Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

हर 2 घंटे में कुछ न कुछ खाना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर से जानें लगातार स्नैकिंग के नुकसान

शरीर को भोजन पचाने और एनर्जी संतुलित करने के लिए दो मील्‍स के बीच गैप की जरूरत होती है। लगातार खाने से यह नेचुरल प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। जानें लगातार स्नैकिंग के नुकसान।

आजकल कई लोग फिट रहने या भूख कंट्रोल करने के लिए हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाने की आदत अपना रहे हैं। कुछ लोग इसे हेल्दी मानते हैं और बार-बार स्नैकिंग को मेटाबॉलिज्म बढ़ाने का तरीका समझते हैं। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना जरूरत लगातार कुछ खाते रहना सेहत के लिए हान‍िकारक हो सकता है। अगर व्यक्ति बार-बार हाई कैलोरी, मीठे या प्रोसेस्ड स्नैक्स खाता है, तो इससे वजन बढ़ने, ब्लड शुगर असंतुलन और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। लगातार स्नैकिंग के नुकसान जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

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लगातार स्नैकिंग का मतलब है दिनभर में बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना, चाहे भूख हो या नहीं। इसमें बिस्किट, चिप्स, नमकीन, मीठे पेय, चॉकलेट या प्रोसेस्ड फूड्स शामिल हो सकते हैं। हालांकि कुछ लोग हेल्दी स्नैक्स जैसे फल, नट्स या दही भी खाते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा बार खाना शरीर के लिए सही नहीं माना जाता।

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वजन बढ़ने का खतरा

हर थोड़ी देर में कुछ खाने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा हो सकती है। कई बार लोगों को यह एहसास भी नहीं होता कि दिनभर की स्नैकिंग से वे जरूरत से ज्यादा कैलोरी ले रहे हैं। अगर शारीरिक गतिविधि कम हो, तो यह आदत धीरे-धीरे मोटापे का कारण बन सकती है।

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ब्लड शुगर पर असर

बार-बार खाने से ब्लड शुगर लगातार ऊपर-नीचे हो सकती है। खासतौर पर मीठे और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले स्नैक्स इंसुलिन लेवल को प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

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पाचन तंत्र को नहीं मिल पाता आराम

जब व्यक्ति लगातार कुछ खाता रहता है, तो पाचन तंत्र को आराम नहीं मिल पाता। इससे गैस, एसिडिटी, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। भोजन के बीच उचित अंतर होना जरूरी है ताकि शरीर भोजन को सही तरीके से पचा सके।

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लगातार स्नैकिंग से क्यों बढ़ती है भूख?

बार-बार खाने से शरीर की नेचुरल हंगर और फुलनेस सिग्नल्स प्रभावित हो सकते हैं। इससे व्यक्ति को जल्दी-जल्दी भूख लगने लगती है और ओवरईटिंग की आदत बन सकती है।

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कौन से स्नैक्स ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं?

  • चिप्स और नमकीन
  • कुकीज और बिस्किट
  • मीठे पेय और कोल्ड ड्रिंक्स
  • पैक्ड स्नैक्स
  • ज्यादा शुगर वाले एनर्जी बार
  • इनमें कैलोरी, नमक और शुगर ज्‍यादा होती है जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।

हेल्दी स्नैकिंग कैसे करें?

अगर आपको बार-बार भूख लगती है, तो हेल्दी विकल्प चुनना जरूरी है। जैसे-

  • ताजे फल
  • बिना नमक वाले नट्स
  • दही
  • स्प्राउट्स
  • नारियल पानी

कितनी बार खाना सही माना जाता है?

हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है। कुछ लोगों के लिए तीन मुख्य मील और एक से दो हेल्दी स्नैक्स सही हो सकते हैं। वहीं कुछ लोग कम खाने में ज्यादा सहज महसूस करते हैं। सबसे जरूरी बात है संतुलित आहार, सही मात्रा और शरीर की जरूरत को समझना।

निष्कर्ष:

हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाना हमेशा हेल्दी नहीं होता। लगातार स्नैकिंग से वजन बढ़ना, ब्लड शुगर असंतुलन और पाचन संबंधि‍त समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि भूख और आदत में फर्क समझें और हेल्दी खाने की आदत अपनाएं।

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 19, 2026 21:03 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 19, 2026 21:03 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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