डायबिटीज का पता चलने के बाद ज्यादातर लोग सबसे पहले चाय में चीनी, मिठाई, शुगर ड्रिंक्स और दूसरी मीठी चीजों को अपनी डाइट से हटा देते हैं। कई लोगों को लगता है कि अब ब्लड शुगर अपने आप कंट्रोल में आ जाएगी लेकिन जब इसके बाद भी शुगर की रिपोर्ट बढ़ी हुई आती है, तो सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी के अनुसार, ब्लड शुगर का बढ़ना सिर्फ चीनी या मिठाई खाने से जुड़ा नहीं होता। शरीर के अंदर होने वाली कई प्रोसेस और रोजमर्रा की कुछ आदतें भी ग्लूकोज लेवल को प्रभावित कर सकती हैं।
अगर आप भी मीठा छोड़ने के बावजूद बार-बार हाई ब्लड शुगर देख रहे हैं, तो सिर्फ चीनी को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा। इस समस्या के पीछे छिपे कारणों को समझना और शुगर के पैटर्न पर ध्यान देना जरूरी है। डॉक्टर जी. कृष्ण मोहन रेड्डी से जानते हैं कि किन कारणों की वजह से मीठा छोड़ने के बाद भी ब्लड शुगर बढ़ सकती है और डायबिटीज मैनेजमेंट में किन बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मीठा छोड़ने के बाद भी शुगर क्यों बढ़ती है?
डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी के अनुसार, डायबिटीज में चीनी और ज्यादा मीठी चीजों का सेवन कम करना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि केवल चीनी बंद करने से ब्लड शुगर नॉर्मल लेवल में हो जाएगी। चावल, रोटी, ब्रेड, बिस्किट, नमकीन और अन्य कार्बोहाइड्रेट युक्त फूड्स भी पाचन के दौरान ग्लूकोज में बदलते हैं। इसलिए भोजन की कुल मात्रा, उसकी क्वालिटी और खाने का समय भी जरूरी होता है।
टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण शरीर की सेल्स इंसुलिन के प्रति ठीक से रिएक्ट नहीं कर पातीं। ऐसे में मीठा कम करने के बावजूद ब्लड शुगर बढ़ी रह सकती है।
1. सुबह उठते ही ब्लड शुगर बढ़ना
- डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी बताते हैं कि कुछ लोगों में रात को भोजन करने के बाद शुगर बहुत ज्यादा नहीं होती, लेकिन सुबह उठते ही ब्लड शुगर बढ़ी हुई मिलती है।
- सुबह के समय शरीर में कुछ हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनके कारण लिवर से ग्लूकोज का रिलीज बढ़ सकता है।
- डायबिटीज में इसका असर ब्लड शुगर बढ़ने के रूप में दिखाई दे सकता है।
2. तनाव और चिंता बढ़ा सकते हैं ब्लड शुगर
- डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी के अनुसार, लगातार तनाव को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मानसिक और शारीरिक तनाव के दौरान शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ सकते हैं जो ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित करते हैं।
- मानसिक तनाव टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में ब्लड ग्लूकोज बढ़ा सकता है।
- काम का तनाव, परिवार से जुड़ी चिंता, आर्थिक परेशानी या डायबिटीज को लेकर लगातार डर का असर आपकी शुगर मैनेजमेंट पर पड़ सकता है।
साल 2025 में Diabetologia जर्नल में प्रकाशित जानकारी के अनुसार,
- डेली लाइफ का तनाव इंसुलिन रेजिस्टेंस (IR) वाले लोगों में ग्लूकोज का लेवल काफी बढ़ा देता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
- इसलिए, डायबिटीज से बचाव और रोकथाम के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट को शामिल करना बहुत जरूरी है।
- इस खतरे को रोकने के लिए व्यक्तिगत लेवल पर सही कदम उठाने की जरूरत है।
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3. नींद पूरी न होना
- डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी बताते हैं कि अगर आप रोज पर्याप्त नींद नहीं ले रहे हैं, तो केवल मीठा छोड़ना पर्याप्त नहीं हो सकता।
- बहुत कम या बहुत ज्यादा नींद ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित कर सकती है। नींद की कमी से शरीर इंसुलिन का इस्तेमाल कम प्रभावी तरीके से कर सकता है।
- इसलिए डायबिटीज में खान-पान के साथ नींद के समय और उसकी क्वालिटी पर भी ध्यान देना जरूरी है।
4. बीमारी या इंफेक्शन का असर
- कभी-कभी सर्दी-जुकाम, इंफेक्शन, बुखार या शरीर में किसी अन्य बीमारी के दौरान ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाती है।
- इसका कारण यह है कि बीमारी शरीर के लिए एक तरह का फिजिकल स्ट्रेस पैदा कर सकती है।
- ऐसे समय में व्यक्ति मीठा बिल्कुल न खा रहा हो, फिर भी शुगर सामान्य से ज्यादा आ सकती है।
5. एक्सरसाइज कम करना और बैठे रहना
- डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी बताते हैं कि फिजिकल एक्टिविटी भी ब्लड शुगर मैनेजमेंट का अहम हिस्सा है।
- नियमित एक्टिविटी शरीर को ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद करती है।
- इसके विपरीत, लंबे समय तक बैठे रहना और रोजाना पर्याप्त एक्टिविटी न करना शुगर कंट्रोल को मुश्किल बना सकता है।
- डायबिटीज मैनेजमेंट में नियमित फिजिकल एक्टिविटी को जरूरी माना जाता है।
- इसलिए केवल मीठा छोड़ने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपने डेली रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी शामिल करना जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. जी. कृष्ण मोहन रेड्डी का कहना है कि कई बार लोग खान-पान का पूरा ध्यान रखते हैं, लेकिन दवाएं पर्याप्त प्रभावी नहीं रह जातीं या बीमारी के बदलते लेवल के अनुसार इलाज में बदलाव की जरूरत होती है। कुछ दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए बार-बार शुगर बढ़ने पर खुद से दवा की मात्रा बढ़ाना या बंद करना सही नहीं है। डॉक्टर से जांच करवाएं और उचित इलाज को फॉलो करें।
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साल 2026 में CDC में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, सनबर्न, आर्टिफिशियल स्वीटर्स, कॉफी, कम नींद, नाश्ता छोड़ना, सुबह के हॉर्मोनल बदलाव (डॉन फेनोमेनन), डिहाइड्रेशन, नोज स्प्रे और मसूड़ों की बीमारी जैसी कई छुपी हुई वजहें ब्लड शुगर को बढ़ा सकती हैं। हर व्यक्ति का शरीर इन चीजों पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। इसलिए, जब भी कोई नया भोजन या एक्टिविटी अपनाएं, तो अपने ब्लड शुगर की जांच जरूर करें ताकि यह समझ सकें कि आपका शरीर उस पर कैसे रिएक्ट करता है।
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निष्कर्ष
डायबिटीज में मीठा छोड़ना एक अच्छी आदत हो सकती है, लेकिन ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए सिर्फ चीनी बंद करना पर्याप्त नहीं है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा, तनाव, नींद, एक्सरसाइज, बीमारी, सुबह की हार्मोनल प्रोसेस और दवाओं जैसे कई कारण शुगर को प्रभावित कर सकते हैं। अगर मीठा छोड़ने के बावजूद आपकी शुगर लगातार बढ़ रही है, तो केवल खान-पान को दोष देने के बजाय डॉक्टर को अपनी पूरी स्थिति बताएं। बार-बार हाई शुगर होने पर इलाज में बदलाव की जरूरत हो सकती है।
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FAQ
क्या डायबिटीज में गुड़ सुरक्षित है?
गुड़ में भी शुगर होती है, इसलिए इन्हें डायबिटीज में असीमित मात्रा में लेना सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए। इनका इस्तेमाल करने से पहले अपनी डाइट और ब्लड शुगर के अनुसार एक्सपर्ट की सलाह लें।क्या खाना खाने के तुरंत बाद शुगर चेक करने से सही रीडिंग मिलती है?
ब्लड शुगर की रीडिंग इस बात पर निर्भर करती है कि आपने टेस्ट कब किया है। अलग-अलग समय पर ली गई रीडिंग की तुलना करने से कंफ्यूजन हो सकता है। डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर जांच करना ज्यादा सही होता है।क्या डायबिटीज में फल खाने से शुगर बढ़ती है?
फलों में नेचुरल शुगर होती है ऐसे में ज्यादा फल खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकती है। डायबिटीज में फल पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी पर्सनल डाइट के अनुसार मात्रा तय करना बेहतर होता है।
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Sep 21, 2026 13:56 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr. G. Krishna Mohan Reddy
