Wed Oct 7, 2026 | 05:40 PM IST

Medically Reviewed by Dt Divya Gandhi , Therapeutic Diet (Diabetes & PCOD)

क्या लगातार स्नैकिंग करने से मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है? एक्सपर्ट से जानें

लगातार स्नैकिंग करने से मेटाबॉलिज्म पर नेगेटिव असर पड़ता है, जो कि वेट लॉस के लिए सही नहीं है। दिनभर स्नैकिंग से इंसुलिन और फैट बर्निंग प्रक्रिया बाधित होती है। जानें, अन्य कारकों के बारे में।
क्या लगातार स्नैकिंग करने से मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है? एक्सपर्ट से जानेंक्या लगातार स्नैकिंग करने से मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है? एक्सपर्ट से जानें

कई बार आपने देखा होगा कि वजन कम करने के लिए ज्यादातर लोग डाइट पैटर्न में काफी बदलाव करते हैं। इसमें आमतौर पर तीन हैवी मील लेने के बजाय छोटे-छोटे मील लिए जाते हैं। ऐसे में व्यक्ति को जब भी भूख लगती है, वह दिन भर कुछ न कुछ स्नैकिंग करता रहता है। माना जाता है कि दिन भर स्नैकिंग करने से मेटाबॉलिज्म पर बहुत गहरा असर पड़ता है, आइए, Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से जानते हैं कि क्या वाकई यह सच है?

मेटाबॉलिज्म पर स्नैकिंग का असर

does constant snacking affect metabolism more than meal 01 (21)does constant snacking affect metabolism more than meal 01 (21)

इंसुलिन और फैट बर्निंग

जब आप लंबे समय तक कुछ नहीं खाते हैं, तब इंसुलिन का स्तर घट जाता है। इसी तरह, जब आप दिन भर कुछ न कुछ स्नैकिंग करते रहते हैं, तो इसकी वजह से शरीर में इंसुलिन हार्मोन का स्तर हमेशा बढ़ा हुआ रहता है। जानकारी के लिए बता दें कि इंसुलिन एक फैट-स्टोरिंग हार्मोन है। जब इंसुलिन लगातार हाई रहता है, तो शरीर फैट बर्न (मेटाबोलाइज) नहीं कर पाता। ऐसे में मेटाबॉलिज्म पर प्रभाव नजर आने लगता है।

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कैलोरी बर्न

जब भी हम कुछ खाते हैं, तो शरीर उसे पचाने के लिए एक्टिव मोड में रहता है। इस दौरान शरीर कुछ मात्रा में कैलोरी भी बर्न करता है। इस प्रक्रिया को चिकित्सकीय भाषा में थर्मिक इफेक्ट ऑफ फूड कहते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब आप एक बार में हैवी मील लेते हैं, तो इसकी वजह से मेटाबॉलिज्म को बूस्ट मिलता है। वहीं, जब आप दिन भर स्नैकिंग करते रहते हैं, तो इसका प्रभाव कम और धीमा हो जाता है।

मेटाबोलिक सुस्ती

स्नैकिंग के रूप में अक्सर लोग हेल्दी विकल्पों के बजाय चिप्स, प्रोसेस्ड फूड या कई तरह की मीठी चीजों का सेवन अधिक करते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं, जिससे मेटाबोलिक रेट कम हो जाता है। इसके विपरीत, अगर आप हैवी मील लेते हैं, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स जैसी हेल्दी चीजें शामिल हैं, तो मेटाबोलिक रेट को लंबे समय तक स्थिर रहता है।

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निष्कर्ष

वजन कम करने की चाह में दिन भर स्नैकिंग करना सही नहीं है। इसका आपके हेल्थ पर अच्छा नहीं, बल्कि बुरा असर पड़ता है। विशेषकर, मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जो कि वेट लॉस करने को भी चुनौतिपूर्ण बना देता है। विशेषज्ञों की मानें, तो अगर जरूरत न हो, तो दिन भर स्नैकिंग करने से बचें। अगर वजन कम करना है, तो डाइट के साथ-साथ लाइफस्टाइल में भी बदलाव करें और नियमित रूप से एक्सरसाइज जरूर करें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • मेटाबॉलिज्म के लिए बेहतर स्नैक्स क्या है?

    अगर भूख लग रही है, तो प्रोटीन और फाइबर युक्त चीजें जैसे नट्स (बादाम, अखरोट), उबला हुआ चना या मखाना खाएं।
  • दो मील के बीच कितना गैप होना चाहिए?

    मेटाबॉलिज्म को एक्टिव रखने और इंसुलिन को संतुलित बनाए रखने के लिए दो मील के बीच 4 से 5 घंटे का गैप जरूर लें।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jun 18, 2026 15:30 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 18, 2026 15:30 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dt Divya Gandhi