क्या इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर चावल खाना बंद कर देना चाहिए? यह सवाल उन लोगों के मन में अक्सर आता है जो ब्लड शुगर बढ़ने या डायबिटीज के खतरे को लेकर चिंतित रहते हैं। जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस में चावल को पूरी तरह बंद करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि उसे कितना और कैसे खाया जा रहा है। एक बड़ी प्लेट चावल अकेले खाने और सीमित मात्रा में चावल को दाल, सब्जियों और प्रोटीन के साथ खाने का असर एक जैसा नहीं होता है।
क्या चावल खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है?
डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो पाचन के बाद ग्लूकोज में बदलता है और ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। इसके बदले में शरीर इंसुलिन बनाता है, इसलिए चावल खाने के बाद इंसुलिन का रिएक्शन होना सामान्य है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चावल खाना सीधे इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बनता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस कई कारकों से जुड़ी समस्या है, जिसमें शरीर का एक्स्ट्रा फैट, फिजिकली एक्टिव न रहना, आनुवंशिक कारण और पूरी डाइट शामिल हो सकती है।
- डाइटीशियन अर्चना जैन के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस में चावल को पूरी तरह बंद करने के बजाय उसकी मात्रा पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
- एक साथ बहुत ज्यादा चावल खाने से कार्बोहाइड्रेट का सेवन बढ़ सकता है, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है।
- इसलिए अपनी प्लेट में चावल की मात्रा सीमित रखें और उसके साथ पर्याप्त सब्जियां तथा प्रोटीन शामिल करें। सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, वजन, फिजिकल एक्टिविटी और हेल्थ कंडीशन के अनुसार अलग हो सकती है।
- चावल को दाल, राजमा, चना, पनीर, दही या अन्य प्रोटीन सोर्स और सब्जियों के साथ खाना बेहतर बैलेंस दे सकता है।
- फाइबर और प्रोटीन वाले फूड्स भोजन को ज्यादा बैलेंस बनाने में मदद करते हैं और लंबे समय तक पेट भरा महसूस हो सकता है।
साल 2020 में Diabetes Care जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ज्यादा सफेद चावल खाने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है, खासकर दक्षिण एशिया में। इसके विपरीत, चीन जैसे अन्य क्षेत्रों में यह जोखिम कम देखा गया।
- डायबिटीज के इस तेजी से बढ़ते खतरे को रोकने के लिए, ज्यादा पॉलिश किए गए सफेद चावल की जगह दूसरे अनाज, हेल्दी चावल के प्रकार या दालों का सेवन करना चाहिए।
- इससे भोजन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है और चावल की खपत भी घटती है।
- अपने खान-पान में बदलाव करने और फिजिकली एक्टिव रहने से हम इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
सफेद चावल या ब्राउन राइस कौन सा बेहतर?
डाइटीशियन अर्चना जैन बताती हैं कि ब्राउन राइस में सफेद चावल की तुलना में ज्यादा फाइबर होता है, क्योंकि इसकी बाहरी परत का कुछ हिस्सा बरकरार रहता है। ऐसे में ज्यादा फाइबर वाला भोजन ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, सिर्फ चावल की किस्म बदलना पर्याप्त नहीं है। ब्राउन राइस भी कार्बोहाइड्रेट का सोर्स है और इसकी मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है।
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चावल कितना खाना चाहिए?
डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, चावल कितना खाना चाहिए यह व्यक्ति की उम्र, हेल्थ कंडीशन, डाइजेशन और फिजिकल एक्टिविटी पर निर्भर करता है। एक हेल्दी जवान व्यक्ति रोजाना सलाद, सब्जियों और प्रोटीन सोर्स के साथ 1 कटोरी चावल खा सकता है।
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चावल खाने का सही तरीका क्या है?
डाइटीशियन अर्चना जैन सलाह देती हैं कि चावल को सब्जियों और प्रोटीन के साथ बैलेंस थाली का हिस्सा बनाएं। बहुत ज्यादा घी, मक्खन या तले हुए फूड्स के साथ चावल खाने से भोजन की कुल कैलोरी बढ़ सकती है। खाने के बाद हल्की फिजिकल एक्टिविटी भी उपयोगी हो सकती है।
निष्कर्ष
इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर चावल को हमेशा के लिए छोड़ना जरूरी नहीं है। डाइटीशियन अर्चना जैन के अनुसार, कितना चावल खा रहे हैं और उसे किस तरह खा रहे हैं, यह ज्यादा जरूरी है। चावल की मात्रा कंट्रोल रखें और इसे सब्जियों, फाइबर तथा प्रोटीन वाले फूड्स के साथ बैलेंस करें। यदि आपको इंसुलिन रेजिस्टेंस, प्री-डायबिटीज या डायबिटीज है, तो अपनी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार चावल की मात्रा तय करने के लिए डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना बेहतर है।
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FAQ
चावल खाने के बाद नींद क्यों आती है?
चावल खाने के बाद नींद आ सकती है लेकिन खाने के बाद नींद आने के कई और कारण भी हो सकते हैं। बहुत ज्यादा मात्रा में भोजन करना और दिनभर की थकान भी इसकी वजह हो सकती है।क्या पोहा चावल से बेहतर विकल्प हैं?
हर फूड का असर उसकी मात्रा और पूरी डाइट पर निर्भर करता है। पोहा भी कार्बोहाइड्रेट का सोर्स है, इसलिए इसे भी संतुलित मात्रा और प्रोटीन व सब्जियों के साथ लेना बेहतर है।
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Aug 21, 2026 18:22 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Archana Jain
