशन थेरेपी से जुड़े साइड इफेक्ट्स नजर आने लगते हैं। अगर रेडिएशन पेल्विक एरिया के आस-पास दिया हो, तो मरीजों को समय के साथ पेशाब, पॉटी और सेक्शुअल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं होने का रिस्क देखा गया है। इस बारे में दिल्ली के Art of Healing Cancer के Oncologist Dr. Mandeep Singh Malhotra ने बताया कि कुछ मामलों में मरीजों को रेडिएशन थेरेपी के बाद शरीर में कुछ बदलाव महसूस हो सकते हैं, लेकिन हर मामले में ऐसा होना जरूरी नहीं है। इसलिए अगर मरीज को कुछ भी बदलाव नजर आए, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
रेडिएशन थेरेपी पेल्विक फ्लोर में देने पर क्या होता है?
Dr. Mandeep Malhotra कहते हैं, “पेल्विक फ्लोर शरीर के निचले हिस्से में मौजूद होता है, जो ब्लैडर, आंत और रिप्रोडक्टिव अंगों के लिए जरूरी होता है। यही मांसपेशियां पेशाब और मल पर कंट्रोल बनाए रखने में मदद करती है। जब कैंसर के इलाज के दौरान पेल्विक एरिया में रेडिएशन थेरेपी दी जाती है, तो ये रेडिएशन कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के साथ-साथ हेल्दी टिश्यू को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में कई बार सूजन, फाइब्रोसिस, ब्लड फ्लो कम होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इससे पेल्विक डिस्फंक्शन होने का रिस्क बढ़ सकता है।”
National Cancer Institute (NCI) के मुताबिक, रेडिएशन थेरेपी के कुछ साइड इफेक्ट इलाज खत्म होने के महीनों या सालों बाद भी दिख सकते हैं। पेल्विक एरिया में रेडिएशन के बाद आंत, रेक्टम, ब्लैडर और सेक्शुअल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
पेल्विक फ्लोर से जुड़ी कौन सी समस्याएं हो सकती हैं?
Dr. Mandeep Malhotra ने बताया कि पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्या होने पर किसी मरीज को एक लक्षण परेशान कर सकता है, तो किसी को कई लक्षण एक साथ हो सकते हैं। अगर किसी को रेडिएशन थेरेपी के बाद ये समस्याएं हों, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
- बार-बार पेशाब लगना
- पेशाब रोकने में परेशानी
- पेशाब करते समय दर्द या असहजता
- कब्ज या मल त्याग में परेशानी
- पॉटी पर कंट्रोल कम होना
- पेल्विक एरिया में लगातार दर्द
- सेक्शुअल इंटिमेसी के दौरान दर्द
- महिलाओं में योनि का कम लचीला या संकुचित होना
- पुरुषों में टेस्टिकल्स से जुड़ी परेशानियां
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पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन की जांच कैसे होती है?
Dr. Mandeep Malhotra ने बताया कि कई मरीज रेडिएशन के बाद होने वाली पेशाब, मल या पेल्विक परेशानी को रिकवरी में देरी होना मान लेते हैं और डॉक्टर से सलाह नहीं लेते। अगर किसी को लगातार ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो जांच कराना बहुत जरूरी है। इसमें सबसे पहले मरीज के लक्षणों, इलाज के तरीकों और मेडिकल हिस्ट्री चेक करते हैं। इसके बाद मरीजों में पेल्विक फ्लोर मसल्स की जांच की जा सकती है। लक्षणों के आधार पर यूरोडायनामिक स्टडी, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई या सिस्टोस्कोपी की जांच की सलाह दी जा सकती है।
पेल्विक फ्लोर डिस्फंक्शन से बचाव के तरीके
Dr. Mandeep Malhotra ने कहा कि पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि लक्षण कितने गंभीर हैं। मरीजों को रेडिएशन थेरेपी के बाद कुछ ये तरीके अपनाने की सलाह दी जा सकती है।
- अनुभवी ट्रेनर से फिजियोथेरेपी कराना
- अनुभवी ट्रेनर की मदद से पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज और केगल एक्सरसाइज करना
- ब्लैडर ट्रेनिंग भी कराने की सलाह दी जा सकती है।
- महिलाओं को रेडिएशन के बाद वजाइना टाइट होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि कब्ज जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
डॉक्टर की सलाह
Dr. Mandeep Malhotra ने कहा, “रेडिएशन थेरेपी लेने वाले हर मरीज को पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन नहीं होता।
यह काफी हद रेडिएशन की मात्रा, किस हिस्से में इलाज हुआ, साथ में सर्जरी या अन्य इलाज हुए है या नहीं और मरीज की मेडिकल कंडीशन पर निर्भर करता है। इसलिए हर मरीज को पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्या नहीं हो सकती है। इसके साथ, सबसे जरूरी बात यह है कि कोई नया या लगातार लक्षण बना रहे, तो डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज जरूर कराएं।”
निष्कर्ष
कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी जरूरी है। इसे कराना बहुत जरूरी है, लेकिन अगर रेडिएशन थेरेपी पेल्विक एरिया दी गई हो और मरीजों को पेशाब, पॉटी या रिप्रोडेक्टिव अंगों से जुड़े लक्षण महसूस हो, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि पेल्विक फ्लोर पर रेडिएशन थेरेपी के बाद हर मरीज को लक्षण दिखाई दें। इसलिए सबसे जरूरी है कि कैंसर का इलाज पूरा कराया जाए और इसके बाद अगर कोई नया बदलाव या लक्षण महसूस होता है, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
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FAQ
रेडिएशन थेरेपी के कितने समय बाद पेशाब और पॉटी की यह समस्या ठीक होती है?
ज्यादातर मामलों में यह समस्या इलाज खत्म होने के 4 से 12 हफ्तों के भीतर धीरे-धीरे ठीक होने लगती है। हालांकि, कुछ मरीजों में क्रोनिक साइड इफेक्ट्स के कारण यह समस्या कुछ महीनों या सालों तक भी बनी रह सकती है।पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी से इस समस्या में कितना फायदा होता है?
रेडिएशन के कारण पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां सख्त या बहुत कमजोर हो जाती हैं। अगर एक अनुभवी पेल्विक फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में की जाने वाली एक्सरसाइज, पेल्विक री-एजुकेशन और मसाज थेरेपी से पेशाब और मल दोनों पर नियंत्रण वापस पाने में 70% तक सुधार हो सकता है।
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Current Version
Sep 22, 2026 12:57 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra
