क्या आपको दिन में बार-बार कुछ खाने की इच्छा होती है? नाश्ते और दोपहर के खाने के बीच कुछ खाया, फिर शाम की चाय के साथ बिस्कुट या नमकीन लिया और रात के खाने से पहले दोबारा स्नैकिंग कर ली, अगर यह आपकी रोज की आदत है, तो क्या इसका असर इंसुलिन पर भी पड़ सकता है? यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, बार-बार स्नैकिंग को समझने के लिए व्यक्ति की पूरी डाइट और लाइफस्टाइल को देखना जरूरी है। हर स्नैक शरीर के लिए नुकसानदायक नहीं होता। लंबे समय तक फिजिकल एक्टिविटी करने वाले व्यक्ति, बच्चों या कुछ खास परिस्थितियों में भोजन के बीच स्नैक की जरूरत हो सकती है। वहीं, भूख न होने पर भी बार-बार मीठे, पैकेज्ड या ज्यादा कैलोरी वाले स्नैक्स लेना अलग स्थिति है।
अगर आपको हर थोड़ी देर में भूख लगती है, भोजन के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता या शाम होते-होते लगातार कुछ खाने की इच्छा होती है, तो अपनी खानपान की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। आखिर बार-बार स्नैकिंग और इंसुलिन के बीच क्या संबंध है और क्या खाने के बीच अंतर रखना जरूरी है? आइए डॉक्टर से समझते हैं।
क्या बार-बार स्नैकिंग से इंसुलिन बढ़ता रहता है?
डॉक्टर ज्यादित्य घोष के अनुसार, जब हम कार्बोहाइड्रेट वाले फूड्स खाते हैं, तो पाचन के बाद ग्लूकोज ब्लड में पहुंचता है। इसके जवाब में शरीर इंसुलिन बनाता है, जो ग्लूकोज को शरीर की सेल्स तक पहुंचाने में मदद करता है। इसलिए भोजन के बाद इंसुलिन का बढ़ना शरीर की नॉर्मल प्रोसेस है। समस्या केवल इंसुलिन के अस्थायी रूप से बढ़ने की नहीं है। लंबे समय तक ज्यादा कैलोरी लेना, वजन बढ़ना और कम फिजिकल एक्टिविटी जैसे कई कारक इंसुलिन रेजिस्टेंस के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
- बार-बार खाने पर भोजन के अनुसार इंसुलिन का रिएक्शन भी बार-बार हो सकता है।
- हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार स्नैक खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाएगा।
- स्नैक में क्या है, कितनी मात्रा में खाया जा रहा है और व्यक्ति की कुल डाइट कैसी है, ये सभी बातें जरूरी हैं।
- अगर हर कुछ घंटे में मीठे, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट या ज्यादा कैलोरी वाले स्नैक्स लिए जाते हैं, तो इससे कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है और ब्लड शुगर कंट्रोल प्रभावित हो सकता है।
हर स्नैकिंग नुकसानदायक नहीं होती
डॉक्टर ज्यादित्य घोष बताते हैं कि बार-बार स्नैकिंग को अपने आप में खराब आदत नहीं माना जा सकता। कुछ लोगों को भोजन के बीच भूख लग सकती है और उनके डेली रूटीन, उम्र या फिजिकल एक्टिविटी के अनुसार छोटे मील यानी भोजन की जरूरत हो सकती है। फर्क इस बात से पड़ता है कि स्नैक में क्या शामिल है। बिना जरूरत शुगर से बनी ड्रिंक्स, मिठाई, बिस्कुट या तले हुए फूड्स लेने के बजाय प्रोटीन, फाइबर और पोषक तत्वों वाले विकल्प बेहतर हो सकते हैं।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस में किन बातों का ध्यान रखें?
- डॉक्टर ज्यादित्य घोष के अनुसार, केवल स्नैकिंग पर ध्यान देने के बजाय पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है।
- भोजन की मात्रा कंट्रोल रखना, पर्याप्त फाइबर लेना, नियमित फिजिकल एक्टिविटी करना और वजन को सीमा में रखना मेटाबोलिक हेल्थ के लिए जरूरी हो सकता है।
- अगर किसी व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है या खाना खाने के कुछ समय बाद ही फिर से कुछ खाने की इच्छा होती है, तो भोजन की क्वालिटी और दिनभर की कुल डाइट पर भी ध्यान देना चाहिए।
साल 2025 में Frontiers in Nutrition में प्रकाशित मेटा-एनालिसिस के अनुसार, लगातार बैठने के बजाय हर 30 मिनट में 2 से 5 मिनट की हल्की एक्सरसाइज (जैसे चलना या साधारण कसरत) करने से मोटापे से पीड़ित वयस्कों में ब्लड शुगर और इंसुलिन का लेवल काफी बेहतर हो सकता है। यह तरीका शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन के असंतुलन को कम करने में बहुत असरदार पाया गया है।
इस स्टडी से यह भी पता चलता है कि युवाओं में शुगर कंट्रोल में ज्यादा सुधार देखा गया, जबकि ज्यादा उम्र के लोगों में इंसुलिन कम करने में ज्यादा फायदा मिला। कुल मिलाकर, सेहतमंद रहने के लिए लंबे समय तक बैठने से बचना और बीच-बीच में थोड़ा चलना-फिरना बहुत फायदेमंद है।
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निष्कर्ष
बार-बार स्नैकिंग का इंसुलिन पर असर व्यक्ति की डाइट, स्नैक की क्वालिटी, मात्रा, कुल कैलोरी सेवन और फिजिकल एक्टिविटी पर निर्भर करता है। हर बार कुछ खाना अपने आप में इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण नहीं है, लेकिन बार-बार ज्यादा कैलोरी और कम पोषण वाले फूड्स लेने की आदत मेटाबोलिक हेल्थ के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए स्नैकिंग कितने बात की से ज्यादा जरूरी है कि आप क्या, कितना और क्यों खा रहे हैं।
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FAQ
क्या बिना भूख के स्नैकिंग करना सही है?
अगर भूख न होने पर आदतन बार-बार खाते हैं, तो इससे अनजाने में कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है। इसलिए स्नैक लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपको वास्तव में भूख लगी है या सिर्फ खाने की इच्छा हो रही है।क्या मीठा खाने से इंसुलिन तुरंत बढ़ता है?
मीठे और कार्बोहाइड्रेट वाले फूड्स खाने के बाद शरीर इंसुलिन रिएक्शन देता है। इसका लेवल और रिएक्शन भोजन की मात्रा और व्यक्ति की मेटाबोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।क्या फल खाने से इंसुलिन प्रभावित होता है?
फल खाने के बाद भी शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन का रिएक्शन हो सकता है। हालांकि, पूरे फल में मौजूद फाइबर और पोषक तत्व इसे दूसरे फूड्स से अलग बनाते हैं।
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Aug 24, 2026 15:53 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Jayaditya Ghosh
