Fri Oct 9, 2026 | 07:52 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

इंसुलिन रेजिस्टेंस में रात का खाना कब और कितना खाएं? डाइटीशियन से जानें डिनर का सही समय

इंसुलिन रेजिस्टेंस में रात का खाना देर से या जरूरत से ज्यादा खाना ब्लड शुगर मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकता है। यहां एक्सपर्ट से जानिए, डिनर का सही समय, मात्रा और प्लेट में किन चीजों को शामिल करें।
इंसुलिन रेजिस्टेंस में रात का खाना कब और कितना खाएं? डाइटीशियन से जानें डिनर का सही समयइंसुलिन रेजिस्टेंस में रात का खाना कब और कितना खाएं? डाइटीशियन से जानें डिनर का सही समय

अगर आपको इंसुलिन रेजिस्टेंस है, तो सिर्फ दिन में क्या खा रहे हैं, यह ही नहीं बल्कि रात का खाना कब और कितना खा रहे हैं, यह भी जरूरी हो सकता है। कई लोगों की आदत होती है कि दिनभर कम खाते हैं और रात में घर लौटने के बाद भरपेट खाना खाते हैं। जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस को मैनेज करने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि रात में रोटी या चावल खा रहे हैं या नहीं। डिनर की मात्रा, भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मौजूदगी, खाने का समय, सोने का समय और खाने के बाद की एक्टिविटी भी जरूरी हैं।

खासकर देर रात भारी भोजन करने की आदत पर ध्यान देना जरूरी है। अगर रात का खाना बहुत ज्यादा है और इसके बाद फिजिकल एक्टिविटी लगभग नहीं होती, तो यह ब्लड शुगर मैनेजमेंट के लिए सही आदत नहीं हो सकती। वहीं, डिनर को पूरी तरह छोड़ देना भी हर व्यक्ति के लिए जरूरी या सही नहीं है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस में रात का खाना कब और कितना खाएं?

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन बताती हैं कि हमारे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिद्म दिन और रात के अनुसार कई फिजिकल प्रोसेस को कंट्रोल करती है। रात में शरीर की एक्टिविटी और एनर्जी की जरूरत आमतौर पर दिन की तुलना में कम होती है। इसलिए बहुत देर से या जरूरत से ज्यादा खाना कुछ लोगों में ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकता है।

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, डिनर को बहुत देर तक टालने के बजाय नियमित समय पर लेना बेहतर हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए एक ही समय तय नहीं किया जा सकता। सोने के समय और डेली रूटीन को भी ध्यान में रखना चाहिए।

रात का खाना कितना खाना चाहिए?

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस में डिनर की मात्रा जरूरत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। प्लेट में सब्जियां, प्रोटीन और सीमित मात्रा में साबुत अनाज या अन्य कार्बोहाइड्रेट शामिल किए जा सकते हैं।

भोजन की मात्रा व्यक्ति की उम्र, वजन, फिजिकल एक्टिविटी और दिनभर के कुल कैलोरी सेवन पर निर्भर करती है। रात में बहुत हैवी भोजन करने के बजाय बैलेंस और पेट के लिए हल्का भोजन लेना कई लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।

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डिनर में किन चीजों को शामिल करें?

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन सलाह देती हैं कि रात के खाने में फाइबर और प्रोटीन वाले फूड्स शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

  • हरी सब्जियां, दाल, चना, पनीर, अंडा या अन्य प्रोटीन सोर्स व्यक्ति की डाइट के अनुसार शामिल किए जा सकते हैं।
  • वहीं, बहुत ज्यादा मिठाई, शुगर ड्रिंक्स, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा तले हुए फूड्स को सीमित करना बेहतर है।
  • सिर्फ चावल या रोटी को पूरी तरह बंद करने के बजाय उनकी मात्रा और पूरी प्लेट का बैलेंस देखना ज्यादा जरूरी है।

साल 2024 में Diabetes & Metabolism Journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार-

  • मीडियम उम्र और ज्यादा उम्र के लोगों में खाने का सही तरीका बेहतर इंसुलिन सेंसिटिविटी से जुड़ा हुआ पाया गया है।
  • हालांकि, यह असर मुख्य रूप से पुरुषों, जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है और जिनका वजन सामान्य है, उन्हीं में खास तौर पर देखा गया।
  • इससे यह संकेत मिलता है कि डाइट प्लान बनाते समय खाने के पैटर्न पर ध्यान देने से इंसुलिन के फंक्शन में सुधार हो सकता है और इससे जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
  • भविष्य में इस रिश्ते को और स्पष्ट करने तथा सबसे असरदार डाइट पैटर्न तय करने के लिए रेंडमाइज्ड ट्रायल्स की जरूरत है।

डिनर के बाद तुरंत सोना क्यों सही नहीं?

डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन बताती हैं कि खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने के बजाय कुछ समय जागना और हल्की एक्टिविटी करना उपयोगी हो सकता है। भोजन के बाद हल्की वॉक करने से शरीर को ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बहुत तेज एक्सरसाइज करने की जरूरत नहीं होती।

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क्या देर रात खाना इंसुलिन रेजिस्टेंस में नुकसानदायक है?

कभी-कभार देर से खाना किसी व्यक्ति के लिए बड़ी समस्या नहीं हो सकता, लेकिन रोजाना देर रात भारी भोजन करने की आदत मेटाबोलिक हेल्थ के लिए आदर्श नहीं मानी जाती। खासकर अगर देर से खाने के साथ फिजिकल एक्टिविटी कम हो और कुल कैलोरी सेवन ज्यादा हो। डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करने के लिए केवल डिनर के समय पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। पूरे दिन का भोजन, एक्सरसाइज, नींद और वेट मैनेजमेंट भी अहम भूमिका निभाते हैं।

निष्कर्ष

इंसुलिन रेजिस्टेंस में रात का खाना समय पर, बैलेंस और जरूरत के अनुसार मात्रा में लेना बेहतर होता है। बहुत देर रात भारी भोजन करने और खाने के तुरंत बाद सोने से बचना चाहिए। डिनर में प्रोटीन, फाइबर और कंट्रोल मात्रा में कार्बोहाइड्रेट शामिल करें। हालांकि, सही मात्रा और समय हर व्यक्ति की जरूरत के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए यदि आपको डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस है तो अपनी डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना बेहतर है।

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FAQ

  • क्या डिनर में फल खाना सही है?

    सिर्फ फल को रात के भोजन का विकल्प बनाना हर व्यक्ति के लिए सही नहीं हो सकता। डिनर में प्रोटीन, फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्वों का बैलेंस बनाए रखना जरूरी है।
  • क्या रात के खाने के बाद टहलना फायदेमंद हो सकता है?

    खाने के बाद हल्की एक्टिविटी कुछ लोगों में भोजन के बाद ब्लड शुगर बैलेंस में मदद कर सकती है।
  • क्या देर रात भूख लगे तो कुछ खा सकते हैं?

    अगर कभी-कभार देर रात भूख लगती है तो फूड का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। बार-बार मीठे, तले हुए या ज्यादा कैलोरी वाले फूड्स लेने से बचना बेहतर है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 24, 2026 16:53 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Archana Jain