आमतौर पर डायबिटीज के मरीज चावल खाने से बचते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसकी वजह से शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह कंडीशन सही नहीं है। बहरहाल, क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के मरीज भी चावल का सेवन कर सकते हैं? हालांकि, सही तरीके से चावल खाया जाए, तो ब्लड शुगर स्पाइक नहीं करता है। इस लेख में हम जानेंगे कि डायबिटीज के मरीज के लिए चावल खाने का सही तरीका क्या है? इस संबंध में जानने के लिए हमने Delhi स्थित Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से बात की।
डायबिटीज में चावल खाने का सही तरीका क्या है?

डायटिशियन दिव्या गांधी कहती हैं कि डायबिटीज के मरीज भी चावल खा सकते हैं। हालांकि, उन्हें इसके सही तरीके का पता होना चाहिए-
चावल के सही विकल्प चुनें
डायबिटीज के मरीज सफेद चावल खाने से बचें। उनके लिए बासमती राइस और ब्राउन राइस अच्छे विकल्प हैं। ब्राउन राइस की बात करें, तो इसमें फाइबर सहित कई तरह के पोषक ततव हैं, जो पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। इससे ब्लड शुगर का स्तर भी संतुलित बना रहता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स लो है और यह मैग्नीशियम, विटामिन बी और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है। इसी तरह, बासमती चावल भी डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है। इसका जीआई कम होता है और पाचन प्रक्रिया में भी सुधार करता है।
National Institutes of Health (NIH) द्वारा प्रकाशित एक रिसर्च समरी रिपोर्ट के अनुसार, सप्ताह में 2 या उससे अधिक बार ब्राउन राइस (Brown Rice) खाने वाले व्यक्तियों में टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम 11 प्रतिशत कम देखा गया।
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पोर्शन साइज का रखें ध्यान
डायबिटीज के मरीजों के लिए सही तरह के चावल चुनना ही काफी नहीं है। उन्हें इसके पोर्शन साइज का भी पूरा ध्यान रखना है। दिव्या गांधी सलाह देती हैं कि डायबिटीज के मरीजों को हमेशा कम मात्रा में यानी प्रति सर्विंग में आधा कप पका हुआ चावल ही खाना चाहिए। इससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट का इनटेक संतुलित रहता है।
Diabetes & Metabolism Journal के अनुसार, छोटी कटोरी चावल खाने से मोटापा और हृदय संबंधी बीमारियों का रिस्क कम होता है और वजन को भी बढ़ने से रोकता है।
फाइबर और प्रोटीन साथ में लें
डायटिशियन दिव्या गांधी कहती हैं, "भले ही डायबिटीज के मरीज बासमती या ब्राउन राइस का सेवन करते हैं, जो कि फाइबर का अच्छा स्रोत है। इसके बावजूद, चावल के साथ फाइबर और प्रोटीन को शामिल करना आवश्यक होता है। दिव्या गांधी की मानें, तो चावल के साथ दाल, लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट के विकल्पों को चुनें। फाइबर और प्रोटीन को चावल के साथ लेने से शरीर में शुगर एक एब्जॉर्प्शन की गति धीमी होती है। ऐसे में ब्लड शुगर का स्तर संतुलित बना रहता है।"
पकाने का सही तरीका
डायटिशियन दिव्या गांधी आगे बताती हैं, "डायबिटीज के मरीजों को सही तरह से पके हुए चावल का भी विशेष महत्व है। आमतौर पर वे चावल को उबालकर खा सकते हैं, लेकिन उन्हें फ्राइड राइस नहीं खाना चाहिए। असल में, फ्राइड राइस पकाने की प्रक्रिया के दौरान तेल और तरह-तरह की अन्य चीजों का उपयोग किया जाता है। नतीजतन, फ्राइड राइस में कैलोरी और फैट की मात्रा बढ़ जाती है। यह ब्लड रेगुलेशन के लिए भी सही नहीं होता है। इसलिए, डायबिटीज के मरीजों को सादे चावल का ही सेवन करना चाहिए।"
खाने का सही समय
डायटिशियन दिव्या गांधी सलाह देती हैं, "चावल हमेशा दिन के समय खाना चाहिए। सवाल है, ऐसा क्यों? असल में दिन के समय शरीर एक्टिव रहता है, मेटाबॉलिज्म की गति तेज होती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी भी बेहतर तरीके से काम करती है। इस दौरान खाया गया चावल आसानी से पच जाता है और ब्लड शुगर का स्तर भी प्रभावित नहीं होता है। यहां तक कि चावल से मिले कार्बोहाइड्रेट की मदद से शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज करना आसान हो जाता है।"
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ब्राउन राइस या सफेद चावलः डायबिटीज में क्या है बेहतर?
हमारे यहां ज्यादातर घरों में सफेद चावल या रोटी सब्जियों के साथ खाई जाती है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों की बात करें, उन्हें अपने लिए समझदारी से सही चावल का चयन करना चाहिए। प्रसिद्ध ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के BMJ Open में प्रकाशित के अनुसार, सफेद चावल (White Rice) की तुलना में ब्राउन राइस (Brown Rice) का अधिक सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो जाता है। जानें इनमें मौजूद पोषक तत्वों के बारे में-
| क्रम | सफेद चावल | ब्राउन राइस |
| 1. | सफेद चावल में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है। | ब्राउन राइस एक तरह का साबुत अनाज है, जो डाइट्री फाइबर का अच्छा स्रोत है। |
| 2. | सफेद चवाल में पोषक तत्वों की कमी होती है। | ब्राउन राइस से पाचन क्षमता बेहतर होती है। |
| 3. | इसमें फाइबर नहीं पाया जाता है। | इसमें विटामिन-बी, आयरन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। |
| 4. | इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70 से 90 के बीच होता है। | इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50 से 55 के बीच है, जिसे कम माना जाता है। |
| 5. | यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है। | एक कटोरी ब्राउन राइस में 3.5 ग्राम फाइबर होता है। |
एक्सपर्ट की सलाह
डायबिटीज के मरीज चावल का सेवन कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें कुछ बातें का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जैसे इसका पोर्शन साइज सीमित करना चाहिए और इसे हमेशा फाइबर या प्रोटीन के साथ मिक्स करके खाना चाहिए। इसके अलावा, चावल खाने का सही समय भी निर्धारित करें। दिन के समय चावल खाने को फायदेमंद माना जाता है। हां, अगर चावल खाने के बाद किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या महसूस हो, तो बेहतर है कि इसे न खाएं।
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निष्कर्ष
डायबिटीज के मरीजों के लिए चावल एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, सफेद चावल की तुलना में आपको ब्राउन राइस को महत्व देना चाहिए। ब्राउन राइस में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं और यह ब्लड शुगर को भी संतुलित रखता है। इसके अलावा, इस बात का ध्यान रखें कि आपको ब्लड शुगर का स्तर सामान्यतः कितना रहता है? अगर आपका ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा है, तो डाइट में कितनी मात्रा में चावल को शामिल करना है, इस बारे में एक्सपर्ट से सटीक जानकारी मिल सकती है।
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FAQ
क्या पके हुए चावल को ठंडा करके खाने से उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो जाता है?
हां, पके हुए चावल को 12-24 घंटे के लिए फ्रिज में ठंडा करने पर उसमें मौजूद स्टार्च, रेजिस्टेंट स्टार्च में बदल जाता है। इसे दोबारा हल्का गर्म करके खाने से यह धीरे-धीरे पचता है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता।क्या डायबिटीज के मरीज राइस वॉटर के साथ बने चावल खा सकते हैं?
नहीं, मांड वाले चावल में घुला हुआ स्टार्च अधिक होता है, जो खून में शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ाता है।
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Sep 15, 2026 15:46 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dt Divya Gandhi