Mon Oct 19, 2026 | 07:26 PM IST

Medically Reviewed by Dr Himika Chawla , Senior Consultant – Endocrinology & Diabetology

डायबिटीज की रिपोर्ट कैसे पढ़ें? डॉक्टर से जानें ब्लड शुगर टेस्ट समझने का आसान तरीका

ब्लड शुगर बढ़ने पर डायबिटीज का टेस्ट कराया जाता है। जब ब्लड शुगर रिपोर्ट आती है, तो लोगों को समझ नहीं आता कि डायबिटीज की रिपोर्ट में कौन-से फैक्टर जरूरी है।
डायबिटीज की रिपोर्ट कैसे पढ़ें? डॉक्टर से जानें ब्लड शुगर टेस्ट समझने का आसान तरीकाडायबिटीज की रिपोर्ट कैसे पढ़ें? डॉक्टर से जानें ब्लड शुगर टेस्ट समझने का आसान तरीका

जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उन्हें ब्लड शुगर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।  जब डायबिटीज की रिपोर्ट हाथ में आती है, तो लोग ब्लड शुगर की वैल्यू चेक करते हैं, लेकिन सिर्फ एक नंबर देखकर यह समझना मुश्किल हो सकता है कि शुगर कंट्रोल में है या नहीं। इसलिए डायबिटीज की रिपोर्ट को आसानी से कैसे पढ़ा जा सकता है? जानने के लिए हमने दिल्ली स्थित PSRI Hospital में Senior Consultant, Endocrinology and Diabetology Dr. Himika Chawla बात की। उन्होंने बताया कि ब्लड शुगर की रिपोर्ट में खाली पेट टेस्ट, खाने के बाद टेस्ट और HbA1c कितना है? यह जानना भी जरूरी है।

फास्टिंग ब्लड शुगर कैसे चेक की जाती है?

Dr. Himika Chawla कहती हैं, “जिन लोगों में ब्लड शुगर बढ़े होने के संकेत दिखते हैं, उन्हें फास्टिंग ब्लड शुगर चेक करने की सलाह भी दी जा सकती है। इसमें मरीज को कम से कम 8 घंटे तक कुछ भी खाना-पीना नहीं होता। लंबे समय तक बिना कुछ खाएं-पिएं यह चेक किया जाता है कि खाली पेट ब्लड शुगर का स्तर कितना है। इस बात का जरूर ध्यान रखें कि अगर सिर्फ एक बार ही शुगर बढ़ी हुई आई है, तो डायबिटीज की पुष्टि नहीं की जा सकती है। इसलिए अगर स्पष्ट लक्षण नहीं मिलते, तो कुछ दिन बाद दोबारा फास्टिंग ब्लड शुगर की जांच कराने की सलाह दी जा सकती है।”

Cleveland Clinic के मुताबिक, फास्टिंग ब्लड शुगर के वैल्यू को कुछ ऐसे पढ़ा जा सकता है।

  • 100 mg/dL से कम - फास्टिंग ब्लड शुगर का नॉर्मल लेवल है।
  • 100 से 125 mg/dL - इस सीमा में ब्लड शुगर का स्तर प्रीडायबिटीज का संकेत होता है।
  • 126 mg/dL या उससे ज्यादा - यह हाई ब्लड शुगर का संकेत है, जो डायबिटीज का मुख्य लक्षण है।

खाने के बाद ब्लड शुगर कैसे चेक की जाती है?

Dr. Himika Chawla ने कहा, “खाने के बाद ब्लड शुगर की जांच से समझा जाता है कि शरीर में शुगर का स्तर कितना है। सबसे जरूरी बात यह है कि रोजाना खाना खाने के दो घंटे बाद की गई जांच (PBBS) और ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) एक जैसे नहीं होते हैं। OGTT में मरीज को तय मात्रा में ग्लूकोज का घोल पिलाया जाता है और फिर निर्धारित समय पर ब्लड शुगर मापी जाती है। वहीं PBBS में नॉर्मल खाना खाने के दो घंटे बाद ब्लड शुगर मापा जाता है। कई बार लोग इन दोनों में कन्फ्यूज हो जाते हैं।”

American Dibetes Association के अनुसार, इन परिणामों को ऐसे चेक किया जा सकता है।

परिणाम

ब्लड शुगर का स्तर
OGTT

ब्लड शुगर का स्तर
PBBS

सामान्य 

140 mg/dL से कम

140 mg/dL से कम

प्रीडायबिटीज 

140 से 199 mg/dL

140 से 199 mg/dL

डायबिटीज 

200 mg/dL या उससे अधिक

200 mg/dL या उससे अधिक

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HbA1C टेस्ट से क्या पता चलता है?

Dr. Himika Chawla बताती है कि HbA1C बहुत महत्वपूर्ण टेस्ट है। यह लगभग पिछले 2 से 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर का अंदाजा देता है। फास्टिंग टेस्ट की तरह इसके लिए खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती। अगर कोई पहले से ही डायबिटीज का मरीज है, तो HbA1C की मदद से यह देखा जा सकता है कि पिछले कुछ महीनों में शुगर का औसत स्तर कैसा रहा है। डायबिटीज के कई वयस्क मरीजों के लिए HbA1C 7% से कम रखा जाता है और इसके वैल्यू मरीज की उम्र, दूसरी बीमारियां, इलाज और शुगर बहुत कम होने यानी हाइपोग्लाइसीमिया का रिस्क को देखकर तय की जाती है।

CDC के मुताबिक, HbA1C की इस रेंज के अनुसार ही डायबिटीज और प्रीडायबिटीज चेक किया जाता है।
सामान्य - 5.7% से कम
प्रीडायबिटीज - 5.7% से 6.4%
डायबिटीज - 6.5% या उससे अधिक
अगर आप इसे औसत ब्लड शुगर के तौर पर चेक करना चाहते हैं, तो कुछ ऐसे जांच सकते हैं।

A1C का स्तर (%)

 औसत ब्लड शुगर (mg/dL)

कंडीशन

5.7% से कम

117 mg/dL से कम

सामान्य

5.7% - 6.4%

117−137 mg/dL

प्रीडायबिटीज 

6.50%

140 mg/dL

डायबिटीज 

7.00%

154 mg/dL

डायबिटीज बढ़ना

8.00%

183 mg/dL

ब्लड शुगर का बहुत ज्यादा लेवल होना 

9.00%

212 mg/dL

तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी 

ब्लड शुगर बढ़ने पर ये जांच भी जरूरी

Dr. Himika Chawla कहती हैं, “अगर डायबिटीज के मरीज की ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ी रहती है, तो इसका असर किडनी, आंखों और हार्ट पर भी पड़ सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीज को ये चेकअप कराने की भी सलाह दी जा सकती है।”

  • किडनी की जांच - खून में क्रिएटिनिन और eGFR से किडनी की कार्यक्षमता का पता लगाने में मदद मिलती है।
  • पेशाब में एल्ब्यूमिन - इस जांच से किडनी को शुरुआती नुकसान के लक्षण पता चल सकते हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल की जांच- इससे खून में फैट के लेवल का पता चलता है, जो हार्ट की सेहत से जुड़ा होता है।
  • आंखों की जांच - डायबिटीज के मरीजों को रेगुलर आंखों की जांच करानी चाहिए, ताकि आंखों में होने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सके।

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डॉक्टर की सलाह

Dr. Himika Chawla कहती हैं कि कई बार मरीज पहली बार रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट कराते हैं, तो उनका ब्लड शुगर बढ़ा हुआ आ सकता है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं होती। कई बार स्ट्रेस, दवा या किसी अन्य कारण से ब्लड शुगर बढ़ा हुआ आ सकता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है, क्योंकि डॉक्टर लक्षणों, उम्र और मेडिकल कंडीशन को देखते हुए आगे की जांच की सलाह देते हैं।

निष्कर्ष

डायबिटीज की रिपोर्ट पढ़ते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि फास्टिंग ब्लड शुगर से खाली पेट शुगर का स्तर कितना है, खाने के बाद की जांच भोजन के बाद होने वाले बदलाव को समझने में मदद करती है और HbA1c पिछले कुछ महीनों का औसत बताता है। इसलिए तीनों ही फैक्टर्स की जांच करना जरूरी है। हालांकि, किसी एक ही वैल्यू को देखकर यह तय न करें कि अब डायबिटीज कंट्रोल में है या नहीं। इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है।

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FAQ

  • क्या हीमोग्लोबिन की कमी से HbA1c टेस्ट की रिपोर्ट गलत आ सकती है?

    अगर शरीर में आयरन की कमी या गंभीर एनीमिया हो, तो लाल रक्त कोशिकाओं का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे HbA1c रिपोर्ट में शुगर लेवल गलत तरीके से बढ़ा हुआ दिख सकता है। 
  • घर पर नापी गई ग्लूकोमीटर की रीडिंग और लैब की ब्लड टेस्ट रिपोर्ट में अंतर क्यों होता है?

    ग्लूकोमीटर कैपिलरी ब्लड में उंगली से से ब्लड निकाला जाता है, जबकि लैब में वेन प्लाज्मा की जांच होती है। इसलिए ग्लूकोमीटर की रीडिंग में लैब रिपोर्ट की तुलना में 10% से 15% तक का अंतर होना पूरी तरह सामान्य माना जाता है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 19, 2026 17:54 IST

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